लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सुबह 10:30 बजे लोकभवन में होने वाली इस बैठक में 20 से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है। इनमें सबसे अधिक चर्चा दो नए एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को लेकर है, जो प्रदेश के पूर्वी और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा दे सकती हैं।सरकार का लक्ष्य प्रदेश में बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार कर औद्योगिक निवेश, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। ऐसे में इस बैठक में लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
- विंध्य एक्सप्रेसवे को मिल सकती है हरी झंडी
- विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर भी फैसला संभव
- आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने की तैयारी
- कई विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्ताव एजेंडे में
- मानसून सत्र बुलाने पर भी लग सकती है मुहर
- हंगामेदार हो सकता है मानसून सत्र
- प्रदेश के विकास की दिशा तय कर सकती है बैठक
विंध्य एक्सप्रेसवे को मिल सकती है हरी झंडी
कैबिनेट में जिन प्रस्तावों पर सबसे अधिक ध्यान है, उनमें प्रयागराज से सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे शामिल है। लगभग 330 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी मिलने की संभावना है।यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके बनने से प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिलों के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही खनन, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर भी फैसला संभव
कैबिनेट बैठक में 117 किलोमीटर लंबे विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी मिल सकती है। यह लिंक एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़कर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा।सरकार का मानना है कि इस परियोजना से पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के बीच यात्रा का समय कम होगा तथा माल परिवहन भी तेज और आसान बनेगा। इससे निवेशकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने की तैयारी
बैठक में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे से संबंधित प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया जा सकता है। इसके साथ ही कई सड़क परियोजनाओं के ईपीसी (Engineering, Procurement and Construction) मॉडल के तहत निर्माण के लिए विकासकर्ता के चयन संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखे जाएंगे।यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा। इससे लंबी दूरी की यात्रा आसान होने के साथ-साथ औद्योगिक गलियारों को भी फायदा मिलेगा।
कई विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्ताव एजेंडे में
कैबिनेट बैठक में केवल सड़क परियोजनाएं ही नहीं बल्कि कई अन्य विभागों से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल किए गए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- महिला कल्याण विभाग
- सचिवालय प्रशासन
- गृह विभाग
- उच्च शिक्षा विभाग
- राज्य कर एवं परिवहन विभाग
- स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग
- सहकारिता विभाग
से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। इन प्रस्तावों का सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, राजस्व और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है।
मानसून सत्र बुलाने पर भी लग सकती है मुहर
सूत्रों के अनुसार कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की तारीखों पर भी फैसला लिया जा सकता है। संभावना है कि मानसून सत्र अगस्त के पहले सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।सत्र के दौरान राज्य सरकार कई विधायी कार्य पूरे करने की तैयारी में है। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक मानी जा रही है।

हंगामेदार हो सकता है मानसून सत्र
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी मानसून सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है। विपक्ष पहले ही कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है।राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, महंगाई और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस और जोरदार हंगामे की संभावना जताई जा रही है।वहीं सरकार विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, निवेश, रोजगार और जनकल्याण योजनाओं को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करने की रणनीति बना रही है।

प्रदेश के विकास की दिशा तय कर सकती है बैठक
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों नए एक्सप्रेसवे को मंजूरी मिलती है तो उत्तर प्रदेश का सड़क नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा। इससे पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी और लाखों लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।इसके साथ ही विभिन्न विभागों के प्रस्तावों और मानसून सत्र को लेकर लिए जाने वाले निर्णय भी प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे और आगामी राजनीतिक रणनीति से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लगने की उम्मीद है।
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