दुनिया में एक ही दिन तीन ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। अफ्रीकी देश नाइजीरिया में अंतिम संस्कार के दौरान हुई अंधाधुंध गोलीबारी ने जहां आठ लोगों की जान ले ली, वहीं यूरोप में फ्रांस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि जब तक तेहरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में कोई राहत नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, भारतीय मूल के अमेरिकी अरबपति विनोद खोसला ने लगभग 80,740 करोड़ रुपये में अमेरिकी फुटबॉल टीम खरीदकर इतिहास रच दिया।
नाइजीरिया में मातम के बीच गोलियों की गूंज, 8 लोगों की मौत
अफ्रीकी देश नाइजीरिया के बेन्यू राज्य में रविवार तड़के उस समय चीख-पुकार मच गई, जब एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में हथियारबंद हमलावर ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए थे, तभी हमलावर ने बिना किसी चेतावनी के गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।इस हमले में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और हमलावर की तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल हमले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि, बेन्यू राज्य लंबे समय से चरवाहों और किसानों के बीच हिंसक संघर्ष का केंद्र रहा है। पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में हिंसा की कई घटनाओं में करीब 150 लोगों की जान गई थी।

ईरान पर फ्रांस का सख्त संदेश, ‘परमाणु कार्यक्रम नहीं रुका तो नहीं हटेंगे प्रतिबंध’
इधर, यूरोप में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं करता, तब तक उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने का कोई सवाल नहीं उठता।उन्होंने कहा कि फ्रांस किसी भी संभावित समझौते का समर्थन तभी करेगा, जब अमेरिका, इजरायल और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान हो जाएगा।वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने फ्रांस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान ने हर बातचीत में जिम्मेदारी और सद्भावना दिखाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपने वादों का पालन नहीं करता, तो ईरान भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जारी रहता है तो मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।
भारतीय मूल के विनोद खोसला ने रचा इतिहास, 80,740 करोड़ रुपये में खरीदी अमेरिकी फुटबॉल टीम
इसी बीच कारोबारी दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आई। भारत में जन्मे अमेरिकी अरबपति विनोद खोसला के नेतृत्व वाले निवेशक समूह ने अमेरिकी नेशनल फुटबॉल लीग (NFL) की टीम सिएटल सीहॉक्स को खरीदने के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा करीब 9.612 अरब डॉलर (लगभग 80,740 करोड़ रुपये) में हुआ है। इसे NFL के इतिहास का सबसे बड़ा टीम अधिग्रहण माना जा रहा है।समूह ने इस खरीद के लिए माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल जी. एलन के परिवार के साथ औपचारिक बिक्री समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
आईआईटी दिल्ली से सिलिकॉन वैली तक का सफर
विनोद खोसला का जन्म वर्ष 1955 में पुणे में हुआ था। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।साल 1982 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर सन माइक्रोसिस्टम्स की स्थापना की, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे सफल टेक उद्यमियों में शामिल कर दिया।
दुनिया के तीन बड़े संदेश
एक तरफ नाइजीरिया में हिंसा ने मानवता को झकझोर दिया, दूसरी ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक कूटनीति फिर गरमा गई। वहीं, भारतीय मूल के विनोद खोसला की ऐतिहासिक कारोबारी उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि भारतीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। तीनों घटनाएं अपने-अपने क्षेत्र में दुनिया की बदलती तस्वीर और नई चुनौतियों का संकेत देती हैं।
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