
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का बन्नू जिला शनिवार को दोहरे बम धमाकों से दहल उठा। आतंकियों ने ऐसी साजिश रची जिसने न केवल आम लोगों को निशाना बनाया, बल्कि घायलों की मदद के लिए आगे आए लोगों को भी अपनी हिंसा का शिकार बना लिया। कुछ ही मिनटों के अंतराल में हुए दो सिलसिलेवार रिमोट कंट्रोल बम विस्फोटों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। इन हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाकों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों वाहन पूरी तरह तबाह हो गए और सड़क पर चारों तरफ चीख-पुकार, धुआं और मलबा ही दिखाई दे रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पहला धमाका बन्नू जिले के फांग मूसा खेल क्षेत्र में हुआ। एक निजी डैटसन वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की ओर जा रहा था। वाहन में सामान्य लोग सफर कर रहे थे और किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही क्षणों में उनकी जिंदगी बदलने वाली है। जैसे ही वाहन एक सुनसान हिस्से से गुजरा, पहले से लगाए गए रिमोट कंट्रोल बम को विस्फोट कर दिया गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। आसपास मौजूद लोगों ने तेज धमाके की आवाज सुनी और घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। पहले विस्फोट में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क पर खून और मलबा बिखरा पड़ा था। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिशें शुरू कर दी गईं। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि आतंकियों की साजिश यहीं खत्म नहीं हुई है। पहले धमाके के बाद जब घायलों को दूसरे वाहन में बैठाकर अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरा धमाका हुआ। यह विस्फोट भी रिमोट कंट्रोल तकनीक से किया गया बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दूसरा वाहन जैसे ही एक निश्चित स्थान पर पहुंचा, जोरदार धमाका हुआ और वाहन आग के गोले में बदल गया। इस दूसरे हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। लगातार दो विस्फोटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। लोग समझ ही नहीं पाए कि आखिर हो क्या रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों ने केवल पहले वाहन को निशाना नहीं बनाया था, बल्कि उनकी योजना बचाव कार्य को भी प्रभावित करने की थी। यही कारण है कि घायलों को अस्पताल ले जाने वाले वाहन को भी टारगेट किया गया। इस तरह का हमला सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बेहद खतरनाक रणनीति माना जाता है, क्योंकि इसका उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना और राहत कार्यों को बाधित करना होता है। घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 की टीमों को मौके पर भेजा गया। बचावकर्मियों ने घायलों को तत्काल डोमेल ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई और अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को भी बुलाया गया।दोहरे धमाकों के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों को आशंका थी कि हमलावरों ने आसपास और भी विस्फोटक सामग्री छिपा रखी हो सकती है। इसी कारण पूरे इलाके की गहन जांच की गई। बम निरोधक दस्तों को भी मौके पर बुलाया गया ताकि किसी अन्य संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके। इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पिछले कुछ वर्षों से आतंकी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां सुरक्षा बलों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों पर लगातार हमले होते रहे हैं। बन्नू जिला भी लंबे समय से आतंकियों के निशाने पर रहा है। पिछले सप्ताह यहां एक पुल को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश की गई थी। जून महीने में अलग-अलग हमलों में दो पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी। इसके अलावा सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई मुठभेड़ें भी हो चुकी हैं।
घटना के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने की आवश्यकता है तथा आतंकियों को समर्थन, शरण और आर्थिक सहायता देने वाले तत्वों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस आतंकी घटना को कायराना करार देते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों की पहचान कर जल्द से जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए। नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ अपराध है। लगातार बढ़ती आतंकी घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आए दिन होने वाले हमलों ने सामान्य जीवन को प्रभावित कर दिया है। हाल ही में आयोजित एक बड़े जिरगा में भी स्थानीय समुदाय ने सरकार से आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की थी। लोगों का कहना है कि जब तक आतंकियों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक क्षेत्र में शांति स्थापित करना मुश्किल होगा।बन्नू में हुए ये दोहरे धमाके केवल सात जिंदगियां नहीं ले गए, बल्कि उन्होंने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आतंकवाद का खतरा अभी भी पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि आतंकियों ने घायलों को बचाने की कोशिश कर रहे लोगों को भी निशाना बनाया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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