Airtel का बड़ा एक्शन: 98.4 बिलियन स्पैम कॉल ब्लॉक, 4.4 बिलियन मैसेज की पहचान

Editorial
8 Min Read

लखनऊ भारत में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, शॉपिंग, सरकारी सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए लोग मोबाइल और इंटरनेट पर पहले से ज्यादा निर्भर हो गए हैं। इसके साथ ही साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। स्पैम कॉल, फिशिंग मैसेज, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड और पहचान की नकल कर ठगी जैसे मामले डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।इसी बढ़ते खतरे के बीच एयरटेल ने अपने एआई-संचालित ‘सेफ नेटवर्क’ इनिशिएटिव के तहत बड़ी संख्या में संदिग्ध संचार को ब्लॉक करने का दावा किया है। कंपनी के मुताबिक, सितंबर 2024 में नेटवर्क स्तर पर एआई आधारित स्पैम डिटेक्शन सिस्टम शुरू करने के बाद से अब तक 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल्स की पहचान की गई है। इसके अलावा 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की भी पहचान की गई है।एयरटेल का कहना है कि उसकी सुरक्षा प्रणाली का उद्देश्य डिजिटल खतरों की पहचान नेटवर्क स्तर पर ही करना है, ताकि ग्राहकों को हर खतरे के लिए अलग ऐप इंस्टॉल करने या मैन्युअल रूप से संदिग्ध नंबरों की रिपोर्ट करने पर निर्भर न रहना पड़े।

डिजिटल फ्रॉड का दायरा हुआ बड़ा

पहले साइबर ठगी के मामले मुख्य रूप से संदिग्ध कॉल और फिशिंग मैसेज तक सीमित माने जाते थे। अब ठगी के तरीके काफी ज्यादा जटिल हो गए हैं। साइबर अपराधी फर्जी बैंकिंग अनुरोध, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, ओटीपी हासिल करने की कोशिश, नकली वेबसाइट और दुर्भावनापूर्ण लिंक के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मोबाइल नंबर और इंटरनेट कनेक्शन डिजिटल लेनदेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में टेलीकॉम नेटवर्क पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना भी डिजिटल सुरक्षा का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।एयरटेल के अनुसार, इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने नेटवर्क इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मिलाकर अपने सेफ नेटवर्क सिस्टम को विकसित किया है।

98.4 बिलियन स्पैम कॉल्स की पहचान का दावा

एयरटेल ने सितंबर 2024 में अपना नेटवर्क आधारित एआई स्पैम डिटेक्शन सॉल्यूशन लॉन्च किया था। कंपनी के मुताबिक, इस सिस्टम ने लॉन्च के बाद से 98.4 बिलियन से ज्यादा स्पैम कॉल्स की पहचान की है।इस तरह की तकनीक का उद्देश्य ऐसे कॉल पैटर्न की पहचान करना है, जो सामान्य उपयोगकर्ता संचार से अलग दिखाई देते हैं। संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर सिस्टम संभावित स्पैम की पहचान करने में मदद करता है।एयरटेल के अनुसार, नेटवर्क स्तर पर काम करने वाली इस व्यवस्था का फायदा यह है कि सुरक्षा प्रक्रिया बैकग्राउंड में चलती रहती है और ग्राहक को हर बार खुद किसी संदिग्ध नंबर की पहचान करने की जरूरत नहीं पड़ती।

4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की भी पहचान

कॉल के साथ-साथ स्पैम मैसेज भी डिजिटल फ्रॉड का एक प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। कई बार मैसेज में बैंक, सरकारी विभाग, डिलीवरी सेवा, नौकरी या निवेश से जुड़े दावे किए जाते हैं और यूजर को किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है।एयरटेल का दावा है कि उसके एआई आधारित सेफ नेटवर्क ने अब तक 4.4 बिलियन से ज्यादा स्पैम मैसेज की पहचान की है। कंपनी के मुताबिक, इस तरह के सिस्टम का उद्देश्य संभावित जोखिम वाले संचार को पहचानने में मदद करना है।

1.62 मिलियन से ज्यादा खतरनाक लिंक ब्लॉक

एयरटेल ने दुर्भावनापूर्ण और संदिग्ध लिंक को लेकर भी अपने सुरक्षा सिस्टम का विस्तार किया है। कंपनी के अनुसार, उसने मोबाइल और वाई-फाई ब्रॉडबैंड ग्राहकों के लिए एसएमएस, मैसेजिंग ऐप्स, ईमेल और ब्राउजर रीडायरेक्ट के जरिए साझा किए गए 1.62 मिलियन से ज्यादा दुर्भावनापूर्ण लिंक को ब्लॉक किया है।ऐसे लिंक यूजर्स को फर्जी वेबसाइट पर ले जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने, लॉगिन डिटेल्स चुराने या वित्तीय धोखाधड़ी की कोशिश में किया जा सकता है। नेटवर्क स्तर पर इनकी पहचान और ब्लॉकिंग को डिजिटल सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के तौर पर देखा जा सकता है।

ओटीपी फ्रॉड पर भी एआई की नजर

डिजिटल ठगी में ओटीपी हासिल करने की कोशिश एक महत्वपूर्ण तरीका है। साइबर अपराधी कई बार बैंक कर्मचारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या किसी संस्था का अधिकारी बनकर यूजर से संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए कहते हैं।एयरटेल ने ओटीपी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए भी एआई आधारित सुरक्षा समाधान शुरू करने की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों की पहचान करना है, जहां किसी संदिग्ध बातचीत के दौरान यूजर को ओटीपी या अन्य संवेदनशील क्रेडेंशियल साझा करने के लिए बरगलाया जा रहा हो।

बिजनेस नेम डिस्प्ले से फर्जी कॉल की पहचान में मदद

एयरटेल ने बिजनेस नेम डिस्प्ले सुविधा भी शुरू की है। इसका उद्देश्य यूजर्स को सत्यापित एंटरप्राइज कॉल्स और संभावित रूप से संदिग्ध नंबरों के बीच अंतर समझने में मदद करना है।कंपनी के मुताबिक, इससे बैंकिंग या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर की जाने वाली प्रतिरूपण आधारित ठगी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल सुरक्षा में नेटवर्क की भूमिका बढ़ी

एयरटेल की यह पहल टेलीकॉम सेक्टर में बदलती भूमिका की ओर भी संकेत करती है। पहले नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य यूजर्स को कॉल और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना था। अब डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नेटवर्क कंपनियों से सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा भी बढ़ रही है।कंपनी का कहना है कि उसका सेफ नेटवर्क इसी दिशा में विकसित किया गया है, जिसमें एआई और नेटवर्क इंटेलिजेंस की मदद से संभावित डिजिटल खतरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।भारत में डिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में नेटवर्क स्तर पर स्पैम कॉल, संदिग्ध मैसेज और दुर्भावनापूर्ण लिंक की पहचान करने वाली तकनीकें यूजर्स के लिए सुरक्षा की अतिरिक्त परत उपलब्ध करा सकती हैं।  किसी भी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था के साथ यूजर्स के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है और उन्हें ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

Read on:http://क्यों हो रही है महिलाये हैवानियत का शिकार ?

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment