
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना सिर्फ शौक नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। सोशल मीडिया पर सिक्स पैक एब्स, मस्कुलर बॉडी और ट्रांसफॉर्मेशन वीडियो देखकर लाखों युवा जिम का रुख कर रहे हैं। फिटनेस अब एक फैशन और स्टेटस सिंबल बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिटनेस पाने की यही दौड़ कई लोगों की किडनी पर भारी पड़ रही है? डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिन्हें किडनी से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं और इसके पीछे एक बड़ा कारण बिना विशेषज्ञ सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट, अत्यधिक सप्लीमेंट्स का सेवन और जरूरत से ज्यादा वर्कआउट है। फिटनेस की चाह अगर संतुलित न हो तो यह शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकती है।
फिटनेस का जुनून कब बन जाता है खतरा?
आजकल युवाओं में जल्दी रिजल्ट पाने की होड़ लगी हुई है। कोई कुछ ही महीनों में बॉडी बनाना चाहता है तो कोई तेजी से वजन घटाने के लिए अत्यधिक डाइटिंग शुरू कर देता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की नकल करते हुए लोग बिना डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट अपनाने लगते हैं। कई लोग दिन में कई बार प्रोटीन शेक पीते हैं, सप्लीमेंट्स लेते हैं और घंटों तक जिम में पसीना बहाते हैं। लेकिन शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन और सप्लीमेंट्स को प्रोसेस करने का अतिरिक्त दबाव किडनी पर पड़ता है।
हाई-प्रोटीन डाइट और किडनी का कनेक्शन
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करता है। लेकिन जरूरत से अधिक प्रोटीन का सेवन हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। जब शरीर में अधिक मात्रा में प्रोटीन पहुंचता है तो उसे फिल्टर करने और उसके अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम किडनी को करना पड़ता है। लंबे समय तक अत्यधिक प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जिनकी किडनी पहले से कमजोर है या जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की प्रोटीन आवश्यकता अलग होती है। इसलिए किसी दोस्त, ट्रेनर या सोशल मीडिया पोस्ट को देखकर डाइट तय करना खतरनाक साबित हो सकता है।
सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल भी खतरनाक
फिटनेस इंडस्ट्री में प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट ड्रिंक, फैट बर्नर और मसल गेनर जैसे उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि सभी सप्लीमेंट्स नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन बिना जरूरत और बिना मेडिकल सलाह के इनका सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। कुछ सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी और लिवर दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार नकली या घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद भी बाजार में उपलब्ध होते हैं, जिनका असर सीधे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।
पानी कम पीना बढ़ा सकता है खतरा
जिम जाने वाले कई लोग घंटों तक वर्कआउट करते हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी होने पर किडनी को खून फिल्टर करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। डिहाइड्रेशन की स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी स्टोन, यूरिन इंफेक्शन और किडनी फंक्शन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए फिटनेस के साथ हाइड्रेशन पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।

ज्यादा वर्कआउट भी बन सकता है परेशानी
अक्सर माना जाता है कि जितना ज्यादा वर्कआउट करेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा। लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। अत्यधिक एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में बहुत ज्यादा और अत्यधिक तीव्र वर्कआउट के कारण “रैब्डोमायोलिसिस” जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें मांसपेशियों के टूटे हुए तत्व रक्त में पहुंचकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन फिटनेस के नाम पर शरीर की क्षमता से अधिक मेहनत करना सुरक्षित नहीं माना जाता।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
किडनी से जुड़ी समस्याएं शुरुआती दौर में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए|
- बार-बार थकान महसूस होना
- पैरों या चेहरे पर सूजन
- पेशाब में बदलाव
- पेशाब के दौरान जलन
- लगातार कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- भूख कम लगना
- बार-बार उल्टी या मतली महसूस होना
यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फिटनेस चाहिए तो अपनाएं स्मार्ट तरीका
फिटनेस का मतलब केवल बड़ी मांसपेशियां या कम वजन नहीं है। असली फिटनेस वह है जिसमें शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहें।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
- संतुलित आहार लें।
- प्रोटीन का सेवन जरूरत के अनुसार करें।
- सप्लीमेंट्स केवल विशेषज्ञ सलाह पर लें।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
- शरीर की क्षमता के अनुसार ही व्यायाम करें।
- किसी भी ट्रेंड को आंख बंद करके फॉलो न करें।
फिटनेस और स्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी
आज की युवा पीढ़ी फिटनेस को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हुई है, जो एक सकारात्मक बदलाव है। लेकिन फिटनेस की यह जागरूकता तभी फायदेमंद है जब इसके पीछे सही जानकारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो। केवल सोशल मीडिया ट्रेंड्स, विज्ञापनों या जल्द रिजल्ट पाने की चाह में लिए गए फैसले भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। याद रखिए मजबूत शरीर बनाने से पहले स्वस्थ शरीर बनाना जरूरी है। अगर आपकी किडनी, लिवर और दिल स्वस्थ हैं तभी आपकी फिटनेस का असली मतलब है। इसलिए अगली बार जब आप कोई नया सप्लीमेंट खरीदें, हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करें या घंटों जिम में बिताने का फैसला लें, तो एक बार जरूर सोचें—कहीं फिटनेस के चक्कर में आप अपनी किडनी को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे?
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

