उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने आशा बहुओं को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सदन में कहा कि राज्य सरकार आशा कार्यकर्ताओं के हितों के लिए लगातार काम कर रही है और उन्हें पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं।
ब्रजेश पाठक ने बताया कि आशा बहुओं को अब मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जा रही है और उनका मानदेय भी समाजवादी पार्टी सरकार के समय से दोगुना किया गया है। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।
सदन में बोलते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सरकार ने आशा बहुओं के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था लागू की है, ताकि उन्हें गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले आशा कार्यकर्ताओं को इस तरह की सुविधाएं नहीं मिलती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने उनके हितों को प्राथमिकता देते हुए कई फैसले लिए हैं।
मानदेय बढ़ाने का दावा
डिप्टी सीएम ने कहा कि आशा बहुओं का मानदेय समाजवादी पार्टी सरकार के समय की तुलना में दोगुना किया गया है। उन्होंने सदन में कहा, “हमारी सरकार आशा बहुअन का मातृत्व अवकाश भी दे रही है और सपा सरकार से दोगुना मानदेय भी दिया जा रहा है।”
सरकार का कहना है कि इससे आशा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
ब्रजेश पाठक के बयान पर विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई आशा कार्यकर्ताओं को समय पर भुगतान और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
विपक्षी नेताओं ने सदन में मांग की कि सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि यह सुनिश्चित करे कि सभी आशा कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय और घोषित सुविधाओं का लाभ मिले।
इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस भी हुई।
स्वास्थ्य व्यवस्था में आशा बहुओं की भूमिका
ग्रामीण स्वास्थ्य की अहम कड़ी
आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल, परिवार नियोजन और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी।
सरकार का कहना है कि आशा बहुओं के काम को देखते हुए उनकी सुविधाओं और मानदेय में लगातार सुधार किया जा रहा है।
बड़ी संख्या में कार्यरत हैं आशा बहुएं
उत्तर प्रदेश में लाखों की संख्या में आशा कार्यकर्ता तैनात हैं, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। उनके हितों से जुड़े फैसलों का असर सीधे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।
विधानसभा सत्र में स्वास्थ्य मुद्दों पर फोकस
विधानसभा सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों की व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने दावा किया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार बजट और संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
आशा बहुओं के लिए मातृत्व अवकाश और बढ़े हुए मानदेय का मुद्दा राज्य के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है कि वह जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए योजनाएं लागू कर रही है।
लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के बीच इस बयान को लेकर चर्चा हो रही है।
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