
पश्चिम एशिया में शांति की नई कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव की आहट तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती शांति समझौते पर इस्राइल ने ऐसा रुख अपनाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस्राइल ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वह किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जो उसकी सुरक्षा नीतियों और सैन्य कार्रवाई की आजादी को सीमित करे। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में तैयार हुए इस समझौते के बाद भी पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की राह आसान नजर नहीं आ रही। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो भी समझौता हुआ है, वह इस्राइल पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्राइल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में वह किसी बाहरी दबाव या समझौते से संचालित नहीं होगा। उनके इस बयान को सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि इस्राइल की भविष्य की रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए एक प्रारंभिक समझौते की घोषणा की गई है। इसे वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा था। लेकिन इस्राइल की प्रतिक्रिया ने इस उम्मीद पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वाकई पश्चिम एशिया में शांति कायम हो पाएगी। बेन-गवीर ने खास तौर पर लेबनान और ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला को लेकर अपनी सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि इस्राइल किसी भी ऐसी व्यवस्था को नहीं मानेगा, जिससे हिजबुल्ला के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगे। उनके मुताबिक, हिजबुल्ला का पूरी तरह निष्क्रिय होना ही इस्राइल की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने साफ कहा कि इस्राइली सेना जिन इलाकों में सुरक्षा कारणों से मौजूद है, वहां से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तरी सीमा पर पहले जैसी स्थिति दोबारा बनने नहीं दी जाएगी, जहां हिजबुल्ला के लड़ाके इस्राइली बस्तियों के करीब सक्रिय रहते थे। उनके शब्दों में, “सुरक्षा के मामले में इस्राइल कोई जोखिम नहीं उठाएगा और जरूरत पड़ने पर हर संभव सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।” बयान का सबसे सख्त हिस्सा वह था, जब बेन-गवीर ने लेबनान की ओर से होने वाले किसी भी ड्रोन, यूएवी या मिसाइल हमले पर खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर इस्राइल पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब तुरंत और पहले से कहीं ज्यादा ताकत के साथ दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में इस्राइल ने जो प्रतिरोधक क्षमता विकसित की है, उसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। इस्राइली मंत्री ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों की सराहना करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले केवल इस्राइल की सरकार और उसके नागरिकों के हितों के आधार पर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने की कीमत इस्राइल को कई बार चुकानी पड़ी है और अब वह ऐसी कोई गलती दोहराना नहीं चाहता।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बावजूद इस्राइल का यह रुख पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। अगर लेबनान और हिजबुल्ला से जुड़े मुद्दों पर इस्राइल अपनी स्वतंत्र सैन्य नीति जारी रखता है, तो क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म होना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका इस्राइल को अपने साथ लेकर आगे बढ़ पाएगा या फिर पश्चिम एशिया एक बार फिर टकराव और अनिश्चितता के नए दौर में प्रवेश करेगा।
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