गोरखपुर जिस पिता ने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिंदगी की हर मुश्किल से बचाकर बड़ा किया, उसी पिता की जिंदगी का अंत उसके अपने बेटे के हाथों हो गया। उत्तर प्रदेश के गुलरिहा क्षेत्र के जंगल अयोध्या प्रसाद नौका टोला में हुई इस दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। रिश्तों के कत्ल की यह कहानी सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं और जुबान पर बस एक ही सवाल है—आखिर एक बेटा अपने पिता का हत्यारा कैसे बन गया? बुधवार देर रात गांव में सब कुछ सामान्य था। दिनभर की मेहनत के बाद लोग अपने-अपने घरों में सो चुके थे। 51 वर्षीय ब्रह्मदेव कन्नौजिया भी भोजन करने के बाद घर के बाहर चारपाई पर आराम कर रहे थे। लेकिन रात करीब सवा दो बजे ऐसा खूनी खेल शुरू हुआ, जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। आरोप है कि उनके मझले बेटे गोलू कन्नौजिया ने कुल्हाड़ी उठाई और सो रहे पिता पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर और गर्दन पर किए गए हमले इतने भयावह थे कि ब्रह्मदेव को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद जो हुआ, उसने पूरे गांव को दहला दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, पिता की जान लेने के बाद गोलू घर की छत पर चढ़ गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि उसने अपने पिता को मार डाला है। आधी रात को उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। लोग जब घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां खून से लथपथ पड़े ब्रह्मदेव को देखकर सन्न रह गए। बताया जाता है कि वारदात के दौरान आरोपी ने घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था। घर के भीतर मौजूद उसकी भाभी बेबस होकर चीखती-चिल्लाती रहीं। वह छत पर चढ़कर गोलू से बार-बार गुहार लगाती रहीं कि वह ऐसा न करे, लेकिन उस पर किसी बात का असर नहीं हुआ। गुस्से और मानसिक उथल-पुथल में डूबा युवक किसी की सुनने को तैयार नहीं था। गांव वालों और परिजनों के अनुसार, इस खौफनाक वारदात की जड़ें कई साल पुरानी हैं। गोलू पिछले सात-आठ वर्षों से मानसिक समस्याओं से जूझ रहा था। उसका इलाज भी चल रहा था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में उसकी जिंदगी में आए घटनाक्रमों ने उसे भीतर से तोड़ दिया था। गांव की एक युवती से उसका प्रेम प्रसंग था। दोनों के रिश्ते की चर्चा गांव में भी होती थी। लेकिन जब युवती की शादी किसी और से हो गई, तो गोलू गहरे सदमे में चला गया। वह धीरे-धीरे लोगों से कटने लगा और अवसाद में रहने लगा।

परिवार का कहना है कि प्रेम में मिली नाकामी का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि करीब छह महीने पहले उसकी मां का निधन हो गया। मां की मौत ने उसे पूरी तरह झकझोर दिया। वह घंटों अकेले बैठा रहता, किसी से बात नहीं करता और अक्सर खोया-खोया नजर आता था। घरवालों को उसकी चिंता तो थी, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि उसकी मानसिक स्थिति एक दिन इतनी भयावह घटना का कारण बन जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से गोलू का व्यवहार लगातार बदल रहा था। वह छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाता था और कई बार असामान्य हरकतें करता था। हालांकि परिवार उसे संभालने और इलाज कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हालात बिगड़ते चले गए। वारदात के बाद छत पर खड़ा गोलू लोगों से यह भी कह रहा था कि उसके पिता उसकी शादी कराने में बाधा बन रहे थे। यही बात उसके गुस्से का कारण बनी। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को खंगाल रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली गई। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। उधर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर गए अन्य बेटों को जब पिता की हत्या की खबर मिली तो वे तुरंत गांव लौट आए। घर में मातम पसरा हुआ है। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।
गुरुवार को जब ब्रह्मदेव कन्नौजिया की अंतिम यात्रा निकली तो गांव का हर व्यक्ति गमगीन नजर आया। सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब मृतक के चार वर्षीय पोते कार्तिक ने अपने बाबा की चिता को मुखाग्नि दी। मासूम कार्तिक शायद यह भी नहीं समझ पा रहा था कि उसके बाबा अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। लेकिन यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। एक तरफ पिता की हत्या के आरोप में बेटा सलाखों के पीछे पहुंच गया, दूसरी तरफ परिवार का सहारा हमेशा के लिए छिन गया। प्रेम में मिली नाकामी, मां की मौत का दर्द और मानसिक तनाव की परतों में उलझी यह कहानी अब पूरे गांव के लिए एक ऐसी त्रासदी बन गई है, जिसे लोग लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे। गांव की गलियों में आज भी सन्नाटा पसरा है और हर कोई यही कह रहा है—जिस बेटे को पिता ने जिंदगी दी, उसी ने उनकी जिंदगी छीन ली।
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