
बिहार विधान परिषद् चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अगले महीने होने वाले चुनाव में 10 सीटों पर मुकाबला होना है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों में जातीय समीकरण साधने की कवायद भी तेज हो गई है। किस दल से कौन उम्मीदवार मैदान में उतरेगा, इसे लेकर लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव को लेकर हो रही है कि क्या उन्हें एक बार फिर ‘माननीय’ बनने का मौका मिलेगा या नहीं।दरअसल बिहार विधान परिषद् की नौ सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है, जबकि एक सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कारण खाली हुई है। ऐसे में कुल 10 सीटों पर चुनाव होना तय है। इनमें महागठबंधन की ओर से राजद को केवल एक सीट मिलने की संभावना है, जबकि बाकी नौ सीटों पर एनडीए अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाने वाले दीपक प्रकाश का विधान परिषद् जाना लगभग तय माना जा रहा है। इन दोनों नामों के सामने आने के बाद अब एनडीए के पास बची सीटों पर जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती खड़ी हो गई है।वहीं सबसे दिलचस्प मामला तेज प्रताप यादव को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चाहते हैं कि तेज प्रताप को विधान परिषद् भेजा जाए, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस मुद्दे पर पार्टी के व्यापक राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हाल ही में नोएडा में परिवार के एक कार्यक्रम में तेज प्रताप की लालू परिवार के साथ मौजूदगी ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।राजद के सामने चुनौती सिर्फ तेज प्रताप को एडजस्ट करने की नहीं है, बल्कि सहयोगी दलों और जातीय समीकरणों को भी साधना है। बताया जा रहा है कि एआईएमआईएम भी विधान परिषद् में हिस्सेदारी चाहती है। पिछली बार राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने महागठबंधन को समर्थन दिया था और अब वह बदले में परिषद् सीट की उम्मीद लगाए बैठी है। दूसरी ओर, राजद नेता सुनील कुमार सिंह भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे राजपूत समाज से आते हैं और लालू परिवार के बेहद करीबी बताए जाते हैं।उधर एनडीए में भी उम्मीदवारों के नाम को लेकर गहमागहमी तेज है। जनता दल यूनाइटेड की ओर से कुर्मी समाज से निशांत कुमार, कोईरी समाज से राजीव कुमार सिंह, अति पिछड़ा वर्ग से ललन मंडल और अल्पसंख्यक चेहरे के तौर पर गुलाम रसूल बलियावी के नामों की चर्चा जोरों पर है।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से संजय मयूख, अमृता भूषण, प्रेम रंजन पटेल, सिद्धार्थ शंभू और अमरनाथ गामी जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं दीपक प्रकाश को भी भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संभावित उम्मीदवारों की सूची आलाकमान को भेज दी गई है और अंतिम फैसला जल्द हो सकता है।इस बीच सहयोगी दल भी अपने-अपने नेताओं को विधान परिषद् भेजने की तैयारी में हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान अपने भतीजे सीमांत मृणाल को एमएलसी बनाना चाहते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर अभी कुछ नहीं कहा गया है। वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी भी अपनी पार्टी से प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं।निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बिहार विधान परिषद् चुनाव के लिए एक जून को अधिसूचना जारी होगी। आठ जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, नौ जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान और मतगणना 18 जून को ही संपन्न होगी।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि तेजस्वी यादव आखिर किसे मौका देते हैं और क्या तेज प्रताप यादव एक बार फिर बिहार की राजनीति में ‘माननीय’ बनकर वापसी करेंगे या फिर जातीय और राजनीतिक समीकरणों में उनका पत्ता कट जाएगा।
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