
लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। जिस इमारत में आग लगने से कई परिवारों की खुशियां उजड़ गईं, उसी इमारत को लेकर अब चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने स्वीकार किया है कि इस पूरे मामले में उसके 19 कर्मचारी जांच के दायरे में हैं, जबकि संबंधित इमारत को लेकर पहले भी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जा चुका था।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सालों पहले इमारत के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया गया था, तो आखिर वह आदेश वापस क्यों लिया गया? और यदि इमारत अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रही थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें क्यों मूंद लीं?

7 जुलाई को चल सकता है बुलडोजर
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि हादसे वाली इमारत पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। भवन स्वामी को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो 7 जुलाई को इमारत पर बुलडोजर चलाया जाएगा।इस बयान के बाद पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिन कमियों और नियमों के उल्लंघन की वजह से इतनी बड़ी त्रासदी हुई, उन पर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
19 कर्मचारी जांच के घेरे में
एलडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 19 कर्मचारी संदेह के दायरे में पाए गए हैं। इनमें से तीन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि 16 अभी भी विभाग में कार्यरत हैं।उन्होंने कहा कि सभी की भूमिका की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि मामला केवल एक अवैध इमारत का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
2014 में आवासीय नक्शा, लेकिन शुरू हो गया व्यावसायिक उपयोग
जांच में सामने आया है कि इस भवन का नक्शा वर्ष 2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद भवन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए शुरू कर दिया गया।जब यह मामला एलडीए के संज्ञान में आया तो वर्ष 2016 में भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मात्र दो महीने के भीतर ही यह आदेश वापस ले लिया गया।बताया गया कि भवन स्वामी ने आवेदन देकर आश्वासन दिया था कि परिसर का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसी आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी गई।अब सवाल यह है कि क्या उस दावे की कभी जांच हुई? क्या किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर सत्यापन किया? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
आदेश वापस लेने वाले अधिकारी पर कार्रवाई
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्वीकार किया कि यदि ध्वस्तीकरण आदेश वापस लिया गया था तो उसके बाद भवन की वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए थी।उन्होंने कहा कि विभागीय जांच में कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर ली गई है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।यह बयान संकेत देता है कि हादसे के पीछे केवल भवन स्वामी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी वजह हो सकती है।
सीएम योगी के निर्देश पर सात टीमें गठित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। एलडीए ने जिलेभर में अवैध निर्माणों और नियमों की अनदेखी कर संचालित भवनों की जांच के लिए जोनवार सात विशेष टीमें गठित की हैं।इन टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनपद के सभी संदिग्ध भवनों की जांच करें और जहां भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए।प्रशासन का दावा है कि अब किसी भी अवैध इमारत को बख्शा नहीं जाएगा।
हादसे ने खड़े कर दिए कई बड़े सवाल
अलीगंज अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और भवन सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता के रूप में देखा जा रहा है।यदि 2016 में ही ध्वस्तीकरण आदेश लागू हो जाता, यदि समय-समय पर निरीक्षण होता, यदि नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।अब जब 19 कर्मचारी जांच के घेरे में हैं और बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी हो रही है, तब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल भवन गिरा देने से जिम्मेदारी तय हो जाएगी? या फिर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई होगी जिनकी लापरवाही ने इस पूरे मामले को जन्म दिया?
जनता पूछ रही है— जिम्मेदार कौन?
लखनऊ की जनता अब जवाब चाहती है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया या हादसे में उन्हें घायल होते देखा, उनके लिए यह केवल जांच का विषय नहीं बल्कि न्याय का सवाल है।7 जुलाई को बुलडोजर चलेगा या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इस हादसे ने यह जरूर साबित कर दिया है कि नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई किसी भी शहर को बड़ी त्रासदी की ओर धकेल सकती है।अब निगाहें जांच रिपोर्ट, दोषियों पर कार्रवाई और 7 जुलाई को प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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