ट्रंप की सुरक्षा सख्त, व्हाइट हाउस करेगा समीक्षा

Editorial
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर व्हाइट हाउस ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। इस घटना में ट्रंप बाल-बाल बच गए, जिसके बाद अब उनकी सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका में कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम होने वाले हैं, जिनमें राष्ट्रपति की मौजूदगी तय है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने मौजूदा प्रोटोकॉल की कमजोरियों को उजागर किया है।

सुरक्षा एजेंसियों की अहम बैठक इस सप्ताह

व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसन वाइल्स ने इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में यूएस सीक्रेट सर्विस और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

बैठक में राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े सभी प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। खासतौर पर बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों में जहां कई उच्च पदस्थ अधिकारी एक साथ मौजूद होते हैं, वहां सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए भविष्य में सुरक्षा मानकों को और सख्त करने पर विचार किया जा रहा है।

आगामी दिनों में ट्रंप को कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना है, खासकर 4 जुलाई को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां नई रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं ताकि किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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उत्तराधिकार क्रम पर भी उठे सवाल

इस घटना के बाद राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार क्रम (Presidential Succession) को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ कैबिनेट सदस्य मौजूद थे, जो उत्तराधिकार सूची में शामिल हैं।

‘डेजिग्नेटेड सर्वाइवर’ पर फिर बहस

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि इस बार किसी ‘डेजिग्नेटेड सर्वाइवर’ को नामित नहीं किया गया था क्योंकि कई कैबिनेट सदस्य पहले से ही कार्यक्रम में शामिल नहीं थे।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में ‘डेजिग्नेटेड सर्वाइवर’ की व्यवस्था को और स्पष्ट और अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की संयुक्त मौजूदगी पर सवाल

रिपब्लिकन नेता माइकल मैक्कॉल ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को एक ही कार्यक्रम में एक साथ मौजूद रहने के नियमों पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।

व्हाइट हाउस की बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी कि क्या दोनों शीर्ष नेताओं को एक साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए या नहीं।

क्या बदल सकती है अमेरिका की सुरक्षा नीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद अमेरिका की वीवीआईपी सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव हो सकते हैं। सीक्रेट सर्विस पहले ही दुनिया की सबसे मजबूत सुरक्षा एजेंसियों में से एक मानी जाती है, लेकिन इस घटना ने सुधार की जरूरत को उजागर किया है।

आने वाले समय में निम्न बदलाव संभव हैं:

  • बड़े आयोजनों में सुरक्षा घेरा और सख्त होगा
  • हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की उपस्थिति को अलग-अलग किया जा सकता है
  • टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी को बढ़ाया जाएगा

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ी चिंता

इस घटना का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। दुनिया भर के देशों में वीआईपी सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भारत समेत कई देशों में भी ऐसे आयोजनों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी, जहां राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम अक्सर होते रहते हैं, सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की घटनाओं से सबक ले सकती हैं।

व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में हुई गोलीबारी की घटना ने अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप की सुरक्षा को लेकर की जा रही यह समीक्षा भविष्य में बड़े बदलावों का संकेत देती है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या नई रणनीतियां लागू होती हैं और वे कितनी प्रभावी साबित होती हैं।

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