आज देशभर में ऐप ड्राइवर हड़ताल, कैब सेवाएं प्रभावित

Digital Desk
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शनिवार को देशभर में ऐप आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यानी गिग वर्कर्स की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ओला, उबर, रैपिडो और अन्य ऐप आधारित कैब व बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवर इस हड़ताल में शामिल हुए हैं। यूनियनों के आह्वान पर ड्राइवरों ने काम बंद कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।इस हड़ताल का असर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी देखा जा सकता है। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहरों में यात्रियों को कैब बुक करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर किराए में बढ़ोतरी और लंबा वेटिंग टाइम देखने को मिला है।यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल ड्राइवरों की लगातार घटती आय, कंपनियों की मनमानी नीतियों और सरकार की ओर से न्यूनतम बेस फेयर तय न किए जाने के विरोध में की जा रही है।

किन संगठनों ने किया हड़ताल का आह्वान

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेतृत्व में आयोजित की गई है। इन संगठनों से जुड़े हजारों ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं।

यूनियन नेताओं का कहना है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 लागू होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने अभी तक न्यूनतम बेस किराया तय नहीं किया है। इसका फायदा उठाकर एग्रीगेटर कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किराया कम कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों की आमदनी प्रभावित हो रही है।

घटती कमाई बनी सबसे बड़ी समस्या

ड्राइवरों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रति ट्रिप मिलने वाली राशि लगातार कम होती गई है, जबकि ईंधन, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा घंटे काम करना पड़ रहा है, लेकिन आय कम होती जा रही है।

यूनियनों के मुताबिक, कंपनियां इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बार-बार बदलाव करती हैं और कमीशन दरें बढ़ाती रहती हैं। इससे ड्राइवरों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम आय की गारंटी भी जरूरी है।

यूनियनों के अनुसार, यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। हालांकि कई शहरों में आंशिक रूप से सेवाएं चालू रहने की भी संभावना है।

फिलहाल यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि यात्रा से पहले कैब उपलब्धता जांच लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करें।

यह हड़ताल न केवल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति को उजागर करती है, बल्कि देश में तेजी से बढ़ रही गिग इकॉनमी के सामने खड़ी चुनौतियों को भी सामने लाती है।

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