हर तीसरा भारतीय फैटी लिवर का मरीज, बचाव के उपाय

Digital Desk
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भारत में फैटी लिवर डिजीज एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स और डॉक्टरों के अनुसार, हर तीसरा भारतीय फैटी लिवर से प्रभावित हो सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं।लिवर को शरीर का ‘केमिकल प्लांट’ कहा जाता है, क्योंकि यह भोजन को पचाने, टॉक्सिन्स को बाहर निकालने, दवाओं को मेटाबोलाइज करने और ऊर्जा संग्रह जैसे कई जरूरी काम करता है। जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो फैटी लिवर की स्थिति बनती है, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर तक पहुंच सकती है।

फैटी लिवर क्या है और क्यों खतरनाक है

फैटी लिवर के प्रकार

डॉक्टरों के अनुसार फैटी लिवर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जो गलत खानपान, मोटापा और डायबिटीज से जुड़ा होता है। दूसरा अल्कोहॉलिक फैटी लिवर, जो अधिक शराब के सेवन से होता है।

शुरुआती चरण में फैटी लिवर के लक्षण हल्के या बिल्कुल नहीं होते, इसलिए कई मरीजों को इसका पता ही नहीं चलता। लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस में बदल सकता है।

 फैटी लिवर के आम लक्षण

फैटी लिवर के कुछ सामान्य लक्षणों में थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, वजन बढ़ना, भूख न लगना और कमजोरी शामिल हैं। कई मामलों में मरीज को डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत भी होती है।

उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों का कहना है कि अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी है।

 लिवर को स्वस्थ रखने में खानपान की भूमिका

H3: डॉक्टरों की सलाह क्यों जरूरी

विशेषज्ञ मानते हैं कि फैटी लिवर को शुरुआती स्टेज में सही डाइट और लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जा सकता है। दवाओं के साथ-साथ खानपान में सुधार सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार, कुछ खास फूड्स लिवर में जमा फैट को कम करने, सूजन घटाने और लिवर सेल्स को रिपेयर करने में मदद करते हैं।

लिवर को बचाने के लिए क्या खाएं

 हरी सब्जियां और फल

पालक, ब्रोकली, लौकी, तोरी और पत्तेदार सब्जियां लिवर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। सेब, पपीता, नींबू और आंवला भी लिवर हेल्थ के लिए उपयोगी हैं।

 साबुत अनाज और फाइबर युक्त आहार

ओट्स, ब्राउन राइस, जौ और मल्टीग्रेन रोटी फैटी लिवर के मरीजों के लिए फायदेमंद हैं। फाइबर युक्त आहार शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है।

 हेल्दी फैट और प्रोटीन

अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और चिया सीड्स में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड लिवर की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा दालें, लो-फैट दही और उबली दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं।

 किन चीजों से बनाएं दूरी

तला-भुना और जंक फूड

फैटी लिवर के मरीजों को तले-भुने खाने, फास्ट फूड, बेकरी आइटम्स और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। इनमें मौजूद ट्रांस फैट और अतिरिक्त शुगर लिवर में फैट बढ़ाने का काम करते हैं।

 शराब और अत्यधिक नमक

डॉक्टर साफ कहते हैं कि लिवर को बचाना है तो शराब से पूरी तरह परहेज जरूरी है। इसके अलावा ज्यादा नमक भी लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे सूजन बढ़ सकती है।

 लाइफस्टाइल में बदलाव क्यों जरूरी

 रोजाना एक्सरसाइज का महत्व

सिर्फ डाइट ही नहीं, बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी फैटी लिवर से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। रोजाना 30–40 मिनट की वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करती है।

 वजन और नींद पर नियंत्रण

वजन को संतुलित रखना और 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी लिवर हेल्थ के लिए जरूरी है। तनाव और नींद की कमी भी हार्मोनल असंतुलन के जरिए लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है।

 उत्तर प्रदेश में फैटी लिवर पर बढ़ती चिंता

उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बदलती जीवनशैली, शारीरिक मेहनत की कमी और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन इसकी बड़ी वजह है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे नियमित हेल्थ चेकअप कराएं और लिवर से जुड़ी समस्याओं को हल्के में न लें।

 समय पर ध्यान से बच सकता है लिवर

फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है, जिसे समय रहते पहचाना जाए तो पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और बुरी आदतों से दूरी बनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

डॉक्टरों का मानना है कि अगर लोग आज से ही अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो आने वाले वर्षों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

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