12% अल्कोहल वाली दवा पर नया नियम! बिना पर्ची नहीं मिलेगी सिरप

Editorial
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नई दिल्ली अगर आप भी मेडिकल स्टोर से खांसी की सिरप या ऐसी कोई दवा आसानी से खरीद लेते हैं, जिसमें अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है, तो आपके लिए यह खबर बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसी दवाएं जिनमें 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) मौजूद है, उन्हें बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदना आसान नहीं होगा।स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स (दसवां संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह नया नियम सरकारी गजट में प्रकाशित होने के छह महीने बाद लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य ऐसी दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अब मेडिकल स्टोर पर दिखानी होगी डॉक्टर की पर्ची

नए नियमों के अनुसार, 30 मिलीलीटर से ज्यादा पैकिंग और 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल वाली सभी ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 श्रेणी में शामिल किया गया है।इसका सीधा मतलब है कि अब इन दवाओं को खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।यानी अब पहले की तरह कोई भी व्यक्ति मेडिकल दुकान से ऐसी दवाएं सीधे खरीदकर नहीं ले सकेगा। दवा विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि दवा केवल अधिकृत व्यक्ति को और सही चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही दी जाए।

सरकार ने क्यों उठाया बड़ा कदम?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कई ऐसी दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं जिनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा काफी अधिक होती है। इनका इस्तेमाल इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन ज्यादा अल्कोहल होने के कारण इनके गलत उपयोग की आशंका भी बनी रहती है।सरकार को चिंता थी कि कुछ लोग इन दवाओं का इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के बजाय नशे के उद्देश्य से कर सकते हैं।इसी वजह से अब इन दवाओं को कड़े नियमन के दायरे में लाया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से दवाओं की निगरानी बेहतर होगी और इनके दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी।

टिंचर और आयुर्वेदिक दवाओं पर भी सख्ती

इस नए बदलाव का असर कुछ ऐसी आयुर्वेदिक और हर्बल दवाओं पर भी पड़ेगा, जिनमें अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है।पहले कुछ दवाओं जैसे इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित टिंचर को शेड्यूल-K के तहत कुछ छूट मिली हुई थी। इन उत्पादों में कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल पाया जाता है।हालांकि, सरकार और कुछ राज्यों ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि इनका इस्तेमाल कई जगहों पर इलाज के बजाय गलत उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।अब नए नियमों के बाद 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल और 30 मिलीलीटर से ज्यादा पैकिंग वाली ऐसी दवाओं के निर्माण और बिक्री के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस और नियमों का पालन जरूरी होगा।

कफ सिरप पर भी बढ़ी निगरानी

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने सिरप और लिक्विड दवाओं को लेकर सख्ती दिखाई है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने कफ सिरप समेत कई ओरल लिक्विड दवाओं की बिक्री को लेकर नियम कड़े किए थे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जून 2026 में एक अधिसूचना जारी कर बताया था कि कई सिरप वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं बेची जा सकेंगी।इसके पीछे मुख्य वजह दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और गलत इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताएं थीं। खासकर बच्चों और कमजोर स्वास्थ्य वाले मरीजों के मामले में सरकार ज्यादा सतर्कता बरत रही है।

मरीजों को दिक्कत नहीं होगी: सरकार

सरकार का कहना है कि इस बदलाव से उन मरीजों को परेशानी नहीं होगी, जिन्हें वास्तव में इन दवाओं की जरूरत है। डॉक्टर की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ये दवाएं पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी।मंत्रालय के अनुसार, यह कदम दवाओं की उपलब्धता रोकने के लिए नहीं बल्कि उनके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।सरकार का उद्देश्य है कि दवाएं केवल सही मरीजों तक पहुंचें और उनका इस्तेमाल किसी भी गलत उद्देश्य के लिए न हो।

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

अब अगर कोई व्यक्ति मेडिकल स्टोर से ऐसी सिरप या लिक्विड दवा खरीदने जाता है जिसमें अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है, तो उसे डॉक्टर की पर्ची दिखानी पड़ सकती है।मेडिकल दुकानदारों को भी अब ऐसी दवाओं की बिक्री को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। बिना रिकॉर्ड और बिना नियमों के बिक्री करने पर कार्रवाई हो सकती है।

दवा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दवाओं में मौजूद अल्कोहल की मात्रा और उनके इस्तेमाल पर नियंत्रण जरूरी है। खासकर ऐसी दवाएं जिनमें अल्कोहल ज्यादा होता है, उनके गलत इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।केंद्र सरकार का यह फैसला दवा नियमन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब आने वाले समय में देखना होगा कि नए नियम लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर्स और दवा कंपनियां किस तरह इसका पालन करती हैं।यानी अब दवा खरीदने से पहले सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह भी जरूरी होगी। सरकार का साफ संदेश है—दवा इलाज के लिए है, गलत इस्तेमाल के लिए नहीं।

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