जन्मदिन से एक दिन पहले बुझ गई कशिश की जिंदगी! 80 गार्ड, 88 CCTV के बीच अस्पताल में 10 मिनट में कत्ल

Editorial
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पीलीभीत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिस बेटी के घर में आज जन्मदिन की खुशियां मनाने की तैयारियां होनी थीं, वहां मातम पसरा है। 20 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल की उसके ही साथी छात्र ने जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में चाकू से हमला कर हत्या कर दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात महज 10 मिनट के भीतर अंजाम दे दी गई, जबकि अस्पताल परिसर में 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी और 88 सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे। इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।

जन्मदिन से 24 घंटे पहले उजड़ गया परिवार

15 जुलाई कशिश का जन्मदिन था। परिवार ने बेटी के साथ खुशियां मनाने की तैयारी की थी, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले उसकी हत्या ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। 20 साल पूरे कर 21वें वर्ष में कदम रखने वाली कशिश अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।जिस घर में जन्मदिन का केक कटना था, वहां अब सिर्फ चीखें और आंसू हैं। मां-बाप की आंखों के सामने बेटी के सभी सपने पलभर में टूट गए।

10 मिनट में रची गई खौफनाक साजिश

पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी छात्र सागर सिंह, निवासी मडेवा (कानपुर नगर), मंगलवार सुबह अस्पताल पहुंचा। वह चाकू लेकर अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ और बिना किसी रोक-टोक के सीटी स्कैन कक्ष तक पहुंच गया।बताया जा रहा है कि उसने दो बार सीटी स्कैन रूम के आसपास चक्कर लगाए। इसके बाद मौका मिलते ही कशिश पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। पूरी वारदात महज 10 मिनट के भीतर पूरी हो गई।हमले के दौरान मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले कशिश खून से लथपथ जमीन पर गिर चुकी थी।

80 गार्ड और 88 CCTV… फिर भी कैसे हुआ कत्ल?

सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहा है।जिला अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। मुख्य प्रवेश द्वार, इमरजेंसी, ओपीडी, दवा काउंटर, डॉक्टरों के कक्ष और सीटी स्कैन यूनिट जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा का दावा किया जाता है।इसके अलावा पूरे अस्पताल परिसर में 88 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। कैमरों की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां दो सुपरवाइजर चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं।इसके बावजूद आरोपी चाकू लेकर अस्पताल में घुस गया, कई मिनट तक घूमता रहा और किसी को उसकी गतिविधियां संदिग्ध नहीं लगीं। न किसी ने उसे रोका और न ही समय रहते सुरक्षा कर्मियों को भनक लगी।यही वजह है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

अस्पताल में मची अफरा-तफरी

जैसे ही सीटी स्कैन कक्ष से चीखने की आवाज आई, अस्पताल में भगदड़ मच गई।सुरक्षाकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया। कशिश खून से लथपथ पड़ी थी और उसके गले से लगातार खून बह रहा था।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खून का फव्वारा निकल रहा था, जिसे देखकर मरीज, तीमारदार और अस्पताल कर्मचारी दहशत में आ गए।कशिश को तुरंत इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

दो घंटे तक अस्पताल में हड़कंप

वारदात के बाद पूरे जिला अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। ओपीडी की व्यवस्था प्रभावित हो गई और करीब दो घंटे तक मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।सीटी स्कैन यूनिट से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक पुलिस और सुरक्षाकर्मियों का पहरा लगा रहा। अस्पताल परिसर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।

आरोपी मौके से गिरफ्तार

हमले के तुरंत बाद अस्पताल में मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी छात्र सागर सिंह को पकड़ लिया।पुलिस ने उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया।मृतका के पिता रोहताश पटेल की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या की असली वजह क्या थी। शुरुआती जांच में दोनों के बीच किसी विवाद की बात सामने आई है, लेकिन पूरे मामले की जांच जारी है।

‘दिन-रात गाड़ी चलाकर बेटी को पढ़ाया’

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पिता रोहताश पटेल की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

उन्होंने कहा,

“मेरी बेटी बहुत होनहार थी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में 80 प्रतिशत अंक लाए थे। उसे आगे बढ़ाने के लिए मैंने दिन-रात गाड़ी चलाई। खुद की इच्छाएं छोड़ दीं, लेकिन बेटी की पढ़ाई नहीं रुकने दी।”

उन्होंने बताया कि परिवार के पास सिर्फ आठ बीघा खेती है और वह निजी वाहन चलाकर घर का खर्च उठाते हैं।सरकारी कॉलेज में चयन होने के बाद कशिश का दाखिला पीलीभीत में सीटी स्कैन टेक्नोलॉजी कोर्स में कराया गया था। परिवार चाहता था कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा नाम कमाए, लेकिन एक झटके में सारे सपने बिखर गए।

पहले भी उठते रहे सुरक्षा पर सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो।इससे पहले अस्पताल परिसर में बाइक चोरी, मारपीट और नवजात के शव को कुत्ते द्वारा उठा ले जाने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।हालांकि अस्पताल परिसर के भीतर इस तरह की दिनदहाड़े हत्या पहली बार हुई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

अब जांच और कार्रवाई पर सबकी नजर

पोस्टमार्टम के बाद कशिश का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे गांव में शोक की लहर है।पुलिस अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल में 80 सुरक्षाकर्मी, 88 सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम मौजूद था, तब आखिर एक छात्र चाकू लेकर अंदर कैसे पहुंच गया?कशिश की हत्या ने सिर्फ एक परिवार से उसकी बेटी नहीं छीनी, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश की नजर इस बात पर है कि दोषियों को कितनी जल्दी और कितनी सख्त सजा मिलती है, ताकि भविष्य में किसी और बेटी की जिंदगी इस तरह बेरहमी से न छीनी जाए।

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