बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भारत-नेपाल सीमा पर लंबे समय से सक्रिय एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो मोटी रकम लेकर लोगों को अवैध तरीके से सीमा पार कराने का काम करता था। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की संयुक्त जांच में इस गिरोह के काम करने का तरीका सामने आया है, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। अब इस पूरे मॉड्यूल के तार कई राज्यों तक जुड़ते दिखाई दे रहे हैं और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।दरअसल भारत-नेपाल सीमा देश की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में यहां सक्रिय किसी भी अवैध नेटवर्क को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाता है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह किसी भी व्यक्ति को सीमा पार कराने से पहले उसकी पूरी पड़ताल करता था। सबसे पहले यात्रियों की पहचान की जाती थी, फिर उनसे यात्रा का उद्देश्य पूछा जाता था और उनके पास मौजूद दस्तावेजों की जांच की जाती थी। इसके बाद यह तय किया जाता था कि संबंधित व्यक्ति को सीमा पार कराने में कितना जोखिम है और उसी आधार पर उससे मोटी रकम वसूली जाती थी।

यानी इस पूरे नेटवर्क ने अवैध सीमा पार कराने को एक संगठित कारोबार का रूप दे दिया था। जितना अधिक जोखिम, उतनी अधिक कीमत। यही इस गिरोह का सबसे बड़ा फॉर्मूला था।जांच एजेंसियों ने इस मामले में तीन स्थानीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें इनोवा चालक राहुल कुमार शामिल है, जो रुपईडीहा के केवलपुर गांव का निवासी बताया जा रहा है। उसके साथ सुरेश कुमार पाठक और दिलीप को भी गिरफ्तार किया गया है, जो महानंद पुरवा क्षेत्र के रहने वाले हैं। तीनों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनसे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह केवल तीन लोगों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को सीमा पार कराया और किन-किन राज्यों तक इनके संपर्क फैले हुए थे।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा आरोपियों की संपत्तियों को लेकर हुआ है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पिछले कुछ वर्षों में इन लोगों ने जमीन, मकान और अन्य माध्यमों से काफी संपत्ति अर्जित की है। अब पुलिस इनके बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और आय के स्रोतों की गहन जांच कर रही है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं, तो आरोपियों पर आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की जा सकती है।इस बीच पुलिस की जांच में पंजाब कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही पंजाब पुलिस को सूचित कर दिया गया था। शुक्रवार सुबह पंजाब पुलिस की एक टीम बहराइच के रुपईडीहा पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ पूरी कानूनी प्रक्रिया में शामिल रही।
अब इस मामले में वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर पंजाब ले जाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि विक्रमजीत से पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के संपर्क नेपाल के भीतर किन लोगों से थे और क्या इस नेटवर्क का इस्तेमाल केवल अवैध आवाजाही के लिए किया जाता था या इसके पीछे कोई बड़ा आपराधिक या संगठित गिरोह भी सक्रिय था।सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल लेन-देन और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं। इससे यह पता लगाया जाएगा कि नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और किन-किन लोगों के संपर्क में था।राष्ट्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञों का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर सक्रिय ऐसे नेटवर्क केवल अवैध आवाजाही तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके जरिए तस्करी, फर्जी दस्तावेज, आर्थिक अपराध और अन्य गंभीर गतिविधियों की आशंका भी रहती है। इसी वजह से इस मामले की जांच को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।

फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मॉड्यूल की एक-एक परत खोलने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। यदि जांच में बड़े आर्थिक लेन-देन या संगठित अपराध के प्रमाण सामने आते हैं, तो इस मामले में कई अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारत-नेपाल सीमा पर यह नेटवर्क कब से सक्रिय था? इसने अब तक कितने लोगों को सीमा पार कराया? इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं? और क्या इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हैं?इन सभी सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियां तलाश रही हैं। फिलहाल इतना तय है कि बहराइच में सीमा पार कराने वाले इस नेटवर्क का खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है, जिन पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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