मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित मार्वल स्टेडियम में गुरुवार को ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रवासी भारतीयों के उत्साह को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में करीब 30 हजार प्रवासी भारतीय स्टेडियम में जुटे और पूरा माहौल भारत माता की जय, वंदे मातरम् और मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठा। प्रधानमंत्री मोदी अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।कार्यक्रम के दौरान उस समय भावुक और यादगार पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री मोदी ने वहां मौजूद लोगों से अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह किया। देखते ही देखते पूरा मार्वल स्टेडियम हजारों रोशनियों से जगमगा उठा। यह दृश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते रिश्तों और प्रवासी भारतीयों के उत्साह का प्रतीक बन गया।अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सुरक्षा नीति, वैश्विक भूमिका और विकास यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि निर्णायक कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकी ठिकानों पर हुए प्रहारों की गूंज पूरी दुनिया ने सुनी।प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर का डेमो तो आपने देखा ही होगा। धमाके आतंकियों के ठिकानों पर हो रहे थे, लेकिन उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी। आतंक के खिलाफ भारत की इस कार्रवाई पर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। लेकिन भारत यहीं रुकने वाला नहीं है। भारत का मंत्र है—ग्रो मोर, ग्रो मोर।“प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत दुनिया में नई सोच, नई ऊर्जा और नई क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अब दुनिया भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद साझेदार और वैश्विक समाधान देने वाले देश के रूप में देख रही है।प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला भारतीय अपनी मेहनत, ईमानदारी और संस्कारों से भारत की पहचान को मजबूत करता है। उन्होंने भारतीय समुदाय की तुलना दूध में घुलने वाली चीनी से करते हुए कहा, “हम भारतीय ऐसे हैं जैसे दूध में चीनी घुल जाती है और उसे और मीठा बना देती है। जहां भी जाते हैं, वहां अपने संस्कार, अपनापन और प्रेम का रंग घोल देते हैं। घर में दूध ऑस्ट्रेलिया का हो सकता है, लेकिन चाय भारत वाली ही बनती है।”प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि भारत में आजकल ‘भजन क्लबिंग‘ का नया ट्रेंड चल रहा है और यह देखकर खुशी होती है कि ऑस्ट्रेलिया में भी सप्ताहांत पर कहीं सत्यनारायण कथा होती है, कहीं गुरुद्वारों में अरदास, कहीं भरतनाट्यम की प्रस्तुति तो कहीं भांगड़ा और क्रिकेट के आयोजन होते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की मानवीय नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जब किसी देश की मदद करता है तो वहां के लोगों का पासपोर्ट नहीं देखता। उन्होंने वेनेजुएला में आए भूकंप के बाद चलाए गए ऑपरेशन अमिस्ताद और तुर्किये-सीरिया में भूकंप के दौरान भारत द्वारा भेजी गई राहत सामग्री और बचाव दल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का उद्देश्य हमेशा मानवता की सेवा रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत की पहचान केवल आर्थिक शक्ति से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से भी है। जब दुनिया संकट में होती है तो भारत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाता है। यही कारण है कि आज दुनिया भारत पर पहले से कहीं अधिक भरोसा करती है।”शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज हजारों भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वहीं अब ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियां भी भारत में अपने कैंपस स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डीकिन यूनिवर्सिटी और वोलोंगोंग यूनिवर्सिटी ने भारत में अपने परिसर शुरू कर दिए हैं और अन्य संस्थान भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वर्ष 2014 के पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे को याद करते हुए कहा कि उस समय लगभग 28 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। उन्होंने कहा कि तब उन्होंने वादा किया था कि अगली बार भारत के प्रधानमंत्री के आने के लिए 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आज पिछले 12 वर्षों में यह उनकी ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है, जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों के रिश्ते कितनी तेजी से नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा हितों और भविष्य की साझेदारी पर आधारित हैं। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, तकनीक, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर नए अवसरों का निर्माण कर रहे हैं।कार्यक्रम में विक्टोरिया राज्य की प्रीमियर जेसिंटा एलन ने भी प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विक्टोरिया भारतीय समुदाय का सम्मान करता है और भारत के साथ उसके संबंध केवल व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने भारतीय नागरिकों और निवेशकों को विक्टोरिया आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर भविष्य की नई साझेदारी का निर्माण कर रहे हैं।मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सामुदायिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा, प्रवासी भारतीयों की ताकत और भारत-ऑस्ट्रेलिया की मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का सशक्त प्रदर्शन बन गया। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आत्मविश्वास, विकास, सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व की नई पहचान के साथ दुनिया के सामने खड़ा है।
read on:https://news7hindi.com/from-uranium-to-defense-corridor-historic-meeting-of-modi-albanese/
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

