खनन माफियाओं का खुला खेल! 20 बदमाशों ने अधिकारी को घेरा, धमकाकर छुड़ा ले गए जब्त जेसीबी और ट्रैक्टर

Editorial
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वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र से सामने आई घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिले में खनन माफियाओं का नेटवर्क कितना मजबूत हो चुका है। हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि अब अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे सरकारी अधिकारियों को भी खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं। ताजा मामला गोसाईपुर मोहांव का है, जहां अवैध मिट्टी खनन में जब्त की गई एक जेसीबी और दो ट्रैक्टरों को कथित तौर पर करीब 20 की संख्या में पहुंचे बदमाश जबरन छुड़ाकर ले गए। इतना ही नहीं, सरकारी अधिकारी और उनके साथ मौजूद कर्मचारी को जान से मारने तक की धमकी दी गई। जानकारी के अनुसार, खनन अधिकारी अनुज कुमार को सोमवार देर रात सूचना मिली थी कि चोलापुर थाना क्षेत्र के गोसाईपुर मोहांव इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी खनन किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वह होमगार्ड अशोक के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान वहां एक जेसीबी और दो ट्रैक्टर अवैध खनन कार्य में लगे मिले। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्होंने इन वाहनों को अपने कब्जे में लिया और उन्हें लेकर थाने की ओर रवाना हो गए। लेकिन रास्ते में जो हुआ, उसने पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बना दिया। आरोप है कि कुछ ही दूरी पर चार पहिया वाहनों और मोटरसाइकिलों से पहुंचे लगभग 20 लोगों ने सरकारी टीम को घेर लिया। अचानक हुई इस घेराबंदी से मौके पर तनाव का माहौल बन गया। आरोपियों ने न केवल गालीगलौज की, बल्कि सरकारी कार्रवाई रोकने का प्रयास करते हुए अधिकारियों को धमकियां भी दीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, बदमाशों का हौसला इतना बुलंद था कि उन्होंने जब्त किए गए वाहनों को मौके से छुड़ाकर ले जाने में भी कोई हिचक नहीं दिखाई।

घटना के बाद खनन अधिकारी अनुज कुमार ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, धमकी देने और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से संगठित तरीके से यह पूरी कार्रवाई की गई, उससे साफ संकेत मिलता है कि अवैध खनन में शामिल लोगों को कानून का कोई डर नहीं रह गया है। यह घटना इसलिए भी अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि पिछले तीन महीनों में खनन विभाग के अधिकारियों पर यह दूसरा बड़ा हमला बताया जा रहा है। इससे पहले भी खनन रोकने पहुंचे अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रैक्टर तथा जेसीबी से कुचलने का प्रयास किए जाने की शिकायत सामने आई थी। उस मामले में भी मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन आरोपियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उनके हौसले और बढ़ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि चोलापुर क्षेत्र के कई गांवों में रात के अंधेरे में लगातार अवैध खनन किया जा रहा है। रौना कला, मुर्दहा, आयर, दानगंज, नियार और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई दे रहा। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें सक्रिय रहती हैं और अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी है। सेवापुरी ब्लॉक के बरनी गांव में भी सरकारी जमीन पर अवैध खनन के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस संबंध में पहले भी प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं। समाधान दिवस में भी ग्रामीणों ने लिखित प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कथित तौर पर न तो खनन रुका और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम उठाया गया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है कि अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले कई ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी होती। ऐसे वाहन रात के समय सड़कों पर बेखौफ दौड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों की ओर से भी पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी वजह से अवैध खनन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।

 

इस पूरे मामले पर एसीपी सारनाथ विदूष सक्सेना ने स्पष्ट कहा है—

खनन अधिकारी की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। समूह में आकर वाहन छुड़ाने वालों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। थाने की पुलिस को निर्देश दिया गया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।”

एसीपी का यह बयान प्रशासन की मंशा तो स्पष्ट करता है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार खनन माफियाओं पर वास्तव में कठोर कार्रवाई हो पाएगी या फिर पहले की तरह मामला केवल मुकदमे और जांच तक सीमित रह जाएगा। क्योंकि जिस तरह से सरकारी अधिकारी को घेरकर जब्त वाहन छुड़ा लिए गए, उसने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह घटना एक बार फिर इस बात का संकेत दे गई है कि अवैध खनन केवल पर्यावरण और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि अब यह कानून को खुली चुनौती देने वाले संगठित नेटवर्क का रूप लेता दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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