आवारा कुत्तों पर सख्ती, SC गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई

Digital Desk
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उत्तर प्रदेश के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है, जिससे आम नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। कई जिलों से ऐसी खबरें सामने आई हैं जहां सुबह-शाम घर से निकलना लोगों के लिए चुनौती बन गया है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने अब इस समस्या से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू कर दिया है।सरकार का मानना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ आम जनता को राहत देना है, बल्कि आवारा पशुओं के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रवैया भी सुनिश्चित करना है।

सरकार का बड़ा फैसला: शेल्टर होम और ABC सेंटर

आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य सरकार ने नगर निगमों और जनपद मुख्यालयों में डॉग शेल्टर होम और एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला खासतौर पर उन शहरों के लिए अहम माना जा रहा है जहां डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।इन केंद्रों के माध्यम से आवारा कुत्तों को सड़कों से सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनका इलाज, टीकाकरण और नसबंदी की जाएगी। इससे न केवल उनकी संख्या नियंत्रित होगी, बल्कि बीमार और आक्रामक कुत्तों के कारण होने वाले हादसों में भी कमी आएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा।

ABC योजना क्या है और कैसे काम करेगी?

एबीसी योजना यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम एक वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पद्धति है, जिसके जरिए आवारा कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित किया जाता है। इस योजना के तहत कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाती है और फिर उन्हें रेबीज सहित अन्य जरूरी टीके लगाए जाते हैं।

इस प्रक्रिया के बाद कुत्तों को उनके क्षेत्र में वापस छोड़ा जाता है, ताकि वे अपने इलाके में नए कुत्तों के आने से रोक सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका लंबे समय में डॉग बाइट की घटनाओं को कम करने में काफी प्रभावी साबित होता है। उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी मॉडल को अपनाकर समस्या का स्थायी समाधान चाहती है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि आवारा कुत्तों के खिलाफ की जाने वाली हर कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत ही होगी। इसका मतलब है कि किसी भी तरह की अमानवीय या गैरकानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। कुत्तों को मारने या प्रताड़ित करने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से संभाला जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पशुपालन विभाग, नगर विकास विभाग और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय स्थापित करने का फैसला लिया है।

परियोजना की लागत और डीपीआर की तैयारी

सरकार द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, प्रत्येक शेल्टर होम और एबीसी सेंटर के लिए अलग-अलग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई गई है। अनुमानित लागत प्रति यूनिट 470 लाख से 531 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। इस बजट में जमीन, निर्माण, चिकित्सा सुविधाएं, स्टाफ और संचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं शामिल होंगी।

प्रयागराज, लखनऊ सहित कई बड़े नगर निगमों में जमीन चिन्हित कर ली गई है, ताकि परियोजना को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में इन केंद्रों का निर्माण कार्य शुरू हो जाए और चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाए।

शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलेगा लाभ

अब तक आवारा कुत्तों की समस्या मुख्य रूप से शहरों में ज्यादा देखने को मिलती थी, लेकिन हाल के वर्षों में ग्रामीण इलाकों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने जनपद मुख्यालयों में भी एबीसी सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी और पशुओं की सुरक्षा व नियंत्रण दोनों सुनिश्चित किए जा सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रदेश में एक समान नीति लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है।

आम जनता और पशु कल्याण दोनों पर फोकस

सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल डॉग बाइट के डर को कम करना नहीं है, बल्कि पशु कल्याण को भी प्राथमिकता देना है। शेल्टर होम्स में बीमार, घायल और बेसहारा कुत्तों की देखभाल की जाएगी, जिससे उन्हें बेहतर जीवन मिल सके।

पशु विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। आम जनता को भी जागरूक किया जाएगा कि वे आवारा कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार न करें और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग को सूचना दें।

स्थानीय निकायों की भूमिका होगी अहम

इस पूरी योजना को सफल बनाने में नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों की भूमिका बेहद अहम होगी। स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डॉग बाइट की घटनाओं का रिकॉर्ड रखें, हॉटस्पॉट की पहचान करें और वहां विशेष अभियान चलाएं।

इसके साथ ही, सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और खुले में मांस-अवशेष फेंके जाने पर रोक जैसे कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि आवारा कुत्तों के लिए भोजन के अनियंत्रित स्रोत कम हों।

उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप शेल्टर होम और एबीसी सेंटर की स्थापना से न केवल डॉग बाइट की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार भी सुनिश्चित होगा।

यदि यह योजना तय समयसीमा में और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के शहरों और गांवों में यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकेगी।

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