देहरादून उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अपने सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी चरण में प्रवेश कर चुकी है। पहाड़ों को चीरकर तैयार की गई 16 विशाल रेल सुरंगों में अब डिजिटल केबलिंग का काम तेज़ी से शुरू हो गया है। बिजली, हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, आधुनिक सिग्नलिंग, सीसीटीवी निगरानी और अत्याधुनिक संचार प्रणाली से लैस यह रेल लाइन न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश की सबसे आधुनिक रेलवे परियोजनाओं में शामिल होने जा रही है।करीब 125 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन का लगभग 119 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर से होकर गुजरेगा। यही वजह है कि इस परियोजना को इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना माना जा रहा है। परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा हो चुका है और अब तकनीकी ढांचे को अंतिम रूप देने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
अब सुरंगों में दौड़ेगा डिजिटल नेटवर्क
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने सुरंगों के भीतर बिजली, संचार और डिजिटल नेटवर्क स्थापित करने का कार्य दो विशेषज्ञ कंपनियों को सौंपा है। इन सुरंगों में अब बिजली की लाइनें, हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक केबल, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, आपातकालीन संचार नेटवर्क और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।परियोजना पूरी होने के बाद पूरी रेल लाइन एक स्मार्ट डिजिटल नेटवर्क पर संचालित होगी, जहां ट्रेनों की हर गतिविधि पर कंट्रोल रूम से लगातार नजर रखी जाएगी।
देश की सबसे लंबी रेल सुरंग भी इसी परियोजना का हिस्सा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है 14.58 किलोमीटर लंबी देवप्रयाग-जनासू रेल सुरंग, जो देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंगों में शामिल है। इसके अलावा पूरी परियोजना में कुल 16 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनके भीतर आधुनिक तकनीक का पूरा नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है।पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इंजीनियरों ने सुरंगों के भीतर अलग-अलग उपयोगिताओं के लिए अलग-अलग डक्ट तैयार किए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या आने पर बाकी सेवाएं प्रभावित न हों।
हर सुविधा के लिए अलग डिजिटल रास्ता
सुरंगों की कंक्रीट लाइनिंग के भीतर बिजली, फाइबर ऑप्टिक, संचार और सिग्नलिंग केबलों के लिए अलग-अलग चेंबर बनाए गए हैं।रेल ट्रैक के दोनों ओर मजबूत कंक्रीट केबल ट्रफ तैयार किए गए हैं, जबकि दीवारों पर जंगरोधी स्टील केबल ट्रे लगाई जा रही हैं। इससे सभी केबल पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी और किसी एक सिस्टम में खराबी आने पर दूसरी सेवाओं पर उसका कोई असर नहीं पड़ेगा।यह व्यवस्था भविष्य में रखरखाव और मरम्मत के कार्य को भी बेहद आसान बनाएगी।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से होगी हर पल निगरानी
पूरी रेल परियोजना में हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बिछाया जा रहा है, जो इस रेल लाइन का डिजिटल बैकबोन होगा।
इसी नेटवर्क के जरिए—
- ट्रेन संचालन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।
- सीसीटीवी कैमरों से हर सुरंग पर नजर रखी जाएगी।
- आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम ट्रेनों की गति और संचालन को नियंत्रित करेगा।
- आपातकालीन स्थिति में तुरंत संचार स्थापित किया जा सकेगा।
- कंट्रोल सेंटर से पूरे रूट की लाइव निगरानी होगी।
- भविष्य में हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क और अन्य स्मार्ट रेल सेवाएं भी इसी नेटवर्क के जरिए संचालित होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रेल संचालन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, तेज़ और भरोसेमंद होगा।
अत्याधुनिक मशीनों से बिछ रही हैं केबलें
करीब 119 किलोमीटर लंबी सुरंगों में केबल बिछाने का काम सामान्य तरीके से संभव नहीं था। इसलिए इसके लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।इस कार्य में केबल ड्रम, मोटराइज्ड विंच, केबल पुशर और रोलर सिस्टम जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इनकी मदद से भारी-भरकम केबलों को सुरंग के एक छोर से दूसरे छोर तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा रहा है।इसके बाद इन्हें स्थायी रूप से केबल ट्रे और कंक्रीट ट्रफ में स्थापित किया जा रहा है, जिससे वर्षों तक नेटवर्क सुरक्षित बना रहेगा।
आग और नमी भी नहीं बिगाड़ पाएगी नेटवर्क
हिमालयी क्षेत्र की नमी और कठिन मौसम को ध्यान में रखते हुए परियोजना में विशेष प्रकार की आर्मर्ड, वाटरप्रूफ और फ्लेम-रिटार्डेंट लो-स्मोक (FRLS) केबलों का उपयोग किया जा रहा है।
इन केबलों की खासियत यह है कि—
- आग लगने पर बेहद कम धुआं छोड़ती हैं।
- नमी और पानी से प्रभावित नहीं होतीं।
- लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं।
- कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
- आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
यही वजह है कि इस परियोजना में सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
चारधाम यात्रा को मिलेगा नया आयाम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल एक रेलवे लाइन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास की नई जीवनरेखा मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद चारधाम यात्रा, पर्यटन, व्यापार, स्थानीय रोजगार और सेना की रणनीतिक आवाजाही को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।पहाड़ों में सफर तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड के विकास की नई पटरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली साबित होगी। अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक, विश्वस्तरीय सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक रेल संचालन के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन भविष्य की भारतीय रेलवे का मॉडल बन सकती है।125 किलोमीटर लंबी यह परियोजना अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। सुरंगों में शुरू हुई डिजिटल केबलिंग इस बात का संकेत है कि वह दिन दूर नहीं, जब हिमालय की वादियों में हाईटेक ट्रेनें दौड़ेंगी और उत्तराखंड देश के सबसे आधुनिक रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
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