लखनऊउत्तर प्रदेश की मिट्टी से निकलकर देश की राजनीति के सबसे ऊंचे शिखर तक पहुंचने वाला नाम… एक ऐसा नाम, जिसे सत्ता पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष भी सम्मान की नजर से देखता है… सियासत के मैदान में जहां अक्सर तल्ख बयान, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक टकराव सुर्खियां बनते हैं, वहीं एक चेहरा ऐसा भी है जिसने अपनी सादगी, संयम और मर्यादित राजनीति से अलग पहचान बनाई… नाम है राजनाथ सिंह।आज जब देश उनके जन्मदिन के मौके पर उन्हें याद कर रहा है, तो नजर जाती है उस लंबे और शानदार राजनीतिक सफर पर, जिसने एक साधारण किसान परिवार के बेटे को देश के रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचाया। राजनाथ सिंह की कहानी सिर्फ सत्ता के गलियारों तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन, विचारधारा और अटूट राष्ट्रसेवा की ऐसी दास्तान है, जिसे भारतीय राजनीति में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

सियासत में अलग पहचान बनाने वाला चेहरा
राजनाथ सिंह उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी राजनीति में आक्रामकता से ज्यादा भरोसा संवाद और संतुलन पर रहा है। उन्होंने अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन अपनी कार्यशैली में संयम और शालीनता को हमेशा बनाए रखा।उनकी खासियत रही कि वे विरोधियों पर हमला भी करते हैं तो भाषा की मर्यादा नहीं छोड़ते। यही वजह है कि उन्हें भारतीय राजनीति का ‘अजातशत्रु’ कहा जाता है। पार्टी की विचारधारा के प्रति मजबूती से खड़े रहने के साथ-साथ उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संवाद बनाए रखा।राजनाथ सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की बनी, जो मुश्किल हालात में रास्ता निकालने की क्षमता रखते हैं। संसद से लेकर संगठन तक, हर जिम्मेदारी को उन्होंने अपने अनुभव और सूझबूझ के साथ निभाया।

किसान परिवार से शुरू हुआ सफर
राजनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के भभोरा गांव में एक किसान परिवार में हुआ। ग्रामीण परिवेश से आने वाले राजनाथ सिंह ने बचपन से ही मेहनत, अनुशासन और संघर्ष को करीब से देखा।शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने भौतिक विज्ञान में परास्नातक किया और शिक्षक के रूप में भी काम किया। लेकिन उनके मन में देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने का जज्बा था। यही जुनून उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर सामाजिक और राजनीतिक जीवन की ओर ले गया।यहीं से शुरू हुई उनकी वह यात्रा, जिसने आगे चलकर उन्हें उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया।

आपातकाल ने बनाया संघर्ष का योद्धा
राजनाथ सिंह का राजनीतिक सफर आसान नहीं था। साल 1975 में जब देश में आपातकाल लगाया गया, तब लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठी आवाजों में उनका नाम भी शामिल था।जेपी आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 18 महीने तक जेल में रहना पड़ा। लेकिन इस संघर्ष ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को और मजबूत बनाया।आपातकाल के बाद जब देश में राजनीतिक बदलाव आया, तो जनता ने संघर्ष करने वाले नेताओं को आगे बढ़ाया। साल 1977 में राजनाथ सिंह पहली बार विधानसभा पहुंचे और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा ने नई गति पकड़ी।

उत्तर प्रदेश की कमान से राष्ट्रीय राजनीति तक
साल 2000 में राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उस दौर में उन्होंने प्रशासनिक फैसलों और संगठनात्मक क्षमता के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों के लिए याद किया जाता है। इसके बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में और बड़ी होती गई।वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2005 में पहली बार और फिर 2013 में दूसरी बार उन्होंने पार्टी की कमान संभाली।

2014 की राजनीति में निभाई बड़ी भूमिका
2013 का दौर भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का समय था। देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही थी और भाजपा नए नेतृत्व की तलाश में थी।उस समय राजनाथ सिंह की राजनीतिक समझ और दूरदर्शिता सामने आई। उन्होंने नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद देश की राजनीति ने एक नया मोड़ लिया।2014 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद राजनाथ सिंह को देश का गृहमंत्री बनाया गया। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर काम किया। इसके बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।
देश की सुरक्षा के प्रहरी
रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भर रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा पर जोर दिया। चाहे चीन सीमा पर तनाव का दौर हो या देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की चुनौती, उन्होंने हर मोर्चे पर सरकार की रणनीति को आगे बढ़ाया।उनकी राजनीति में एक तरफ जहां विचारधारा की मजबूती दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत और संतुलन की कला भी नजर आती है।
एक लंबी राजनीतिक विरासत
राजनाथ सिंह का सफर इस बात की मिसाल है कि राजनीति में धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर लंबा सफर तय किया जा सकता है। किसान परिवार से निकलकर देश के रक्षा मंत्री तक पहुंचना किसी उपलब्धि से कम नहीं है।आज उनके जन्मदिन पर देश उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद कर रहा है, जिसने सत्ता को सिर्फ पद नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखा।राजनाथ सिंह की कहानी बताती है कि राजनीति में असली पहचान सिर्फ कुर्सी से नहीं बनती, बल्कि व्यवहार, संघर्ष और जनता के विश्वास से बनती है। यही वजह है कि दशकों की राजनीतिक यात्रा के बाद भी उनका नाम सम्मान और भरोसे के साथ लिया जाता है।
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