मेरठउत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का चर्चित अतुल पंवार हत्याकांड अब हर गुजरते दिन के साथ और भी उलझता जा रहा है। भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री और स्कूल संचालक अतुल पंवार की मौत को शुरुआत में सामान्य सर्पदंश माना गया था, लेकिन पुलिस जांच ने इस मामले को देश के सबसे सनसनीखेज हत्याकांडों में ला खड़ा किया है।पुलिस का आरोप है कि अतुल की पत्नी दामिनी ने अपने कथित प्रेमी और स्कूल वैन चालक तुषार के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि करीब तीन महीने तक चली सुनियोजित योजना का हिस्सा था। अब पुलिस की नजर उन डिजिटल सबूतों पर है, जो इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन सकते हैं।

रिमांड में खुल सकते हैं कई बड़े राज
पुलिस जल्द ही अदालत से दामिनी, तुषार, उदय और सोनू की पुलिस रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आमने-सामने पूछताछ से कई ऐसे सवालों के जवाब मिल सकते हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया जहरीला कॉमन करैत आखिर आरोपियों तक कैसे पहुंचा? पुलिस जांच में सामने आया है कि उदय और सोनू पेशेवर सपेरे नहीं हैं। ऐसे में यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि कहीं जहरीले सांपों की अवैध तस्करी का कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
डिलीट WhatsApp चैट बनेगी सबसे बड़ा सबूत
पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात से पहले और बाद में दामिनी और तुषार के बीच कई बार व्हाट्सएप कॉल और चैट हुई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि पकड़े जाने के डर से दोनों ने अपने मोबाइल से चैट डिलीट कर दी।अब साइबर सेल दोनों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। डिलीट किए गए संदेश, कॉल लॉग, मीडिया फाइल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि यही डिजिटल साक्ष्य यह स्पष्ट करेंगे कि हत्या की योजना कब बनी, किसने क्या भूमिका निभाई और वारदात से पहले क्या बातचीत हुई।
इंटरनेट सर्च हिस्ट्री भी जांच के घेरे में
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हत्या को दुर्घटना जैसा दिखाने के लिए पहले से जानकारी जुटाई गई थी। यदि ऐसे डिजिटल सबूत मिलते हैं, तो वे जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नशीली दवाइयों का स्रोत भी जांच में
पुलिस उस दवा की भी जांच कर रही है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर वारदात से पहले किया गया। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दवा कहां से खरीदी गई, किसने खरीदी और उसे घटना में कैसे इस्तेमाल किया गया। दवा की खरीद से जुड़े बिल, मेडिकल स्टोर और अन्य साक्ष्य भी खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस का दावा: तीन महीने तक बनी साजिश
पुलिस के अनुसार, यह हत्या अचानक गुस्से में नहीं की गई। जांच में अब तक मिले तथ्यों के आधार पर एजेंसियों का कहना है कि योजना कई सप्ताह पहले तैयार की गई थी। डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पूरी साजिश की टाइमलाइन तैयार करने में जुटी है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में रहने वाले 32 वर्षीय अतुल पंवार अपने घर में मृत पाए गए थे। शुरुआती जानकारी में इसे सांप के काटने से हुई मौत बताया गया था। घटनास्थल पर एक सांप भी मिला था, जिसे बाद में लोगों ने मार दिया।हालांकि मृतक के पिता ने शुरू से ही इसे हत्या बताते हुए बहू पर आरोप लगाए। इसके बाद पुलिस ने कई स्तरों पर जांच शुरू की। पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दामिनी, तुषार, उदय और सोनू को गिरफ्तार किया।जांच एजेंसियों का आरोप है कि हत्या को प्राकृतिक सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई थी ताकि किसी को शक न हो।
बीमे के पैसों की भी हो रही जांच
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक लाभ इस कथित साजिश की एक वजह था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर बीमा पॉलिसी और उससे जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, इस पहलू पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा?
सीओ पंकज लवानिया ने कहा कि पुलिस हर पहलू की गहन जांच कर रही है और जो भी व्यक्ति इस मामले में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।वहीं एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जांच अभी जारी है और पुलिस सभी तथ्यों को वैज्ञानिक तरीके से परख रही है।
अब सबकी नजर रिमांड पर
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सबसे अहम चरण पुलिस रिमांड माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ, मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों की रिकवरी के बाद कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों पर लगे आरोपों का अंतिम सत्य अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
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