CJP को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! X अकाउंट बहाल करने का आदेश, केंद्र का ब्लॉकिंग फैसला रद्द

Editorial
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सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ नाम से चल रहे सोशल मीडिया अभियान के X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का आदेश देते हुए केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत इस अकाउंट को भारत में ब्लॉक किया गया था।दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर नागरिकों के अधिकारों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अदालत ने साफ कहा कि किसी सोशल मीडिया अकाउंट को केवल आशंका के आधार पर ब्लॉक नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्पष्ट, ठोस और तत्काल खतरे का होना जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह अभियान पिछले कुछ महीनों में काफी चर्चा में रहा। यह एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान है, जो शिक्षा, राजनीति और सरकारी नीतियों सहित कई सामाजिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी करता रहा है।इस अभियान के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके X अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था।मंगलवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार का ब्लॉकिंग आदेश रद्द कर दिया और अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया।

सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि यह अकाउंट उस समय ब्लॉक किया गया था जब देशभर में NEET परीक्षा को लेकर विवाद और तनाव का माहौल था।सरकार का तर्क था कि अकाउंट पर साझा की जा रही सामग्री से गलत सूचना फैल सकती थी, जिससे छात्रों में भ्रम पैदा होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। इसी कारण अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक करना जरूरी समझा गया।सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि उस समय परीक्षा दोबारा आयोजित होने की संभावना और उससे जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया था।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील क्यों खारिज की?

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जिस आधार पर अकाउंट को ब्लॉक किया गया था, वह परिस्थिति अब समाप्त हो चुकी है।कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि NEET परीक्षा को लेकर सरकार की चिंता अब प्रासंगिक नहीं रह गई है, इसलिए उस आधार पर किसी सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध जारी नहीं रखा जा सकता।अदालत ने कहा कि भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है। इस अधिकार पर प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है जब कोई वास्तविक, ठोस और तात्कालिक खतरा मौजूद हो। केवल आशंका या संभावना के आधार पर किसी नागरिक की आवाज को दबाना उचित नहीं माना जा सकता।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया आज लोकतांत्रिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। नागरिकों को सरकार की नीतियों की आलोचना करने, व्यंग्य करने और अपने विचार व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है।अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर नियंत्रण के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग अत्यंत सावधानी और सीमित परिस्थितियों में करना चाहिए। यदि कोई स्पष्ट खतरा नहीं है, तो केवल असहमति या आलोचना के कारण किसी अकाउंट को ब्लॉक नहीं किया जा सकता।

क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक व्यंग्यात्मक और डिजिटल अभियान है।यह अभियान 15 मई को उस समय चर्चा में आया था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश की कुछ टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई थी। इसके बाद इस अभियान ने शिक्षा व्यवस्था, NEET परीक्षा, युवाओं की समस्याओं और सरकारी नीतियों से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।21 मई को इसका मूल X अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। इसके बाद अभियान से जुड़े लोगों ने ‘Cockroach Is Back’ नाम से नया अकाउंट शुरू किया, जिसने कुछ ही समय में लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वर्तमान में इस अकाउंट के दो लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं।

NEET और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चलाया अभियान

इस अभियान ने विशेष रूप से NEET-2026 से जुड़े कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए। अभियान से जुड़े लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने का दावा किया।

फैसले का क्या होगा असर?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार को किसी ऑनलाइन अकाउंट को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई करते समय संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि प्रतिबंध केवल वास्तविक और तात्कालिक खतरे की स्थिति में ही उचित ठहराया जा सकता है।फिलहाल अदालत के आदेश के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के X अकाउंट को बहाल करने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले को डिजिटल अधिकारों, लोकतांत्रिक संवाद और ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

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