राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा उलटफेर? चंपत राय से बंद कमरे में मिले गोविंद देवगिरी, पहली मुलाकात से बढ़ा सस्पेंस!

Editorial
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अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने तीर्थ क्षेत्र भवन में बंद कमरे में मुलाकात की। चंपत राय के महासचिव पद छोड़ने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात मानी जा रही है। ऐसे समय में हुई यह बैठक कई सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि इससे ठीक पहले चंपत राय ने एक विस्तृत पत्र जारी कर एसआईटी जांच पूरी होने तक चुप्पी साधने और उसके बाद सभी सवालों के जवाब देने की बात कही थी।सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट दान पेटी से कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर लगातार सुर्खियों में है। छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में भी चंपत राय शामिल नहीं हुए थे। उनकी गैरमौजूदगी और उसके बाद जारी पत्र ने पहले ही कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया था। अब गोविंद देवगिरी के साथ हुई यह बंद कमरे की बैठक पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चाओं के केंद्र में ले आई है।

इससे पहले चंपत राय ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ते हुए एक पत्र के जरिए कई अहम दावे किए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपना काम पूरा कर ले, उसके बाद वह सभी सवालों का विस्तार से जवाब देंगे। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि उनका पत्र जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए, ताकि उनकी बात भी आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके।अपने पत्र में चंपत राय ने पूरे विवाद की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य रहे डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कार्यप्रणाली पर डालते हुए कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दान की गणना प्रक्रिया के लिए 6 फरवरी 2025 को जो दिशा-निर्देश जारी किए गए, उनसे वह पूरी तरह असहमत थे। उनके अनुसार इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं, लेकिन उनसे न तो राय ली गई और न ही हस्ताक्षर कराए गए।

चंपत राय ने पत्र में लिखा कि उन्हें इस दिशा-निर्देश की जानकारी कई महीनों बाद 13 जून को ट्रस्ट के लेखा कार्यालय से मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि अगस्त 2020 से लेकर जून 2025 तक ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के बीच हुए लगभग सभी महत्वपूर्ण समझौतों पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज पर उन्हें पूरी तरह अलग रखना आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस समय वह अयोध्या से बाहर थे तो उनके लौटने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।पूर्व महासचिव ने अपने पत्र में 9 फरवरी 2024 को ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रत्येक पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं और इसमें दान की गणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे, लोहे की जाली वाले सुरक्षा द्वार और निगरानी के कई प्रावधान शामिल किए गए थे। ऐसे में यदि बाद में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव हुआ या नए दिशा-निर्देश बनाए गए तो उनसे बिना चर्चा किए ऐसा क्यों किया गया, यह जांच का विषय होना चाहिए।चंपत राय के इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे ट्रस्ट के भीतर मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एसआईटी की जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल ट्रस्ट या एसआईटी की ओर से इस वायरल पत्र की आधिकारिक पुष्टि या टिप्पणी नहीं की गई है।बुधवार सुबह गोविंद देवगिरी और चंपत राय के बीच हुई मुलाकात को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से बैठक में हुई बातचीत का कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि यह मुलाकात ट्रस्ट में चल रहे घटनाक्रम, एसआईटी जांच और भविष्य की रणनीति से जुड़ी हो सकती है। चूंकि बैठक बंद कमरे में हुई, इसलिए इसकी गोपनीयता ने भी उत्सुकता बढ़ा दी है।गौरतलब है कि हाल के दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट में कई बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हैं। महासचिव पद पर नए दायित्व तय किए गए हैं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं। ऐसे में पूर्व महासचिव और वर्तमान कोषाध्यक्ष की यह पहली मुलाकात स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में आ गई है।अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच पर टिकी हैं। जांच एजेंसी चढ़ावा गणना, बैंकिंग प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं चंपत राय पहले ही संकेत दे चुके हैं कि जांच पूरी होने के बाद वह सार्वजनिक रूप से हर सवाल का जवाब देंगे।फिलहाल यह मामला केवल राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देशभर की निगाहें इस जांच और उससे निकलने वाले निष्कर्षों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट और ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि इस पूरे विवाद की सच्चाई क्या है और इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।

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