सुपर-8 में हार के बाद भारत पर NRR का दबाव

Digital Desk
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Cricket ball resting on a cricket bat on green grass of cricket pitch

आईसीसी टूर्नामेंट के सुपर-8 चरण में टीम इंडिया की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत रही। पहले ही मुकाबले में मिली हार ने भारत के सेमीफाइनल के समीकरण को जटिल बना दिया है। अब सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़ी जीत की जरूरत भी अहम हो गई है।

इस हार के बाद अंक तालिका में भारत की स्थिति दबाव में आ गई है। सुपर-8 जैसे छोटे चरण में हर मैच का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में एक हार सीधे नेट रन रेट (NRR) पर असर डालती है, जो आगे चलकर सेमीफाइनल की टिकट तय कर सकती है।

नेट रन रेट यानी एनआरआर किसी टीम द्वारा बनाए गए औसत रन और दिए गए औसत रन के अंतर को दर्शाता है। अगर टीम बड़े अंतर से जीतती है तो उसका एनआरआर सुधरता है, लेकिन करीबी हार या बड़ी हार एनआरआर को नुकसान पहुंचाती है।

भारत की पहली हार के बाद उसका एनआरआर प्रतिद्वंद्वी टीमों की तुलना में कमजोर हो गया है। सुपर-8 में जब चार टीमें आमने-सामने होती हैं और सिर्फ दो को सेमीफाइनल में जगह मिलती है, तब एनआरआर निर्णायक भूमिका निभाता है।

अंक तालिका का मौजूदा हाल

सुपर-8 के इस ग्रुप में भारत के साथ मजबूत टीमें शामिल हैं। अंक बराबर होने की स्थिति में फैसला नेट रन रेट से होगा। यही वजह है कि अब भारत को आने वाले मैचों में सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी होगी।

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सेमीफाइनल के लिए क्या है पूरा समीकरण?

अब भारत के सामने साफ समीकरण है—बाकी बचे दोनों मैच जीतने होंगे। यदि भारत दोनों मैच जीतता है तो उसके 4 अंक हो जाएंगे। लेकिन अगर अन्य टीमों के भी 4 अंक होते हैं, तो एनआरआर की तुलना की जाएगी।

अगर भारत एक मैच हारता है, तो स्थिति और कठिन हो सकती है। उस स्थिति में दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लेबाजों को तेजी से रन बनाना होगा और गेंदबाजों को विपक्षी टीम को कम स्कोर पर रोकना होगा। पावरप्ले और डेथ ओवर्स में प्रदर्शन निर्णायक साबित हो सकता है।

किन पहलुओं पर करना होगा सुधार?

टीम संयोजन, मध्यक्रम की स्थिरता और गेंदबाजी में विविधता पर ध्यान देना जरूरी है। बड़े टूर्नामेंट में दबाव से निपटना भी अहम होता है। कप्तान और कोचिंग स्टाफ को रणनीति में बदलाव कर आक्रामक रुख अपनाना पड़ सकता है।

फील्डिंग में छोटी गलतियां भी मैच का रुख बदल सकती हैं। सुपर-8 जैसे चरण में हर रन की कीमत होती है, क्योंकि वही रन आगे जाकर एनआरआर तय करते हैं।

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और अभी भारत के पास मौका पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर टीम अगले मुकाबलों में दमदार प्रदर्शन करती है, तो सेमीफाइनल की राह अब भी खुली है।

हालांकि अब हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है। फैंस की नजरें टीम इंडिया के अगले मैच पर टिकी हैं, जहां जीत के साथ-साथ नेट रन रेट सुधारना भी बड़ी चुनौती होगी।

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