
नई दिल्ली भारत और नेपाल के सदियों पुराने और गहरे सांस्कृतिक-राजनैतिक संबंधों में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। नेपाल के नव-नियुक्त विदेश मंत्री शिसिर खनाल शुक्रवार को देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका बेहद गर्मजोशी और भव्य स्वागत किया गया। यह तीन दिवसीय दौरा न केवल कूटनीतिक रूप से बेहद खास है, बल्कि इस साल की शुरुआत में नेपाल के विदेश मंत्री का पदभार संभालने के बाद शिसिर खनाल की यह पहली आधिकारिक और सबसे महत्वपूर्ण भारत यात्रा है। इस हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक हलचल को लेकर दोनों देशों के गलियारों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शनिवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक से दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा और अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी, जो आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इस बेहद संवेदनशील और रणनीतिक दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर आधिकारिक तौर पर खुशी जाहिर करते हुए पोस्ट किया कि भारत की धरती पर नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल का उनकी पहली आधिकारिक यात्रा पर हार्दिक स्वागत है। नियमित उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की हमारी पुरानी और अटूट परंपरा को जारी रखते हुए, यह यात्रा निश्चित रूप से भारत और नेपाल के बीच की विशेष और ऐतिहासिक साझेदारी को और अधिक मजबूत तथा प्रगाढ़ बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। कूटनीतिक जानकारों की मानें तो इस यात्रा के पीछे दोनों देशों का मकसद सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अपने पारंपरिक और रोटी-बेटी के रिश्तों को एक नए आर्थिक व रणनीतिक ऊंचाइयों पर ले जाना है।

नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकारों के सामने भारत के इरादों को पूरी तरह साफ कर दिया। उन्होंने बेहद प्रभावशाली तरीके से कहा कि नेपाल के विदेश मंत्री कुछ समय पहले ही भारत की धरती पर कदम रख चुके हैं और शनिवार को वह हमारे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से आमने-सामने की मुलाकात करेंगे। भारत और नेपाल के बीच चर्चा का एजेंडा बेहद व्यापक, गहरा और बहुआयामी है। इसमें जमीनी स्तर पर विकास सहयोग से लेकर दोनों देशों के नागरिकों के बीच के आपसी संबंध (जन-संबंध), व्यापार, सीमा पार निवेश और सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों की इस मुलाकात में इन तमाम ज्वलंत और भविष्य के पहलुओं पर खुलकर और विस्तार से चर्चा की जाएगी। प्रवक्ता ने साफ तौर पर दोहराया कि भारत अपनी तरफ से नेपाल के साथ इस बहुआयामी और अटूट साझेदारी को और ज्यादा सशक्त, आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध और इच्छुक है। नेपाल के विदेश मंत्रालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस महाबैठक में दोनों पक्ष मुख्य रूप से द्विपक्षीय व्यापार की बाधाओं को दूर करने, नए निवेश को आकर्षित करने, डिजिटल और फिजिकल संपर्क (कनेक्टिविटी) को बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र विशेषकर जलविद्युत के आयात-निर्यात और जन-जन के आपसी संबंधों सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की सीमाओं को और विस्तार देने के उद्देश्य से आपसी हित के रणनीतिक मामलों पर ठोस चर्चा करेंगे। नेपाली मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच नियमित रूप से होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों के आदान-प्रदान का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सदियों पुराने संबंधों को और अधिक ताकत मिलने की पूरी उम्मीद है। तीन दिनों के इस तूफानी कूटनीतिक दौरे के बाद विदेश मंत्री खनाल 7 जून को वापस काठमांडू के लिए उड़ान भरेंगे।

काठमांडू में विदेश मंत्रालय के एक बेहद उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, हाल ही में हुई राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने की भारत यात्रा के दौरान उठाई गई प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और परिवहन के साधनों को पूरी तरह आधुनिक बनाने पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा। इस द्विपक्षीय महाचर्चा में मुख्य रूप से भारत और नेपाल के बीच रेल नेटवर्क का विस्तार, अत्याधुनिक सड़कों का निर्माण, हवाई संपर्क में सुधार और दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच आवाजाही को और अधिक सुगम व निर्बाध बनाना सबसे प्रमुख बिंदु होंगे। इस एजेंडे से साफ है कि दोनों देश अब केवल कागजी दावों से आगे बढ़कर जमीन पर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लागू करने की तैयारी में हैं। यह भी दिलचस्प है कि विदेश मंत्री खनाल ने इससे पहले अप्रैल के महीने में मॉरीशस में आयोजित नौवें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान भी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य क्षेत्रीय नेताओं के साथ बेहद अनौपचारिक लेकिन गंभीर चर्चा की थी। लेकिन नई दिल्ली का यह आधिकारिक दौरा इसलिए भी सबसे ज्यादा धमाके दार और रणनीतिक माना जा रहा है क्योंकि यह नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने की भारत यात्रा के ठीक बाद हो रहा है, जो 1 जून को शुरू हुई थी। लामिछाने ने बुधवार को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने बेहद सकारात्मक संदेश देते हुए कहा था कि नेपाल और भारत अपनी साझा सभ्यतागत विरासत, डिजिटल गलियारों और बिना किसी रुकावट के निर्बाध कनेक्टिविटी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करके प्रगति, विकास और आपसी अटूट विश्वास से परिभाषित एक नए युग की साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने एक्स पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए यह भी साफ किया कि उनकी पार्टी आरएसपी, नेपाल और भारत के करोड़ों लोगों की साझा आर्थिक समृद्धि और खुशहाली के लिए इन विशाल संभावनाओं को जल्द से जल्द हकीकत में बदलने के लिए बेहद उत्सुक और तत्पर है। ऐसे में विदेश मंत्री शिसिर खनाल की इस यात्रा को रबी लामिछाने और पीएम मोदी के बीच बनी आपसी सहमति को जमीन पर उतारने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति और व्यापारिक समीकरणों में एक बड़ा और सकारात्मक भूचाल आना तय है।
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