सीने में उठा दर्द और थम गई आवाज: पेप्सी शर्मा के निधन से शोक में डूबे प्रशंसक

Editorial
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हरियाणा हरियाणवी लोक संस्कृति और रागिनी जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी दमदार आवाज, मंचीय प्रस्तुति और देसी अंदाज से लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले लोकप्रिय लोक कलाकार पेप्सी शर्मा का निधन हो गया है। उनके अचानक दुनिया को अलविदा कह देने की खबर से हरियाणवी मनोरंजन जगत, लोक कला प्रेमियों और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जैसे ही उनके निधन की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया और उनके चाहने वालों ने गहरा दुख व्यक्त किया।  पेप्सी शर्मा उन चुनिंदा लोक कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर गांव की चौपालों से लेकर बड़े-बड़े मंचों तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनका नाम हरियाणवी रागिनी और लोक गायन की दुनिया में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता था। वे अपनी सशक्त प्रस्तुति, हास्य से भरपूर अंदाज और दर्शकों से सीधे जुड़ने की कला के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में लोग जुटते थे और देर रात तक उनके गीतों और रागिनियों का आनंद लेते थे। बताया जाता है कि पेप्सी शर्मा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के निवाड़ी क्षेत्र स्थित पतला गांव के निवासी थे। साधारण परिवार से आने वाले इस कलाकार ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर लोक कला के क्षेत्र में एक खास मुकाम हासिल किया था। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े पेप्सी शर्मा ने अपनी कला में गांव की संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मुद्दों को हमेशा प्रमुखता दी। यही वजह थी कि उनकी प्रस्तुतियां लोगों के दिलों को सीधे छू जाती थीं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और आसपास के कई राज्यों में पेप्सी शर्मा के कार्यक्रमों की जबरदस्त मांग रहती थी। चाहे कोई बड़ा मेला हो, सांस्कृतिक आयोजन हो या फिर रागिनी दंगल, उनकी मौजूदगी कार्यक्रम की रौनक बढ़ा देती थी। मंच पर आते ही उनकी आवाज और अंदाज दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता था। लोक संस्कृति से जुड़े लोग उन्हें केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं और विरासत का प्रतिनिधि मानते थे।

 

हरियाणवी मनोरंजन जगत में उनका योगदान केवल गायन तक सीमित नहीं था। उन्होंने लोक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे समय में जब आधुनिक मनोरंजन के अनेक साधन तेजी से बढ़ रहे हैं, पेप्सी शर्मा जैसे कलाकारों ने लोक संस्कृति को जीवित रखने का काम किया। उनकी रागिनियों में समाज, संस्कृति, रिश्तों और ग्रामीण जीवन की झलक साफ दिखाई देती थी। यही कारण था कि उनकी लोकप्रियता केवल गांवों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरों में भी उनके लाखों प्रशंसक थे। पेप्सी शर्मा का नाम उस समय और अधिक चर्चाओं में आया था जब उनका मुकाबला हरियाणा की मशहूर डांसर और गायिका Sapna Choudhary के साथ रागिनी मंच पर हुआ था। साल 2017 में दोनों कलाकारों के बीच हुए रागिनी कॉम्पिटिशन ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था। यह कार्यक्रम बाद में यूट्यूब पर भी काफी लोकप्रिय हुआ और लाखों लोगों ने उसे देखा। उस मंचीय मुकाबले ने पेप्सी शर्मा की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। दर्शकों ने उनके आत्मविश्वास, गायन शैली और मंच संचालन की खूब सराहना की थी।

 

उनके निधन की खबर सामने आने के बाद हरियाणवी इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों, आयोजकों और प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर लोग उनके साथ बिताए पलों को याद कर रहे हैं और उनकी प्रस्तुतियों के वीडियो साझा कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई कलाकारों ने कहा कि पेप्सी शर्मा का जाना लोक कला जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आसानी से संभव नहीं है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लोक संस्कृति और रागिनी परंपरा को समर्पित कर दी थी। पेप्सी शर्मा केवल एक कलाकार नहीं थे, बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए नाम थे। उन्होंने अपने गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को हंसाया, सोचने पर मजबूर किया और अपनी संस्कृति से जोड़े रखा। उनकी आवाज अब मंचों पर सुनाई नहीं देगी, लेकिन उनकी रागिनियां और उनकी यादें हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहेंगी। उनके निधन के साथ हरियाणवी लोक कला जगत का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानो समाप्त हो गया है। एक ऐसा कलाकार, जिसने अपनी कला के दम पर पहचान बनाई, जिसने गांवों की मिट्टी की खुशबू को मंचों तक पहुंचाया और जिसने लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया, आज इस दुनिया में नहीं है। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। हरियाणवी लोक संगीत और रागिनी की दुनिया उन्हें हमेशा याद रखेगी और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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