नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। संजय सिंह ने कहा कि सरकार को अनशनकारी की बात सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।संजय सिंह ने दावा किया कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे और उनका आंदोलन युवाओं से जुड़े मुद्दों तथा कथित पेपर लीक मामलों को लेकर था। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक अनशन चलने के बावजूद सरकार की ओर से संवाद की कोई गंभीर पहल नहीं हुई।
’21 दिन तक नहीं हुई बातचीत’
संजय सिंह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर अनशन करता है, तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह उससे संवाद करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया।उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते वार्ता करती, तो स्थिति इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
जंतर-मंतर की कार्रवाई पर उठाए सवाल
आप सांसद ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। उनके अनुसार, सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाया गया।संजय सिंह ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार भी सीमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असहमति को बलपूर्वक दबाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान तलाशा जाना चाहिए।
‘संसद मार्च से सरकार घबरा गई’
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने संसद सत्र की शुरुआत के अवसर पर 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया था। उनका दावा है कि सरकार को आशंका थी कि यह आंदोलन बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर फैसले लिए गए। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से इस बयान में कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
युवाओं के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना
संजय सिंह ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और इसी मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को नियंत्रित करने पर अधिक ध्यान दिया गया।उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की मांगों को लगातार अनसुना किया गया, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
युवाओं से एकजुट रहने की अपील
आप सांसद ने युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है।साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को भी विरोध को टकराव की तरह देखने के बजाय संवाद के अवसर के रूप में लेना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
सोनम वांगचुक को लेकर हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र के दौरान यह मुद्दा विपक्ष की ओर से प्रमुखता से उठाया जा सकता है।
अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर
फिलहाल इस पूरे मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच आगे किसी प्रकार का संवाद स्थापित होता है या नहीं।आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

