हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह हमला 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल विस्फोट के बाद राजधानी में सबसे घातक आतंकी घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के उत्तरी और दक्षिणी प्रांतों में सक्रिय आतंकी संगठनों की गतिविधियां हाल के महीनों में बढ़ी हैं। खासतौर पर अफगानिस्तान से सटे इलाकों में सुरक्षा बल लगातार उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिसके चलते आतंकी संगठन बड़े हमलों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
गेट पर रोका गया, वहीं खुद को उड़ा लिया
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आत्मघाती हमलावर मस्जिद के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे गेट पर ही रोक लिया गया। इसके बाद हमलावर ने वहीं खुद को विस्फोट से उड़ा लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका नमाज शुरू होने के कुछ ही क्षण बाद हुआ। 52 वर्षीय मोहम्मद काज़िम ने कहा कि विस्फोट बेहद शक्तिशाली था और इसकी आवाज दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद मस्जिद के अंदर धुआं और मलबा फैल गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने में मुश्किल हुई।
हमलावर और सुरक्षा स्वयंसेवकों के बीच हुई मुठभेड़
एक अन्य नमाजी इमरान महमूद के अनुसार, हमलावर को रोकने के दौरान मस्जिद के स्वयंसेवी सुरक्षा कर्मियों और उसके बीच झड़प भी हुई। उन्होंने बताया कि हमलावर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था, तभी एक घायल स्वयंसेवक ने पीछे से उस पर गोली चलाई, जिससे वह घायल हो गया।
इसके कुछ ही क्षण बाद हमलावर ने विस्फोट कर दिया। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि उसे गेट पर नहीं रोका जाता, तो मस्जिद के अंदर और अधिक जनहानि हो सकती थी।
शनिवार को पीड़ितों का अंतिम संस्कार, शोक की लहर
हमले में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जा रहा है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
पाकिस्तान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है। अधिकारियों ने कहा है कि इस हमले में शामिल नेटवर्क की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ती आतंकी घटनाओं से सुरक्षा पर सवाल
हाल के महीनों में पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। खासतौर पर अफगानिस्तान से लगने वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच लगातार मुठभेड़ हो रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय अस्थिरता और सीमा पार आतंकी गतिविधियों के कारण राजधानी जैसे संवेदनशील इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। इस हमले के बाद धार्मिक स्थलों, सरकारी इमारतों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
भारत और उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सुरक्षा चिंता
इस तरह की घटनाएं पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और संवेदनशील राज्यों में भी धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना जरूरी है।
त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
इस्लामाबाद मस्जिद हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निंदा की गई है। कई देशों और संगठनों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने से ऐसे हमलों को रोकने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं और हमलावर के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।