
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित कर्णप्रयाग मंगलवार सुबह उस समय तनाव का केंद्र बन गया, जब हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। बाजार में शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई और हालात बेकाबू हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जबकि प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय हेमकुंड साहिब से लौट रहे सिख समुदाय के कुछ श्रद्धालु कर्णप्रयाग बाजार से गुजर रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनकी स्थानीय लोगों से बहस हो गई। पहले तो लोगों ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी तेज हो गई और माहौल गर्माने लगा। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई और बाजार रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद धारदार हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। अचानक हुए इस हमले से बाजार में भगदड़ मच गई। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। मारपीट में कई स्थानीय लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में एक होटल स्वामी की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए हवाई मार्ग से बड़े अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। अन्य घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है और चिकित्सक उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। घटना की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने चौकी परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया और बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्रियों को घंटों तक रास्ते में फंसे रहना पड़ा। कुछ लोगों ने पंचपुलिया क्षेत्र में भी जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। हाईवे जाम होने से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गौचर में यात्रियों को रोक दिया, ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। इससे यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु फंस गए। कई यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और उन्हें अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस ने बाजार और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या नई घटना को रोका जा सके। प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता रहा। करीब एक घंटे तक चले जाम और प्रदर्शन के बाद स्थानीय लोगों तथा प्रशासन के बीच थाने में वार्ता हुई। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद लोगों ने जाम समाप्त कर दिया और धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। जाम खुलने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली, लेकिन इलाके में तनाव का माहौल अभी भी बना हुआ है।
प्रशासन का कहना है कि घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है। बाजार और आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोग कौन हैं। पुलिस ने कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कर्णप्रयाग जैसे शांत और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र में हुई इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु आस्था की यात्रा पर निकलते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज में चिंता बढ़ाती हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे, ताकि क्षेत्र में फिर से शांति और विश्वास का माहौल कायम हो सके। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन बाजार और आसपास के इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। सांसद गौतम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि यह वही परिसर है, जहां “वंदे मातरम” और “जय श्री राम” जैसे नारे पहले भी गूंज चुके हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
उन्होंने आगे कहा कि शहर में जो भी मुहर्रम जुलूस निकाले जाएंगे, वे पूरी तरह प्रशासन की निगरानी में होंगे और सभी नियमों का पालन कराया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी और सभी आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होंगे।हालांकि उनके बयान के शुरुआती हिस्से—विशेषकर मुहर्रम को लेकर “मैं नहीं जानता” और “पक्षी भी पूछकर उड़ता है”—ने विवाद को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इस बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे गैर-जिम्मेदाराना बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा मान रहे हैं।इस पूरे मामले ने अलीगढ़ की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहां एक तरफ प्रशासन शांति और सौहार्द बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सांसद के बयान ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। अब देखना होगा कि इस बयान पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है और क्या यह मामला और तूल पकड़ता है या नहीं।कुल मिलाकर यह बयान न सिर्फ चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
read on:https://news7hindi.com/in-prayagraj-a-blood-soaked-triple-murder-was-carried-out/
or advertisement visit our office:3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

