
लखनऊ राजधानी लखनऊ में मेट्रो का दायरा अब शहर की सीमाओं से निकलकर आसपास के जिलों तक पहुंचने की तैयारी में है। आने वाले वर्षों में लखनऊ मेट्रो का ऐसा मेगा विस्तार देखने को मिलेगा, जो न सिर्फ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को नई दिशा देगा बल्कि लाखों लोगों की यात्रा को भी आसान बनाएगा। सरकार ने मेट्रो विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत 10 नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इस पूरी परियोजना पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इस विस्तार योजना के तहत लखनऊ मेट्रो को अब शहर के बाहरी इलाकों के साथ-साथ आसपास के महत्वपूर्ण शहरों से भी जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार, पीजीआई से बाराबंकी तक मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी है। इसके अलावा मोहनलालगंज, बख्शी का तालाब, उन्नाव, संडीला और इटौंजा जैसे क्षेत्रों को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने का खाका तैयार किया गया है। इससे राजधानी और आसपास के जिलों के बीच आवागमन पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा। मेट्रो विस्तार की इस योजना का सबसे बड़ा फायदा रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को मिलेगा। अनुमान है कि करीब 35 से 40 लाख लोग सीधे तौर पर इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और दूसरे जिलों से लखनऊ आने वाले यात्रियों को अब जाम में घंटों फंसने से राहत मिल सकेगी। योजना के तहत एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया तक संचालित मौजूदा मेट्रो लाइन को आगे बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसके साथ ही शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए कई नए रूट विकसित किए जाएंगे। इससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और अधिक मजबूत होगी तथा निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।मेट्रो विस्तार को चरणबद्ध तरीके से अगले 10 वर्षों में पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां आबादी तेजी से बढ़ रही है और जहां से बड़ी संख्या में लोग रोजाना शहर के केंद्र की ओर आते हैं। इसके बाद अन्य प्रस्तावित कॉरिडोर पर काम शुरू होगा।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नए मेट्रो स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। स्टेशनों पर बड़े पार्किंग क्षेत्र विकसित किए जाएंगे ताकि लोग आसानी से अपनी गाड़ियां पार्क कर मेट्रो से यात्रा कर सकें। इसके अलावा यात्रियों के लिए ई-बाइक और ई-साइकिल की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे स्टेशन से घर या कार्यालय तक की दूरी आसानी से तय की जा सके।मेट्रो विस्तार के दूसरे चरण को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि जुलाई महीने से दूसरे चरण के निर्माण कार्य की शुरुआत हो सकती है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने और विभिन्न विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे राजधानी के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। जिन क्षेत्रों तक मेट्रो पहुंचेगी वहां रियल एस्टेट, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगा।लखनऊ मेट्रो का यह मेगा विस्तार राजधानी के विकास की नई कहानी लिखने जा रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो आने वाले वर्षों में लखनऊ उत्तर भारत के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा, जहां मेट्रो नेटवर्क न सिर्फ शहर बल्कि आसपास के जिलों तक फैला होगा। इससे राजधानी की पहचान एक आधुनिक, स्मार्ट और बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहर के रूप में और मजबूत होगी।
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