साथ पढ़े, साथ सपने देखे… और साथ ही बुझ गए दो घरों के चिराग, लखनऊ अग्निकांड ने रुलाया पूरा कानपुर

Editorial
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लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने सिर्फ 15 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों के सपने, उम्मीदें और भविष्य भी अपने साथ राख कर दिए। इस दर्दनाक हादसे में कानपुर के दो ऐसे दोस्तों की मौत हुई, जिनकी दोस्ती बचपन से लेकर आखिरी सांस तक कायम रही। साथ पढ़े, साथ खेले, साथ सपने देखे और फिर एक ही हादसे में दुनिया को अलविदा कह गए। गोविंदनगर निवासी संयम और बर्रा निवासी सूरज की मौत ने पूरे कानपुर को झकझोर कर रख दिया है। दोनों परिवारों में मातम पसरा है और हर आंख नम है। मंगलवार की सुबह कानपुर के दो मोहल्लों में एक जैसा दर्द दिखाई दे रहा था। एक तरफ गोविंदनगर में संयम का शव पहुंचा तो दूसरी तरफ बर्रा में सूरज की पार्थिव देह का इंतजार हो रहा था। दोनों परिवारों को उम्मीद थी कि उनके बेटे किसी तरह बच जाएंगे, लेकिन जब शव घर पहुंचे तो उम्मीदों की आखिरी किरण भी बुझ गई। जिस घर में कुछ दिन बाद शहनाई बजने की तैयारी थी, वहां मातम की चीखें गूंजने लगीं।

संयम की मां सोनिया का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटे के शव को देखते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनकी चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। वह बार-बार यही कह रही थीं कि बेटा बिना कुछ कहे कैसे चला गया। एक मां अपने बेटे की एक आवाज सुनने के लिए तड़प रही थी, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो चुका था। परिवार के अन्य सदस्य भी गहरे सदमे में थे। संयम की भाभी पलक और अन्य परिजन एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दर्द इतना बड़ा था कि शब्द भी बेबस नजर आ रहे थे। इस हादसे ने परिवार को उस वक्त और बड़ा झटका दिया जब पता चला कि संयम की दादी ऊषा रानी का महज 17 दिन पहले निधन हुआ था। मंगलवार को उनका सत्रहवां संस्कार होना था और संयम को उसमें शामिल होने के लिए घर आना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में दादी की स्मृति में रस्में होनी थीं, उसी घर में पोते की अर्थी उठ गई। पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छा गया और लोग इस दुखद संयोग को देखकर भावुक हो उठे।

 

उधर बर्रा में सूरज के घर का दृश्य भी कम दर्दनाक नहीं था। परिवार को रात भर यही बताया गया कि सूरज घायल है और उसे लखनऊ से वापस लाया जा रहा है। लेकिन सुबह जब वाहन से उसका शव उतारा गया तो मां मीरा के पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटे के शव से लिपटकर वह बार-बार यही कहती रहीं कि उसने तो एक दिन पहले ही फोन कर कहा था कि वह सुरक्षित पहुंच गया है और मां अपना ख्याल रखे। अब उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा ही उनसे दूर जा चुका था। सूरज की जिंदगी पहले से ही संघर्षों से भरी रही थी। तीन साल पहले उसके पिता शिवराम सिंह की पेट्रोल पंप पर काम करते समय जलने से मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सूरज के कंधों पर आ गई थी। मां, छोटे भाई सम्राट और बहन सौम्या की देखभाल की जिम्मेदारी वह निभा रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी और मेहनत के दम पर सूरज एक दिन घर की हालत बदल देगा, लेकिन इस हादसे ने सारे सपने खत्म कर दिए।

 

परिजनों ने बताया कि दो दिन पहले ही सूरज अपनी शादी के लिए लड़की देखने आया था। परिवार उसके भविष्य को लेकर नई योजनाएं बना रहा था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों बाद शादी की चर्चा की जगह अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ेगी। हादसे की खबर मिलने के बाद सूरज के रिश्तेदार लखनऊ के लिए निकले, लेकिन रास्ते में उनकी कार भी दुर्घटना का शिकार हो गई। हालांकि उसमें किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना परिवार के दुख को और बढ़ाने वाली साबित हुई।बताया जा रहा है कि सूरज और संयम दोनों बचपन के दोस्त थे। दोनों ने कानपुर के रतनलाल नगर स्थित दून स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने करियर बनाने के लिए एक ही क्षेत्र चुना और एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी शुरू की। जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलने वाले इन दोस्तों का सफर भी एक साथ खत्म हो गया। उनके जानने वालों का कहना है कि दोनों की दोस्ती मिसाल थी और शायद इसी वजह से किस्मत ने भी उन्हें एक साथ विदा कर दिया।

 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों की मौत आग में जलने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई। परिजनों का कहना है कि उनके शरीर काले पड़ गए थे, जिससे आशंका जताई जा रही है कि आग और धुएं से बचने के लिए उन्होंने खुद को किसी कमरे या बाथरूम में बंद कर लिया होगा। लेकिन जहरीले धुएं ने उनकी सांसें छीन लीं। गौरतलब है कि लखनऊ के अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में सोमवार दोपहर भीषण आग लग गई थी। इमारत में एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र-छात्राएं अंदर ही फंस गए। कुछ ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी, जबकि कई लोग धुएं और आग की चपेट में आ गए।

करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 15 लोगों के शव निकाले गए, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जानकारी मिलते ही अपना कार्यक्रम छोड़कर लखनऊ पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी घायलों का हालचाल जाना। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी के कंप्रेसर में विस्फोट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है।लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन परिवारों के दर्द की भरपाई कौन करेगा जिन्होंने अपने घरों के चिराग खो दिए। सूरज और संयम की कहानी अब सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं रही, बल्कि यह उन अधूरे सपनों, टूटे रिश्तों और बिखरे परिवारों की दर्दनाक दास्तान बन गई है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं।

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