11 मौतें, 30 से ज्यादा आरोपी… फिर भी बच गए बड़े अफसर! लखनऊ के अग्निकांडों की जांच का कड़वा सच

Editorial
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लखनऊ में एक बार फिर बड़ा अग्निकांड हुआ है। जांच बैठ गई है, अफसर दौड़ रहे हैं, रिपोर्टें मांगी जा रही हैं और कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार भी वही होगा जो पहले हुआ था? क्या कुछ साल बाद फाइलें धूल खाती रह जाएंगी और बड़े जिम्मेदार फिर बच निकलेंगे?राजधानी में हुए दो बड़े अग्निकांड इसकी गवाही देते हैं। वर्ष 2018 में चारबाग स्थित होटल एसएसजे और होटल विराट में लगी भीषण आग ने सात लोगों की जान ले ली थी। इसके चार साल बाद 2022 में होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड में चार लोगों की मौत हो गई। दोनों हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। जांच में सामने आया कि होटल सुरक्षा मानकों के खिलाफ संचालित हो रहे थे और कई स्तरों पर लापरवाही हुई थी।हादसों के बाद लंबी-लंबी आरोपी सूची तैयार हुईं। एलडीए ने अफसरों और इंजीनियरों समेत कई लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी। उस समय ऐसा लगा था कि इस बार बड़ी कार्रवाई होगी और जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी। लेकिन वर्षों तक चली जांच के बाद जो नतीजे सामने आए, उन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।

एसएसजे-विराट अग्निकांड: 22 आरोपियों की जांच, लेकिन सजा कितनों को?

19 जून 2018 को चारबाग के होटल एसएसजे में लगी आग ने पड़ोस के होटल विराट को भी अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। एलडीए ने जांच के बाद दो पीसीएस अधिकारियों समेत 22 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी।लेकिन वर्षों बाद आई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन संयुक्त सचिव और पीसीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्र को पूरी तरह बरी कर दिया गया। इसी तरह तत्कालीन संयुक्त सचिव बिरेंद्र कुमार पांडेय को भी किसी प्रकार का दंड नहीं मिला।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बड़ी संख्या में अभियंताओं और अधिकारियों को भी क्लीन चिट मिल गई। जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें अधिकांश सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, जिनकी पेंशन में सिर्फ 3 से 7 प्रतिशत तक की कटौती कर मामला निपटा दिया गया।

एसएसजे-विराट अग्निकांड: कार्रवाई का ब्यौरा

नाम पद कार्रवाई
धनीराम अवर अभियंता (सेवानिवृत्त) पेंशन में 7% कटौती
अनिल कुमार सिंह प्रथम अवर अभियंता (सेवानिवृत्त) पेंशन में 5% कटौती
रविंद्र सिंह अवर अभियंता (सेवानिवृत्त) पेंशन में 5% कटौती
राकेश मोहन अवर अभियंता (सेवानिवृत्त) पेंशन में 3% कटौती

जिन अधिकारियों को बरी किया गया

  • जनार्दन सिंह (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • अरविंद कुमार उपाध्याय (अवर अभियंता)
  • अनिल कुमार मिश्रा (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • लालजी शुक्ला (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • अनिल कुमार सिंह द्वितीय (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • जयवीर सिंह (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • प्रमोद कुमार गुप्ता (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • रविंद्र कुमार श्रीवास्तव (अवर अभियंता)
  • प्रभुनाथ पांडेय (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • प्रमोद कुमार वर्मा (अवर अभियंता)
  • अरुण कुमार सिंह (अधिशासी अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • ओम प्रकाश मिश्रा (अधिशासी अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • वकील अहमद (अधिशासी अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • आलोक रंजन (सहायक अभियंता)
  • ओम प्रकाश गुप्ता (सहायक अभियंता, सेवानिवृत्त)

लेवाना अग्निकांड: चार मौतें, लेकिन आधे आरोपी बरी

4 सितंबर 2022 को होटल लेवाना सुइट्स में लगी आग ने चार लोगों की जान ले ली थी। इस हादसे ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। जांच में एलडीए ने आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया था।लेकिन जांच पूरी होने के बाद इनमें से चार लोगों को पूरी तरह बरी कर दिया गया। जिन चार पर कार्रवाई हुई, उनमें भी दो अधिकारियों का सिर्फ डिमोशन किया गया, एक की पेंशन में मामूली कटौती हुई और एक निलंबित हुआ, जो बाद में बहाल होकर फिर तैनाती पा चुका है।

लेवाना अग्निकांड: कार्रवाई का ब्यौरा

नाम पद कार्रवाई
ओम प्रकाश मिश्रा अधिशासी अभियंता (सेवानिवृत्त) एक वर्ष तक पेंशन में 2% कटौती
जयवीर सिंह अवर अभियंता (सेवानिवृत्त) एक पद की पदावनति
रविंद्र कुमार श्रीवास्तव अवर अभियंता एक पद की पदावनति
जितेंद्र नाथ दुबे अवर अभियंता निलंबन, बाद में बहाल

लेवाना मामले में बरी हुए अधिकारी

  • डॉ. महेंद्र कुमार मिश्रा, पीसीएस (तत्कालीन संयुक्त सचिव, एलडीए)
  • अरुण कुमार सिंह (अधिशासी अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • राकेश मोहन (सहायक अभियंता, सेवानिवृत्त)
  • गणेशी दत्त सिंह (अवर अभियंता, सेवानिवृत्त)

सबसे बड़ा सवाल…

दो बड़े अग्निकांड, 11 मौतें, दर्जनों आरोपी, लंबी जांच और वर्षों तक चली कार्रवाई… लेकिन अंतिम नतीजा क्या निकला? बड़े अधिकारी बरी हो गए, कुछ कर्मचारियों की पेंशन में मामूली कटौती हुई और कुछ को डिमोट कर दिया गया।यही वजह है कि अब अलीगंज अग्निकांड की जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों के मन में आशंका है कि कहीं इस बार भी शुरुआती सख्ती और बड़े-बड़े दावों के बाद कार्रवाई की आग ठंडी न पड़ जाए।क्योंकि लखनऊ के पिछले अग्निकांडों का इतिहास यही बताता है कि हादसों में जान गंवाने वाले परिवार न्याय का इंतजार करते रह गए, जबकि सिस्टम के बड़े जिम्मेदार जांच की भूलभुलैया में खुद को बचाने में सफल रहे।

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