लखनऊ में 7 दुर्लभ बाज बरामद, मुंबई का कथित तस्कर गिरफ्तार

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने सात दुर्लभ बाज यानी फाल्कन बरामद करते हुए मुंबई निवासी एक कथित तस्कर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी का संबंध ऐसे गिरोह से है, जो उत्तर प्रदेश के जंगलों से संरक्षित पक्षियों को एकत्र कर मुंबई के रास्ते खाड़ी देशों तक पहुंचाता था। इस नेटवर्क में दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों के नाम सामने आए हैं।इस कार्रवाई ने प्रदेश में सक्रिय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क और संरक्षित पक्षियों की अंतरराष्ट्रीय मांग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुंबई निवासी फिरोज मसर्रत खान के रूप में हुई है। उसके कब्जे से सात दुर्लभ बाज, एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद किया गया है। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

लखनऊ में 7 दुर्लभ बाज बरामद
लखनऊ में 7 दुर्लभ बाज बरामद

मदेयगंज के इरादतनगर में संयुक्त टीम की छापेमारी

एसटीएफ को 30 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मुंबई का एक व्यक्ति प्रतिबंधित पक्षियों को लेकर लखनऊ पहुंचने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई।इसके बाद टीम ने लखनऊ के मदेयगंज थाना क्षेत्र के इरादतनगर मोहल्ले में छापेमारी की। बताया गया है कि 30 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे एक मकान से आरोपी को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से सात दुर्लभ बाज बरामद हुए। इसके अलावा एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी मिला।कार्रवाई के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह इन पक्षियों को कहां से लेकर आया था और इस नेटवर्क में उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल हैं।

गोरखपुर, लखीमपुर और सीतापुर के जंगलों से जुटाए जाते थे पक्षी

एसटीएफ की पूछताछ में कथित तस्करी नेटवर्क को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से संरक्षित पक्षियों को पकड़कर एकत्र करते थे। इसके बाद उन्हें अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजने की व्यवस्था की जाती थी।जांच में सामने आया है कि पक्षियों की आपूर्ति के लिए मुंबई को एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। वहां से इन्हें दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे खाड़ी देशों तक भेजे जाने का आरोप है। इस तरह स्थानीय स्तर पर पक्षियों को पकड़ने से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की पहचान और उनकी भूमिका अभी जांच का विषय है। एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीमें आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के दूसरे सदस्यों और कथित स्थानीय संपर्कों का पता लगाने में जुटी हैं।

सात बाजों की कीमत को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट

इस कार्रवाई के बाद बरामद सात दुर्लभ बाजों की कीमत भी चर्चा में है।  इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 14 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह आंकड़ा 1.40 करोड़ रुपये दिया गया है। दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर है। ऐसे में बरामद पक्षियों की वास्तविक प्रजाति, उनकी संख्या और आधिकारिक मूल्यांकन की पुष्टि संबंधित एजेंसियों से होना जरूरी है।फाल्कन यानी बाज की कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण के दायरे में आती हैं। इन पक्षियों का अवैध शिकार, पकड़ना, रखना और व्यापार करना कानून के तहत अपराध हो सकता है। इसलिए इस बरामदगी को केवल तस्करी के एक मामले के तौर पर नहीं, बल्कि संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है।

वन्यजीव तस्करी से जैव विविधता को खतरा

वन्यजीवों की अवैध तस्करी का असर केवल संबंधित प्रजाति तक सीमित नहीं रहता। जंगलों से पक्षियों और दूसरे जीवों को अवैध रूप से पकड़ने से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। पक्षी बीजों के प्रसार, कीटों की संख्या नियंत्रित करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जब किसी प्रजाति के जीवों को बड़ी संख्या में उनके प्राकृतिक आवास से हटाया जाता है तो स्थानीय जैव विविधता पर असर पड़ सकता है। दुर्लभ और संरक्षित पक्षियों की अंतरराष्ट्रीय मांग इस तरह के अवैध कारोबार को बढ़ावा दे सकती है। इसी वजह से वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ मदेयगंज थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई स्थानीय पुलिस और संबंधित वन्यजीव एजेंसियों के स्तर से की जाएगी।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद पक्षियों को किस स्थान से लाया गया था, उन्हें किसे सौंपा जाना था और क्या इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों या विदेशों में सक्रिय तस्करों से जुड़े हैं। मोबाइल फोन से मिले संभावित संपर्कों और अन्य साक्ष्यों की जांच भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

लखनऊ में हुई इस कार्रवाई को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, एक आरोपी की गिरफ्तारी और सात पक्षियों की बरामदगी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होना अभी बाकी है। जांच का अगला चरण गिरोह के अन्य सदस्यों, कथित स्थानीय शिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करना होगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश के जंगलों से संरक्षित पक्षियों को पकड़कर विदेशों तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। क्या बरामद सात बाजों के अलावा भी दूसरे पक्षियों की तस्करी की गई है? इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।फिलहाल एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई ने राजधानी में सक्रिय बताए जा रहे वन्यजीव तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा कसने की शुरुआत कर दी है। अब देखना होगा कि पूछताछ और जांच के जरिए इस कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह की पूरी कड़ी कितनी जल्दी सामने आती है।

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