बिहार परिषद में राबड़ी ने नीतीश सरकार को घेरा

Digital Desk
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बिहार विधान परिषद के सत्र के दौरान राज्य की राजनीति गरमा गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने आंकड़ों के साथ नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास कार्यों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

पटना में चल रहे इस सत्र में विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है। राबड़ी देवी ने कहा कि राज्य की स्थिति कई मामलों में चिंताजनक है और सरकार वास्तविक आंकड़ों को सदन में स्पष्ट रूप से रखने से बच रही है।

राबड़ी देवी ने सदन में अपराध से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राज्य में आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों में सुरक्षा को लेकर डर का माहौल है और सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह सफल नहीं रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और संगठित अपराध जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

बेरोजगारी और पलायन पर सवाल

विपक्ष की ओर से बेरोजगारी और युवाओं के पलायन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राबड़ी देवी ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर न मिलने के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार से पूछा कि रोजगार सृजन के लिए अब तक कितनी नई योजनाएं लागू की गई हैं और उनका जमीनी असर क्या है।

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जेडीयू का जवाब: आरोपों को बताया भ्रामक

सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) की ओर से विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। जेडीयू नेताओं ने कहा कि विपक्ष द्वारा पेश किए गए आंकड़े अधूरे और भ्रामक हैं।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है और कई क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाया जा रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी का आरोप

जेडीयू ने यह भी कहा कि विपक्ष सदन को राजनीतिक मंच बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन तथ्यों के आधार पर ही बहस होनी चाहिए।

सदन में तीखी बहस, बढ़ा सियासी तापमान

राबड़ी देवी के बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए और अपनी-अपनी बात रखी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा और परिषद सत्र अक्सर सरकार और विपक्ष के लिए अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का बड़ा मंच होते हैं। आने वाले चुनावों को देखते हुए इस तरह की बहसों का महत्व और बढ़ जाता है।

उत्तर भारत की राजनीति पर नजर

बिहार की राजनीति का असर उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत की राजनीति पर देखा जाता है। रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दे क्षेत्र के अधिकांश राज्यों में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

यूपी के राजनीतिक विश्लेषक भी बिहार के सत्र की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि क्षेत्रीय राजनीतिक रुझान अक्सर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

विधान परिषद का सत्र अभी जारी है और आने वाले दिनों में अन्य जनहित के मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति जारी रखेगा, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का पक्ष रखती रहेगी।

जनता की नजर अब इस बात पर है कि सदन में उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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