नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र के बीच देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कथित नीट-यूजी पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। मंगलवार को संसद भवन में हुई INDIA ब्लॉक की रणनीतिक बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी की। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि “लोकतंत्र की जननी अपने बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करती।”खरगे ने विरोधस्वरूप अपना जन्मदिन नहीं मनाने का फैसला किया और सरकार से संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर तत्काल विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। दूसरी ओर, एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है और पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
INDIA ब्लॉक ने बनाई संयुक्त रणनीति
मंगलवार सुबह संसद भवन में INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दल, शिवसेना (उद्धव गुट) सहित कई सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति तय करना और सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा, इस पर एकजुट रुख अपनाना था।बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की और सदन में विपक्ष को पर्याप्त समय देने तथा महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग उठाई।

खरगे का सरकार पर सीधा हमला
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए छात्र प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।उन्होंने लिखा कि देश ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग के दृश्य देखे। उनका आरोप था कि न्याय की मांग कर रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया।खरगे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए उसे दबाया जाना चाहिए।
‘लोकतंत्र की जननी’ टिप्पणी बनी चर्चा का केंद्र
अपने बयान में खरगे ने कहा-
“लोकतंत्र की जननी अपने बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करती।”
यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उत्सव मनाना उचित नहीं है, इसलिए उन्होंने अपना जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय लिया।उन्होंने अपने समर्थकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों द्वारा भेजी गई शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फिलहाल जश्न का नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने का समय है।
सरकार से पूछे कई बड़े सवाल
खरगे ने केंद्र सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा—
- न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया?
- प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों हुआ?
- संसद परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी क्यों की गई?
- इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
- बार-बार पेपर लीक की घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
संसद में चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक मामले पर संसद में तत्काल विस्तृत चर्चा कराई जाए।उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी दोहराई।साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि देश में ऐसी परीक्षा प्रणाली विकसित की जाए जिसमें सुरक्षित डिजिटल प्रश्न बैंक, यादृच्छिक प्रश्नपत्र (Random Question Papers) और पारदर्शी मूल्यांकन व्यवस्था हो, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम हो।
एनडीए बैठक में पीएम मोदी का जवाब
उधर संसद में आयोजित एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है और पेपर लीक राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बजाय समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मानसून सत्र में बढ़ेगा राजनीतिक टकराव
संसद का मानसून सत्र पहले ही कई मुद्दों को लेकर गरमाया हुआ है। अब पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।विपक्ष जहां सरकार को छात्रों के भविष्य, परीक्षा प्रणाली और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपनी ओर से जांच, गिरफ्तारियों और परीक्षा प्रणाली में सुधार के कदमों को प्रमुखता से सामने रख रही है।

युवाओं का मुद्दा बना राष्ट्रीय बहस
पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बन चुका है।एक ओर विपक्ष सरकार से जवाबदेही तय करने और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है।अब सबकी नजर संसद की कार्यवाही पर टिकी है कि क्या इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा होती है और क्या सरकार तथा विपक्ष के बीच किसी सहमति का रास्ता निकलता है। फिलहाल इतना तय है कि मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक और छात्रों का मुद्दा सबसे प्रमुख राजनीतिक और संसदीय बहसों में शामिल रहेगा।
read on:https://news7hindi.com/big-decisions-of-yogi-cabinet-girl-students-will-get-scooty/
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

