PAK क्रिकेट में बड़ा बदलाव! टेस्ट-T20 के लिए बनेगी अलग टीम, रिजवान-शकील की फिटनेस ने बढ़ाई टेंशन

Editorial
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पाकिस्तान क्रिकेट में एक बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। लगातार खराब प्रदर्शन, खिलाड़ियों पर बढ़ते वर्कलोड और बदलते क्रिकेटिंग दौर को देखते हुए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अब क्रिकेट के तीनों प्रारूपों—टेस्ट, वनडे और टी20—के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ टीमों के गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना को पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य की नई रणनीति माना जा रहा है। हालांकि इसी बीच वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के अहम दौरों से पहले टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ाने वाली खबर भी सामने आई है। टीम के दो सबसे अनुभवी खिलाड़ी मोहम्मद रिजवान और सऊद शकील फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे चयनकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।पीसीबी के वरिष्ठ चयनकर्ता और हाई परफॉर्मेंस सेंटर के प्रमुख आकिब जावेद ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में हर प्रारूप के लिए अलग टीम तैयार करना बोर्ड की प्राथमिकता बन चुकी है। उनका मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों पर लगातार बढ़ते दबाव के कारण सभी प्रारूपों में एक ही खिलाड़ियों पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। टेस्ट क्रिकेट में जहां धैर्य, तकनीक और लंबी मानसिक मजबूती की जरूरत होती है, वहीं टी20 क्रिकेट पूरी तरह आक्रामकता, तेज फैसलों और विस्फोटक बल्लेबाजी पर आधारित है। ऐसे में दोनों प्रारूपों के लिए विशेषज्ञ खिलाड़ियों की अलग टीम तैयार करना समय की मांग बन गया है।इसी रणनीति के तहत पीसीबी नया फॉर्मेट-आधारित सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। नई व्यवस्था में खिलाड़ियों को उनके खेलने वाले प्रारूप के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। सबसे बड़ा फायदा टेस्ट विशेषज्ञ खिलाड़ियों को मिलने वाला है। अब उनका मूल्यांकन केवल टेस्ट क्रिकेटरों के बीच होगा, न कि टी20 या वनडे खिलाड़ियों के साथ तुलना करके।सूत्रों के अनुसार, नई प्रणाली के तहत शीर्ष टेस्ट खिलाड़ियों को हर महीने 40 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। वहीं अन्य खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर 30 से 35 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। टेस्ट और वनडे दोनों खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए अलग श्रेणी होगी, जिसमें वेतन 48 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच सकता है। बोर्ड का मानना है कि इससे उन खिलाड़ियों को न्याय मिलेगा जो सीमित ओवरों की तुलना में कम मैच खेलते हैं लेकिन टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।सिर्फ वेतन ही नहीं, घरेलू क्रिकेट को भी इस नई नीति का अहम हिस्सा बनाया गया है। सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को घरेलू टूर्नामेंट में न्यूनतम भागीदारी अनिवार्य रूप से करनी होगी। टेस्ट खिलाड़ियों को कम से कम छह प्रथम श्रेणी मैच खेलने होंगे, जबकि वनडे और टी20 श्रेणी के खिलाड़ियों को लिस्ट-ए और घरेलू टी20 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना होगा। बोर्ड का मानना है कि इससे घरेलू क्रिकेट मजबूत होगा और राष्ट्रीय टीम के लिए बेहतर प्रतिभाएं तैयार होंगी।

लेकिन इन रणनीतिक बदलावों के बीच पाकिस्तान टीम को एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले मोहम्मद रिजवान और सऊद शकील की फिटनेस चिंता का विषय बन गई है। सऊद शकील हाथ की चोट से परेशान हैं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान भी चोट के कारण लाहौर में चल रहे रेड-बॉल प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा नहीं ले पाए हैं।टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की नजर अब 4 से 5 जुलाई के बीच आने वाली उनकी अंतिम मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हुई है। हालांकि शुरुआती संकेतों से लगता है कि दोनों खिलाड़ियों का समय पर पूरी तरह फिट होना आसान नहीं होगा। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान की टेस्ट टीम को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि दोनों खिलाड़ी हाल के वर्षों में टीम की बल्लेबाजी रीढ़ रहे हैं।संभावित संकट को देखते हुए चयनकर्ताओं ने बैकअप योजना भी तैयार कर ली है। रेड-बॉल कैंप में अब्दुल्ला शफीक, कामरान गुलाम और युवा बल्लेबाज हमजा नज़र को शामिल किया गया है। बोर्ड इन खिलाड़ियों को संभावित विकल्प के रूप में तैयार कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में टीम संतुलन बना रहे।इतना ही नहीं, कप्तान शान मसूद और सलमान अली आगा भी कुछ हल्की फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि उनकी स्थिति गंभीर नहीं है और दोनों खिलाड़ियों के दौरे तक फिट होने की उम्मीद है।पाकिस्तान टीम 13 जुलाई को वेस्टइंडीज दौरे के लिए रवाना होगी, जहां उसे दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। पहला टेस्ट 25 से 29 जुलाई और दूसरा टेस्ट 2 से 6 अगस्त के बीच खेला जाएगा। इसके बाद टीम सीधे इंग्लैंड रवाना होगी, जहां 19 अगस्त से तीन टेस्ट मैचों की चुनौतीपूर्ण सीरीज शुरू होगी।ऐसे में एक तरफ पाकिस्तान क्रिकेट अपने भविष्य को नए ढांचे में ढालने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ वर्तमान टीम की फिटनेस और प्रदर्शन से जुड़ी चुनौतियां उसके सामने खड़ी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि पीसीबी की नई रणनीति पाकिस्तान क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है या फिर यह प्रयोग भी पुराने विवादों और चुनौतियों में उलझकर रह जाता है।

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