

पूर्वांचल का ऐतिहासिक जिला जौनपुर इस समय एक बेहद खौफनाक और जानलेवा मुसीबत की गिरफ्त में आकर कैंसर का ‘रेड जोन’ बन चुका है। यहां के युवाओं और बुजुर्गों की रगों में एक ऐसा देशी नशा जहर घोल रहा है, जो हंसते-खेलते परिवारों को पल भर में उजाड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों और दावों को धत्ता बताते हुए जिले में पिछले महज तीन महीनों के भीतर मुंह के कैंसर के 284 संदिग्ध मरीज सामने आने से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी मरीजों में मुंह के कैंसर के बेहद गंभीर और एडवांस स्टेज के लक्षण मिले हैं। इस सामूहिक तबाही के पीछे कोई और नहीं, बल्कि जौनपुर का सबसे बदनाम और पसंदीदा देशी नशा ‘दोहरा’ है। सड़ी-गली और केमिकल युक्त खराब सुपारी, कत्था, तंबाकू और चूने के जानलेवा मिश्रण से तैयार होने वाला यह नशा जौनपुर में मौत का दूसरा नाम बन चुका है। शासन द्वारा इसके निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगाए जाने के बावजूद, यह प्रतिबन्धित नशा आज भी हर गली-मोहल्ले में धड़ल्ले से बिक रहा है और लोगों को मौत के मुंह में धकेल रहा है। इस जानलेवा लत की खौफनाक और रूह कंपा देने वाली हकीकत को शहर के रुहट्टा मोहल्ले के 50 वर्षीय प्रेमचंद मौर्य की सिसकती जिंदगी से साफ समझा जा सकता है। करीब 6 साल पहले मुंह के कैंसर का शिकार हुए प्रेमचंद आज बिस्तर पर अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं। उनका दो बार बड़ा ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन कैंसर का संक्रमण अब उनके पूरे गले तक फैल चुका है। ठोस निवाला निगलना तो दूर, आज वे सिर्फ पतले तरल पदार्थों के भरोसे अपनी जिंदगी काट रहे हैं। प्रेमचंद रोते हुए पुरानी बातों को याद करते हैं कि कैसे एक बार उन्होंने अपने छोटे भाई से बहस करते हुए अहंकार में कह दिया था कि ‘मर जाऊंगा पर दोहरा नहीं छोड़ूंगा’। आज भाई की उस चेतावनी को न मानने का पछतावा और दर्द उन्हें तिल-तिल मार रहा है। ऐसी ही एक और दिल दहला देने वाली दास्तान रासमंडल के फैसल हसन की है, जो साल 2023 से इस नामी बीमारी से जंग लड़ रहे हैं। फैसल कहते हैं कि ‘दोहरा’ ने उनकी जिंदगी के हंसते-खेलते सफर पर मौत का बैरियर गिरा दिया है। उनके मुताबिक, इस बीमारी के शारीरिक दर्द से कहीं ज्यादा तकलीफ उन्हें अपने मासूम बच्चों, पत्नी और भाई के चेहरों पर चौबीसों घंटे रहने वाला मौत का खौफ देती है। पूरा परिवार हर पल इस डर में जीता है कि न जाने कब कोई अनहोनी हो जाए। दोहरा खाने की चंद मिनटों की लत की इतनी भयानक और दर्दनाक सजा आज उनका पूरा बेकसूर परिवार भुगतने को मजबूर है। जौनपुर में महामारी की तरह पैर पसार रहा यह देशी नशा अब एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य इमरजेंसी बन चुका है, जिसे अगर वक्त रहते नहीं रोका गया, तो यह ‘रेड जोन’ न जाने कितनी और जिंदगियां निगल जाएगा।
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