लखनऊ की ‘लंदन वाली सड़क’ बनी तालाब! गंदे पानी में उतरी जनता, अर्धनग्न प्रदर्शन से फूटा गुस्सा

Editorial
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रिपोर्ट :अंकित  सिन्हा 

लखनऊउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल बनाने के दावे अक्सर सुनाई देते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है। ताजा मामला एमिटी यूनिवर्सिटी से वन वर्ल्ड सिटी को जोड़ने वाली सड़क का है, जहां हल्की बारिश के बाद सड़क पूरी तरह पानी में डूब गई। हालात ऐसे बन गए कि सड़क और तालाब में फर्क करना मुश्किल हो गया। जगह-जगह जलभराव, गड्ढों में भरा गंदा पानी और घंटों तक जाम में फंसे लोग प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलते नजर आए।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वर्षों से इस समस्या से परेशान स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हासेमऊ, मल्हौर, लौलाई और देवरिया के ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने गंदे पानी में उतरकर अर्धनग्न प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी उनकी पीड़ा महसूस नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।

‘लंदन वाली सड़क’ बनी तंज का विषय

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क को लेकर कभी बड़े-बड़े विकास के दावे किए गए थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि लोग व्यंग्य में इसे “लंदन वाली सड़क” कहने लगे हैं। कारण साफ है—बारिश होते ही सड़क गायब हो जाती है और उसकी जगह पानी का विशाल तालाब दिखाई देता है।राहगीरों का कहना है कि सड़क पर भरे पानी के कारण गड्ढे नजर नहीं आते। इससे दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा हादसों का शिकार होते हैं। कई बार लोग गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

हल्की बारिश ने खोल दी तैयारियों की पोल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति किसी भारी बारिश की नहीं, बल्कि सामान्य बारिश के बाद की है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि हल्की बारिश में ही सड़क जलमग्न हो जाती है तो लगातार होने वाली बारिश के दौरान हालात कितने भयावह होंगे।जलभराव के कारण न केवल वाहन चालकों को परेशानी हुई, बल्कि स्कूली बच्चों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और आसपास रहने वाले परिवारों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

गंदे पानी में उतरकर किया विरोध प्रदर्शन

प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए स्थानीय लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी गंदे पानी में उतर गए और अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया।प्रदर्शन का नेतृत्व आकाश यादव ने किया। उनके साथ अनूराग यादव, मनोज यादव, भूपेंद्र यादव, विजय सिंह और शिवम पांडे सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से अधिकारी केवल आश्वासन देते आ रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। मजबूर होकर उन्हें इस तरह विरोध करना पड़ा ताकि उनकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचे।

क्या हैं स्थानीय लोगों की मांगें?

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं—

  • सड़क पर स्थायी जल निकासी व्यवस्था बनाई जाए।
  • पूरी सड़क का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया जाए।
  • जलभराव वाले स्थानों की तकनीकी जांच कराई जाए।
  • निर्माण कार्य में यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो।
  • भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मामला है।

रोजाना हजारों लोगों का होता है आवागमन

एमिटी यूनिवर्सिटी, वन वर्ल्ड सिटी और आसपास विकसित हो रही कई आवासीय कॉलोनियों के कारण इस सड़क पर प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है।विश्वविद्यालय के छात्र, कर्मचारी, स्थानीय निवासी, स्कूली बच्चे और निजी कंपनियों में काम करने वाले लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क पर जलभराव का सीधा असर हजारों लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है|

गड्ढों में छिपा खतरा

बारिश के पानी ने सड़क के गड्ढों को पूरी तरह ढक दिया। इससे वाहन चालकों को यह समझना मुश्किल हो गया कि सड़क कहां समतल है और कहां गहरा गड्ढा।स्थानीय लोगों के अनुसार कई बाइक सवार फिसल चुके हैं और कई चारपहिया वाहन भी पानी में फंस गए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

नगर निगम पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।लोग पूछ रहे हैं कि यदि राजधानी की प्रमुख सड़कों का यह हाल है तो अन्य इलाकों की स्थिति कैसी होगी? स्मार्ट सिटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के दावों के बीच सड़क पर जलभराव की तस्वीरें प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर साल बारिश के मौसम में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

जलभराव और प्रदर्शन की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि राजधानी में यदि एक मुख्य सड़क का यह हाल है तो विकास के दावों का क्या अर्थ रह जाता है।कुछ लोगों ने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया, जबकि कई लोगों ने जल निकासी व्यवस्था में सुधार की मांग की।

अब जिम्मेदारों पर टिकी निगाहें

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।फिलहाल यह घटना राजधानी की बुनियादी सुविधाओं और शहरी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब सबकी नजर प्रशासन पर है कि वह इस समस्या को अस्थायी मरम्मत तक सीमित रखता है या फिर वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाता है।

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