इंटरमिटेंट फास्टिंग: भूखे रहने से घटेगा वजन या बिगड़ जाएगी सेहत? जानिए पूरा सच

Editorial
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने और वजन कम करने की चाहत लगभग हर व्यक्ति की है। कोई घंटों जिम में पसीना बहा रहा है, तो कोई तरह-तरह की डाइट अपनाकर अपने शरीर को आकर्षक बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच एक नाम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है—इंटरमिटेंट फास्टिंग। सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस विशेषज्ञों तक, हर जगह इसकी चर्चा हो रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सचमुच कुछ घंटों तक भूखे रहने से वजन कम हो जाता है? या फिर यह सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है? इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई खास डाइट नहीं है, बल्कि यह खाने का एक तरीका है। इसमें यह तय किया जाता है कि आपको कब खाना है और कब नहीं खाना है। आसान शब्दों में समझें तो दिन के कुछ घंटे आप भोजन करते हैं और बाकी समय उपवास रखते हैं। सबसे लोकप्रिय तरीका 16:8 माना जाता है, जिसमें 16 घंटे तक कुछ नहीं खाया जाता और बाकी 8 घंटे के भीतर दिनभर का भोजन किया जाता है। इसके अलावा 14:10, 18:6 और सप्ताह में दो दिन कम कैलोरी लेने वाले तरीके भी काफी लोकप्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब शरीर को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो वह पहले शरीर में जमा ग्लूकोज का उपयोग करता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए जमा चर्बी को जलाना शुरू कर देता है। यही कारण है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग को वजन कम करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि नियंत्रित तरीके से की गई इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पूरे दिन भूखे रहें और फिर जो मन करे वह खा लें। अगर उपवास के बाद आप ज्यादा तला-भुना, मीठा या अधिक कैलोरी वाला भोजन करते हैं, तो इसका फायदा मिलने की बजाय नुकसान हो सकता है। इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के साथ संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना बेहद जरूरी माना जाता है। वजन कम करने के अलावा इंटरमिटेंट फास्टिंग के कई अन्य फायदे भी बताए जाते हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार इससे शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह शरीर की सूजन कम करने, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और पाचन तंत्र को आराम देने में भी सहायक मानी जाती है। कई लोग दावा करते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है। उनका कहना है कि इससे एकाग्रता बढ़ती है, शरीर हल्का महसूस होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि, इसके पीछे वैज्ञानिक शोध अभी भी जारी हैं और हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है।लेकिन हर चमकती चीज सोना नहीं होती। इंटरमिटेंट फास्टिंग के कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शुरुआत में कई लोगों को भूख ज्यादा लगना, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को चक्कर आना या काम में ध्यान न लगने की शिकायत भी रहती है। अगर कोई व्यक्ति पहले से मधुमेह, निम्न रक्तचाप, पेट से जुड़ी बीमारी या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है, तो उसके लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बढ़ते बच्चों के लिए भी यह तरीका हर बार उपयुक्त नहीं माना जाता।विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि वजन कम करने की जल्दबाजी में कई लोग अत्यधिक उपवास करने लगते हैं। वे घंटों तक कुछ नहीं खाते और शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसका असर शरीर की मांसपेशियों, हार्मोन और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ सकता है। कई बार वजन तो कम हो जाता है, लेकिन शरीर कमजोर होने लगता है और पोषण की कमी पैदा हो जाती है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। जो तरीका किसी एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे के लिए भी उतना ही लाभदायक हो। इसलिए इसे अपनाने से पहले अपनी दिनचर्या, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और खानपान की आदतों को ध्यान में रखना चाहिए।अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना चाहते हैं, तो शुरुआत धीरे-धीरे करें। पहले 12 घंटे का अंतर रखें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। उपवास के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें और खाने के समय हरी सब्जियां, फल, दालें, प्रोटीन और साबुत अनाज को अपनी थाली में शामिल करें। अत्यधिक मीठे और तले हुए भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है।याद रखिए इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई जादुई उपाय नहीं है। केवल भूखे रहने से वजन कम नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही भोजन करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवन के साथ ही इसका वास्तविक लाभ मिलता हैआज के समय में सोशल मीडिया पर फिटनेस के नाम पर कई तरह के दावे किए जाते हैं। लोग कुछ दिनों में वजन कम करने के सपने दिखाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा संतुलन की सलाह देते हैं। अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग सही तरीके से और विशेषज्ञ की सलाह के साथ अपनाई जाए, तो यह वजन घटाने और शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकती है। लेकिन अगर इसे बिना जानकारी, बिना योजना और केवल फैशन समझकर अपनाया जाए, तो इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं।इसलिए अगली बार जब कोई आपसे कहे कि “भूखे रहो और तेजी से वजन घटाओ”, तो सिर्फ इस दावे पर भरोसा मत कीजिए। अपने शरीर की जरूरतों को समझिए, सही जानकारी लीजिए और फिर सोच-समझकर फैसला कीजिए। क्योंकि असली फिटनेस सिर्फ पतला दिखने में नहीं, बल्कि स्वस्थ, ऊर्जावान और खुशहाल जीवन जीने में छिपी होती है।

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