राम मंदिर चढ़ावा कांड: SIT रिपोर्ट से मचा हड़कंप, चोरी-कमीशनखोरी के संकेत; बड़े नामों पर FIR की तलवार

Editorial
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है। रिपोर्ट में ऐसे कई खुलासों का जिक्र किया गया है, जिन्होंने न केवल मंदिर प्रशासन बल्कि पूरे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में चढ़ावे की गणना, कर्मचारियों की नियुक्तियों, कमीशनखोरी और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियों के संकेत मिले हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि एसआईटी ने कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की है। मंगलवार को एसआईटी में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट शासन को सौंप दी। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई है। जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में सबसे गंभीर सवाल मंदिर ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर उठाए गए हैं। जांच दल का मानना है कि जिस प्रणाली के जरिए करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गणना और प्रबंधन होना था, उसमें कई स्तरों पर लापरवाही और संभावित हेरफेर की गुंजाइश बनी रही। यही वजह रही कि लंबे समय तक कथित गड़बड़ियां सामने नहीं आ सकीं।जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में शामिल कुछ कर्मचारियों और संविदाकर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि गणना प्रक्रिया के दौरान नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। कई कर्मचारियों के खिलाफ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। जांच में करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।मामले का दूसरा बड़ा पहलू कथित कमीशनखोरी से जुड़ा है। रिपोर्ट में मंदिर निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ व्यक्तियों और उनके करीबी लोगों का भी उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान कुछ गवाहों ने कथित कमीशन और आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। एसआईटी ने इन आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है ताकि आगे की विस्तृत जांच में इन पहलुओं की पड़ताल की जा सके।

रिपोर्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि कई संविदाकर्मियों की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के बजाय सिफारिशों के आधार पर हुई। इससे व्यवस्था में जवाबदेही कमजोर हुई और निगरानी तंत्र प्रभावित हुआ। एसआईटी ने इस व्यवस्था को भविष्य के लिए बड़ा जोखिम बताया है।बैंकिंग प्रणाली और चढ़ावे की गणना में शामिल बाहरी एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ बैंक कर्मियों और संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं। जांच दल का मानना है कि यदि वित्तीय निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सख्त होती, तो कथित गड़बड़ियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी एसआईटी ने गंभीर टिप्पणियां की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे की सुरक्षा के बावजूद यदि रकम की निकासी या हेरफेर जैसी गतिविधियां होती रहीं और किसी को भनक तक नहीं लगी, तो यह सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता मानी जाएगी। इस कारण कुछ सुरक्षा कर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रस्ट के पुनर्गठन से जुड़ी सिफारिशें मानी जा रही हैं। एसआईटी ने सुझाव दिया है कि चढ़ावे की गणना और वित्तीय प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया जाए। कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और हर स्तर पर डिजिटल निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने मामले में विस्तृत आपराधिक जांच की आवश्यकता जताई है। इसी कारण रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई लोगों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। साथ ही, एसआईटी को जांच आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचा है। अब सबकी निगाहें शासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रारंभिक रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों की पुष्टि आगे की जांच में होती है, तो यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंदिर प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करेगा। फिलहाल एसआईटी की रिपोर्ट ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि मामला साधारण नहीं है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जुड़े कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

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