कानपुर शहर में पिछले कई दिनों से युवतियों और महिलाओं पर रहस्यमयी तरीके से ज्वलनशील पदार्थ फेंकने की घटनाओं ने दहशत फैला रखी थी। सड़क पर निकलने वाली छात्राएं, नौकरीपेशा महिलाएं और कोचिंग जाने वाली युवतियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही थीं। आखिरकार पुलिस ने उस सनकी चेहरे को बेनकाब कर दिया, जो महिलाओं की चीखों और दर्द में अपनी विकृत खुशी तलाश रहा था। आरोपी की पहचान शारदानगर निवासी मोहम्मद दिलशाद के रूप में हुई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि दिलशाद कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि टाइल्स और पत्थर जोड़ने का काम करने वाला मजदूर है। लेकिन उसके भीतर छिपी मानसिक विकृति ने उसे ऐसा अपराधी बना दिया, जिसने पूरे इलाके में खौफ का माहौल पैदा कर दिया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दिलशाद ने स्वीकार किया कि वह युवतियों और महिलाओं पर ज्वलनशील केमिकल फेंकने के बाद दूर खड़ा होकर उनकी तड़प, चीख और बेचैनी देखता था और उसे इससे “मजा” आता था।

घटना की शुरुआत शनिवार से हुई, जब नेट परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा पर शारदानगर इलाके में अचानक किसी ने चिपचिपा ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया। छात्रा घबरा गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान एक साइकिल सवार युवक संदिग्ध दिखाई दिया, जिसने कुर्ता-पायजामा पहन रखा था और पीठ पर बैग टांगा हुआ था। इसी दिन शाम को एक नर्सिंगकर्मी युवती भी इसी तरह की वारदात का शिकार बनी। लगातार दो घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी। अधिकारियों ने अलग-अलग टीमें गठित कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। इसी बीच रविवार को एक और वारदात ने पूरे शहर को हिला दिया। कल्याणपुर के बरसायतपुर इलाके में रहने वाली एक महिला टीचर कोचिंग पढ़ाने जा रही थीं। जैसे ही वह सीएसजेएम विश्वविद्यालय के पास पहुंचीं, साइकिल सवार दिलशाद उनके करीब आया और उन पर ज्वलनशील केमिकल फेंककर फरार हो गया। पदार्थ महिला के हाथों पर गिरा और कुछ ही सेकंड में तेज जलन शुरू हो गई। दर्द से तड़पती महिला चीखने लगीं। केमिकल हटाने की कोशिश में उनके हाथ की खाल तक उधड़ गई। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल मदद पहुंचाई। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी और कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से ज्वलनशील पदार्थ के अलावा 510 ग्राम चरस भी बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने जो बताया, उसने पुलिस को भी स्तब्ध कर दिया।
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, दिलशाद पत्थर और टाइल्स जोड़ने का काम करता है। वह काम में इस्तेमाल होने वाला केमिकल छोटी बोतलों में भरकर साइकिल पर लेकर निकलता था। सुनसान या कम भीड़ वाले इलाकों में वह अकेली जा रही युवतियों और महिलाओं को निशाना बनाता था। केमिकल फेंकने के बाद वह कुछ दूरी पर जाकर रुक जाता और पीड़िताओं की हालत देखता रहता। जब वे दर्द से कराहतीं या घबराकर मदद मांगतीं, तब उसे मानसिक संतुष्टि मिलती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो देखने का आदी था। उसके मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में अश्लील सामग्री बरामद हुई है। पुलिस का मानना है कि उसकी मानसिकता लंबे समय से विकृत हो चुकी थी और इसी वजह से वह महिलाओं को निशाना बनाकर अपराध कर रहा था। जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। दिलशाद पहली बार अपराध की दुनिया में नहीं आया था। वर्ष 2022 में वह काकादेव इलाके में एक किशोरी को सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म का प्रयास कर चुका है। उस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत उसे जेल भेजा गया था। हालांकि करीब छह महीने बाद वह जमानत पर बाहर आ गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने खुद को सुधारा नहीं, बल्कि और अधिक खतरनाक मानसिकता के साथ अपराधों की राह पकड़ ली। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को छात्रा और नर्स पर फेंका गया केमिकल सीधे शरीर पर नहीं गिरा था, इसलिए बड़ा नुकसान टल गया। लेकिन रविवार को महिला टीचर पर हमला करते समय उसका निशाना सटीक बैठा, जिससे महिला गंभीर रूप से झुलस गईं। यदि समय रहते उपचार नहीं मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
इस घटना ने शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि आरोपी समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो वह और भी बड़ी घटनाओं को अंजाम दे सकता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं दिलशाद पहले भी ऐसी वारदातों में शामिल तो नहीं रहा है।फिलहाल आरोपी सलाखों के पीछे है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी ने समाज के सामने एक गंभीर सवाल छोड़ दिया है—क्या केवल कानून का डर ऐसे विकृत मानसिकता वाले अपराधियों को रोक सकता है, या फिर ऐसे लोगों की पहचान कर समय रहते उनके व्यवहार पर नजर रखने की भी जरूरत है? कानपुर में महिलाओं पर केमिकल फेंकने की यह सनसनीखेज वारदात सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर मानसिक और सामाजिक चुनौती की कहानी बन गई है।
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