“IIT रुड़की का AI चमत्कार: 4 घंटे में चुनेगा कैंसर की सबसे असरदार दवा, 77 करोड़ संयोजनों की करेगा जांच!”

Editorial
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रुड़की  कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नई उम्मीद बनकर सामने आई है। देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. कमल जैन ने ऐसा अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो कैंसर मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी दवा संयोजन चुनने में डॉक्टरों की मदद करेगा। दावा है कि यह प्लेटफॉर्म महज चार घंटे के भीतर मरीज की स्थिति का विश्लेषण कर इलाज का ऐसा विकल्प सुझा सकता है, जिसे खोजने में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को कई सप्ताह या महीनों का समय लग जाता है।इस नई तकनीक का नाम ‘ओमनीसिंक्स’ (OmniSynX) रखा गया है। यह प्लेटफॉर्म AI और कंप्यूटेशनल सर्च तकनीक की मदद से कैंसर उपचार को अधिक सटीक, तेज और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

हर साल 15 लाख नए मरीज, बढ़ती चुनौती

भारत में कैंसर तेजी से गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। हर वर्ष करीब 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। चिंता की बात यह है कि लगभग 75 प्रतिशत मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर अंतिम या उन्नत चरण में पहुंच चुका होता है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2045 तक देश में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर 25 लाख प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। ऐसे में डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर सही इलाज चुनने की होती है।प्रो. कमल जैन बताते हैं कि एक कैंसर विशेषज्ञ के पास किसी मरीज के लिए निर्णय लेने का समय अक्सर सिर्फ 15 से 20 मिनट होता है। इस दौरान उसे मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी की स्थिति, दवाओं के प्रभाव और संभावित दुष्प्रभावों को ध्यान में रखकर फैसला लेना पड़ता है। यही वह चुनौती है, जिसे ओमनीसिंक्स प्लेटफॉर्म हल करने का दावा करता है।

77 करोड़ दवा संयोजनों की पड़ताल

ओमनीसिंक्स की सबसे बड़ी ताकत इसकी विश्लेषण क्षमता है। यह प्लेटफॉर्म मरीज के मेडिकल डेटा का अध्ययन कर 378 से अधिक दवाओं के लगभग 77 करोड़ संभावित संयोजनों का परीक्षण कर सकता है।सिस्टम उन दवाओं को स्वतः अलग कर देता है जिनसे मरीज को खतरा हो सकता है और केवल उन्हीं विकल्पों को सामने लाता है जो अधिक प्रभावी और अपेक्षाकृत सुरक्षित हों।यानी डॉक्टरों को हजारों संभावनाओं में खोजबीन नहीं करनी पड़ेगी। AI कुछ ही घंटों में सबसे उपयुक्त विकल्पों की सूची तैयार कर देगा।विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कैंसर उपचार में पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की दिशा को बड़ी गति मिलेगी, जहां हर मरीज को उसकी बीमारी और शरीर की जरूरत के हिसाब से अलग उपचार मिल सकेगा।

बायोप्सी फेल होने पर भी देगा समाधान

कई बार कैंसर के मरीजों में बायोप्सी करना संभव नहीं होता। कुछ मामलों में खून में कैंसर का डीएनए नहीं मिलता, जबकि कुछ मरीजों में बायोप्सी प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी साबित हो सकती है।ऐसी परिस्थितियों में इलाज चुनना डॉक्टरों के लिए बेहद कठिन हो जाता है।प्रो. जैन के अनुसार ओमनीसिंक्स की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह बायोप्सी विफल होने की स्थिति में भी काम कर सकता है।प्लेटफॉर्म दुनिया भर में प्रकाशित वैज्ञानिक शोध, क्लीनिकल डेटा और चिकित्सा अध्ययनों का विश्लेषण कर संभावित उपचार रणनीतियां तैयार करता है। इससे मरीज को बिना अतिरिक्त जोखिम उठाए उपचार का बेहतर विकल्प मिल सकता है।

गंभीर मरीज के इलाज में मिली सफलता

प्रो. कमल जैन ने एक ऐसे मरीज का उदाहरण भी साझा किया, जिसने इस प्लेटफॉर्म की उपयोगिता को साबित किया।63 वर्षीय एक मरीज आरईटी-फ्यूजन थायराइड कैंसर से पीड़ित था। उसे दी जा रही दवा सेल्परकैटिनिब के प्रति कैंसर ने प्रतिरोध विकसित कर लिया था। स्थिति इतनी जटिल हो गई कि लिक्विड और टिशू बायोप्सी दोनों नकारात्मक आईं, जबकि रीढ़ की हड्डी में बायोप्सी करना जानलेवा जोखिम से कम नहीं था।मरीज का हृदय भी कमजोर था, जिसके कारण कई संभावित दवाएं देना खतरनाक माना जा रहा था। डॉक्टरों के पास कोई स्पष्ट उपचार विकल्प नहीं बचा था।ऐसे समय में ओमनीसिंक्स प्लेटफॉर्म ने मात्र चार घंटे में संभावित दवा संयोजनों का विश्लेषण कर सबसे प्रभावी विकल्प सुझाया। इससे डॉक्टरों को उपचार की नई दिशा मिली और मरीज के लिए उम्मीद की किरण जगी।

भविष्य में और भी बड़े बदलाव

आईआईटी रुड़की की यह तकनीक केवल कैंसर उपचार तक सीमित नहीं रहने वाली। वैज्ञानिक अब इसे और उन्नत बनाने पर काम कर रहे हैं।भविष्य में इस प्लेटफॉर्म की मदद से व्यक्तिगत mRNA वैक्सीन डिजाइन, दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की भविष्यवाणी, दुर्लभ बीमारियों के उपचार विकल्प और जटिल चिकित्सा निर्णयों में सहायता जैसे क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा सकेगा।

कैंसर उपचार का बदल सकता है भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है तो कैंसर उपचार की पूरी प्रक्रिया बदल सकती है। जहां आज मरीजों को सही इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं भविष्य में AI कुछ घंटों के भीतर डॉक्टरों को सटीक और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने में मदद करेगा। आईआईटी रुड़की का यह नवाचार न केवल भारतीय चिकित्सा विज्ञान के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने वाली है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई में यह तकनीक लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।

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