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लखनऊ उत्तर प्रदेश के औषधि विभाग ने दवा माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और अवैध गोदाम का भंडाफोड़ किया है। विभाग की विशेष टीम ने फव्वारा स्थित झूलेलाल बाजार में ‘ज्योति ड्रग हाउस’ की तीसरी मंजिल पर छापा मारकर भारी मात्रा में सरकारी अस्पतालों की दवाएं जब्त की हैं। इस खुफिया गोदाम से सेना (सैन्य अस्पताल), ईएसआई (ESI) और केंद्र व राज्य सरकार के अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाओं के साथ-साथ डॉक्टरों को दिए जाने वाले कीमती फिजिशियन सैंपल्स बरामद हुए हैं। जब्त की गई दवाओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह अवैध गोदाम भी ‘ज्योति ड्रग हाउस’ के मुख्य संचालक नारायण दास हंसराजानी का ही है। इससे पहले 22 मई को इसी इमारत में नारायण दास के एक अन्य अवैध गोदाम से डेढ़ करोड़ रुपये की दवाएं पकड़ी गई थीं। औषधि विभाग ने अब तक की कार्रवाई में इस रैकेट से कुल ढाई करोड़ रुपये की अवैध दवाएं जब्त कर ली हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने मुख्य फर्म ‘ज्योति ड्रग हाउस’ समेत दोनों अवैध गोदामों को पूरी तरह से सील कर दिया है।
लखनऊ के सहायक आयुक्त (औषधि) बृजेश यादव ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पहला गोदाम नारायण दास ने अपने कर्मचारी किशोर मेहता के नाम पर किराए पर लिया था। उसी मंजिल पर स्थित दूसरे गोदाम पर ताला लटका हुआ था, जिसे नारायण दास का दूसरा कर्मचारी पुनीत कटारा संभालता था। दोनों आरोपियों के फरार होने के बाद, टीम ने भवन मालकिन मोहिनी हीरानी को मौके पर बुलाया और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में गोदाम का ताला तोड़ा गया।गोदाम के भीतर का नजारादेखकर अधिकारी भी दंग रह गए। वहां जीवनरक्षक इंसुलिन इंजेक्शन, एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) और बेहद महंगे एंटीबायोटिक्स समेत कई गंभीर बीमारियों की दवाओं का अवैध स्टॉक भरा हुआ था। विभाग ने इन दवाओं को 37 बड़े बोरों में भरकर सीज कर दिया है और गुणवत्ता की जांच के लिए 10 संदिग्ध नमूने सरकारी लैब भेजे हैं। अधिकारियों को अंदेशा है कि इमारत की पहली मंजिल पर स्थित मुख्य दुकान में भी ऐसी ही अवैध दवाएं छिपाई गई हैं, जिसके चलते पूरी फर्म की जांच होने तक उसे भी बंद करा दिया गया है।इस महाघोटाले के तार सरकारी तंत्र से जुड़े होने की आशंका है। औषधि विभाग की टीम ने बरामद हुई सैन्य और ईएसआई अस्पतालों की दवाओं की पूरी सूची तैयार कर ली है। यह विस्तृत रिपोर्ट संबंधित जिलों के औषधि विभागों के साथ-साथ सीधे शासन को भेजी जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी सप्लाई की ये दवाएं अस्पतालों से लीक होकर इस निजी माफिया तक कैसे पहुंचीं। शासन स्तर पर इस रैकेट के पीछे शामिल बड़े चेहरों को बेनकाब करने के लिए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
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