लखनऊ के मदेयगंज क्षेत्र में स्थित न्यू रिलैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान एक युवती की मौत के बाद हड़कंप मच गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और कथित झोलाछाप डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान शिवानी कश्यप के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि गलत इलाज और समय पर उचित चिकित्सकीय सुविधा न मिलने के कारण शिवानी की जान चली गई।घटना के बाद परिवार ने मड़ियांव थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल से जुड़े गौस और अब्दुल राशिद नामक व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
ठेके पर डॉक्टर बुलाकर कराया जाता था इलाज
परिजनों का आरोप है कि न्यू रिलैक्स अस्पताल में नियमित योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं रहते थे। अस्पताल संचालक कथित तौर पर जरूरत के हिसाब से ठेके पर डॉक्टरों को बुलाकर मरीजों का इलाज कराते थे। आरोप यह भी है कि गौस और अब्दुल राशिद के पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं है, फिर भी वे इलाज से जुड़े फैसले लेते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल में कई बार बिना विशेषज्ञ की निगरानी के मरीजों को भर्ती किया जाता था। गंभीर मरीजों को भी प्राथमिक स्तर की सुविधाओं के भरोसे रखा जाता था, जिससे जोखिम बढ़ जाता था।
इलाज में देरी और हालत बिगड़ने का आरोप
परिवार का कहना है कि शिवानी की तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित उपचार या बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया गया। जब तक स्थिति गंभीर हुई, तब तक काफी देर हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मामले को छिपाने की भी कोशिश की।
इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से ऐसे संस्थानों की जांच की मांग की है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
मड़ियांव पुलिस ने परिजनों की तहरीर के आधार पर गौस और अब्दुल राशिद के खिलाफ लापरवाही और गैरकानूनी तरीके से इलाज करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अस्पताल के दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अस्पताल के पास वैध लाइसेंस था या नहीं और वहां कार्यरत स्टाफ की योग्यता क्या थी। यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
बिना मानक कैसे चल रहे निजी अस्पताल?
इस घटना के बाद लखनऊ के मड़ियांव और सीतापुर रोड क्षेत्र में संचालित छोटे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई ऐसे अस्पताल चल रहे हैं, जहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही योग्य डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस और बिना योग्य चिकित्सकों के अस्पताल चलाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ता नेटवर्क
मड़ियांव-सीतापुर रोड क्षेत्र को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यहां झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क सक्रिय है। कम खर्च और आसान इलाज के नाम पर मरीजों को आकर्षित किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में यही लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है और केवल पंजीकृत अस्पतालों में ही इलाज कराना चाहिए।
परिजनों में आक्रोश, न्याय की मांग
शिवानी कश्यप की मौत के बाद परिवार और रिश्तेदारों में गहरा आक्रोश है। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अस्पताल को बंद कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो शिवानी की जान बचाई जा सकती थी।

