
नोएडा यह सिर्फ एक हवाई जहाज की उड़ान नहीं थी, बल्कि उन किसानों के सपनों की उड़ान थी, जिन्होंने कभी अपनी पुश्तैनी जमीन देश के विकास के लिए सौंप दी थी। सोमवार की सुबह जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे से पहली पैसेंजर फ्लाइट लखनऊ के लिए रवाना हुई, तो उसमें बैठे 170 किसान और कामगार सिर्फ यात्री नहीं थे, बल्कि उस ऐतिहासिक परियोजना के असली नायक थे, जिसकी नींव उनकी जमीन और त्याग पर रखी गई थी। सुबह का वक्त था। एयरपोर्ट परिसर उत्साह, गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था। जिन खेतों में कभी गेहूं और सरसों की फसलें लहलहाती थीं, आज वहीं से विमान आसमान की ओर उड़ान भर रहे थे। यह नजारा देखकर कई किसानों की आंखें नम हो गईं। किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस जमीन पर वे कभी हल चलाते थे, उसी जमीन पर बने एयरपोर्ट से एक दिन वे खुद हवाई जहाज में बैठकर सफर करेंगे। सुबह 8:05 बजे लखनऊ से पहली फ्लाइट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर उतरी। इसके कुछ ही मिनट बाद सुबह 8:30 बजे एयरपोर्ट से पहली पैसेंजर फ्लाइट लखनऊ के लिए रवाना हुई। इस विमान में जेवर क्षेत्र के वे किसान और श्रमिक शामिल थे, जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी। इस ऐतिहासिक यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। फ्लाइट में सवार अबरार खान की खुशी देखते ही बन रही थी। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें पहली उड़ान का हिस्सा बनने का निमंत्रण मिला था और यह उनके जीवन का सबसे सम्मानजनक अवसर है। उनका कहना था कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि जिस जमीन के बदले उन्होंने अपना भविष्य देश के विकास से जोड़ा, उसी जमीन से वह पहली उड़ान भरेंगे। जेवर के पास के गांव की रहने वाली हेरा रशीद ने इस मौके को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक हवाई यात्रा नहीं, बल्कि गांव और ग्रामीणों के सम्मान का दिन है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह यात्रा पूरी तरह निशुल्क कराई जा रही है और लखनऊ पहुंचकर सभी लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे। उनके चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।

करीब 65 वर्षीय एक किसान ने भावुक होते हुए बताया कि उन्होंने एयरपोर्ट के लिए अपनी 30 बीघा जमीन दी थी। शुरुआत में उन्हें चिंता थी कि आने वाले समय में क्या होगा, लेकिन आज जब वह इतने बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट को खड़ा देख रहे हैं, तो उन्हें अपने फैसले पर गर्व है। उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चे और आने वाली पीढ़ियां इस बदलाव की गवाह बनेंगी। जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस मौके को किसानों के सम्मान का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक हवाई सेवा की शुरुआत नहीं है, बल्कि उन परिवारों के त्याग का सम्मान है, जिन्होंने देश और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन दी। उन्होंने कहा कि जिन हाथों ने कभी खेतों में पसीना बहाया था, आज उन्हीं हाथों में बोर्डिंग पास है और वे आसमान की ऊंचाइयों को छू रहे हैं। यह दृश्य पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी इस अवसर को बेहद भावुक बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई 10 साल पहले जेवर गांव में इस तरह के विश्वस्तरीय एयरपोर्ट की कल्पना करता, तो शायद लोग उस पर विश्वास नहीं करते। लेकिन आज यह सपना साकार हो चुका है। उन्होंने सबसे पहले उन किसानों को बधाई दी, जिन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अपनी जमीन देकर विकास की नई कहानी लिखी। करीब 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित किया गया है। शुरुआती चरण में यहां से देश के 45 शहरों के लिए लगभग 65 व्यावसायिक उड़ानें संचालित की जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इस परियोजना का शिलान्यास किया था और अब यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है।सोमवार की यह सुबह इसलिए भी खास रही क्योंकि इसने विकास की उस कहानी को जीवंत कर दिया, जिसमें किसान केवल जमीन देने वाले नहीं, बल्कि बदलाव के साझेदार बने। खेतों से उड़ान तक का यह सफर सिर्फ जेवर के किसानों का नहीं, बल्कि नए भारत के बदलते सपनों और उन्हें साकार करने की इच्छाशक्ति का प्रतीक बन गया है।
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