सनातन धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने शिवभक्त व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करके भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और हर सोमवार का विशेष महत्व होता है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सावन में सच्चे मन से भगवान शिव का पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। लेकिन शिवलिंग पर पूजा के दौरान क्या अर्पित करना चाहिए और किन चीजों को चढ़ाने से बचना चाहिए, इसकी जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है।
सावन का पौराणिक महत्व
पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।एक अन्य मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने सावन मास में कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए यह महीना दांपत्य सुख और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

सावन में शिवलिंग पर क्या अर्पित करना शुभ माना जाता है?
1. जल
भगवान शिव को सबसे प्रिय अर्पण जल माना गया है। श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. गंगाजल
यदि संभव हो तो जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे पूजा का फल और अधिक शुभ माना जाता है।
3. बेलपत्र
बेलपत्र भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माना जाता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शुभ माना जाता है। अर्पित करने से पहले यह देख लें कि पत्तियां टूटी या खंडित न हों।
4. धतूरा और आक के फूल
शिवजी को धतूरा और आक के फूल भी प्रिय माने जाते हैं। इन्हें श्रद्धा से अर्पित करने की परंपरा है।
5. भस्म
भस्म वैराग्य और जीवन की नश्वरता का प्रतीक मानी जाती है। शिव पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
6. सफेद चंदन
सफेद चंदन का तिलक भगवान शिव को अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे शीतलता और पवित्रता का भाव जुड़ा हुआ है।
7. कच्चा दूध
कई श्रद्धालु शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करते हैं। यदि दूध अर्पित करें तो संयम और श्रद्धा का भाव रखें तथा स्थानीय मंदिर की परंपराओं का सम्मान करें।
8. शहद, दही और पंचामृत
रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक किया जाता है।
सावन में शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित नहीं की जातीं।
हल्दी
हल्दी का उपयोग सामान्यतः सौभाग्य और स्त्री-सौंदर्य से जुड़ा माना जाता है। कई परंपराओं में इसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता।
तुलसी दल
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। अधिकांश धार्मिक परंपराओं में शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
केतकी का फूल
शिव पुराण की कथा के अनुसार केतकी के फूल को शिव पूजा में वर्जित माना गया है।
टूटे या सूखे बेलपत्र
खंडित, फटे या सूखे बेलपत्र अर्पित नहीं करने चाहिए।
बासी फूल
भगवान को हमेशा ताजे और स्वच्छ फूल अर्पित करें।

सावन सोमवार का विशेष महत्व
सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा का विशेष फल बताया गया है। इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करते हैं।
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से—
- वैवाहिक जीवन में सुख आता है।
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- परिवार में शांति बनी रहती है।
- आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
- मानसिक तनाव कम होता है।
सावन में पूजा की सरल विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल को साफ करें।
शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें।
बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें।
अंत में भगवान शिव की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
सावन में करें ये शुभ कार्य
- जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।
- पौधारोपण करें।
- गौसेवा करें।
- जल संरक्षण का संकल्प लें।
- मंदिर की स्वच्छता में सहयोग करें।
- क्रोध, अहंकार और कटु वाणी से बचें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
पूजा केवल सामग्री से नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था से पूर्ण होती है। यदि किसी कारणवश सभी पूजन सामग्री उपलब्ध न हो, तो केवल स्वच्छ जल और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भी भगवान शिव की आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।विभिन्न क्षेत्रों, मंदिरों और परंपराओं में पूजा-विधि और अर्पण की मान्यताओं में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय धार्मिक परंपराओं और मंदिर के नियमों का सम्मान करना उचित है।
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