“तीर्थयात्री बनकर पहुंचे, फिर गुरुद्वारे की छत से छेड़ दी चुनौती! नगरासू में 72 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा”

Editorial
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उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पैदा हुए तनाव ने पूरे क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है। जो लोग कुछ दिन पहले तक श्रद्धालु और सेवादार के रूप में गुरुद्वारे में रह रहे थे, वही अचानक सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए। सात निहंगों के गुरुद्वारे की छत पर चढ़ने और टकराव की स्थिति पैदा होने के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान किया है, बल्कि खुफिया तंत्र और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन दिन तक गुरुद्वारे में रहे, किसी को नहीं हुआ शक

जानकारी के मुताबिक सात निहंग तीन दिन पहले नगरासू पहुंचे थे। वे हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए सामान्य तीर्थयात्रियों की तरह गुरुद्वारे में ठहरे हुए थे। इस दौरान उन्होंने सेवा कार्यों में भी हिस्सा लिया और गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत भी की। सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था। लेकिन शनिवार शाम अचानक हालात बदल गए। बताया जा रहा है कि निहंग अपने साथ बड़ी संख्या में लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की मांग कर रहे थे। जब इस मांग पर सहमति नहीं बनी तो विवाद बढ़ता चला गया। देखते ही देखते मामला इतना गंभीर हो गया कि सातों निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।

श्रद्धालु समझे गए लोग कैसे बन गए चुनौती?

स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन लोगों को श्रद्धालु और सेवादार समझा जा रहा था, वे अचानक टकराव के रास्ते पर कैसे पहुंच गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल है। रविवार को भी लोग इसी चर्चा में जुटे रहे कि आखिर तीन दिनों तक गुरुद्वारे में रहने वाले लोगों की मंशा क्या थी और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। गुरुद्वारे के आसपास पुलिस, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बल लगातार तैनात हैं। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

 

बंधक बनाए जाने का दावा, बातचीत भी रही बेनतीजा

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक बाबा बेहंत सिंह के अनुसार निहंग अपने कुछ साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि विवाद के दौरान दो लोगों को बंधक बना लिया गया था। इनमें से एक व्यक्ति को शनिवार देर रात छोड़ दिया गया, जबकि एक सेवादार के अभी भी उनके कब्जे में होने की बात कही जा रही है। प्रबंधन और प्रशासन ने कई दौर की बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसी वजह से तनाव लगातार बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

गुरुद्वारे की छत पर जमा किए गए पत्थर और नुकीली वस्तुएं

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू गुरुद्वारे की छत पर जमा किया गया सामान है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार छत पर ईंट-पत्थर और कई नुकीली वस्तुएं रखी गई हैं। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी ने भी इसकी पुष्टि की है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि पुलिस, आईटीबीपी और प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।

श्रद्धालुओं पर भी पड़ा असर, लंगर व्यवस्था प्रभावित

नगरासू गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और लंगर प्रसाद ग्रहण करते हैं। लेकिन तनावपूर्ण हालात का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई और बड़ी मात्रा में तैयार भोजन का उपयोग नहीं हो सका। गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई थी। धार्मिक स्थल पर तनाव पैदा होने से श्रद्धालुओं में भी चिंता बढ़ गई है।

2007-08 के विवाद की यादें फिर ताजा

गुरुद्वारे के पास रहने वाली रजनी देवी बताती हैं कि वर्ष 2007-08 में भी यहां विवाद की स्थिति बनी थी, लेकिन तब हालात इतने गंभीर नहीं हुए थे। इस बार जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने लोगों को ज्यादा डरा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरासू जैसे शांत क्षेत्र में इस तरह की घटना पहली बार देखने को मिली है। क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने भी कहा कि हालात ने लोगों के बीच चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

चमोली-अल्मोड़ा सीमा पर हाई अलर्ट

घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। चमोली और अल्मोड़ा जनपद की सीमाओं पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। पाडुंवाखाल, नागचूलाखाल और माईथान क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन के अनुसार आईटीबीपी की एक प्लाटून, पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की टीमों को लगातार निगरानी में लगाया गया है। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।

सबसे बड़ा सवाल: खुफिया तंत्र क्यों रहा बेखबर?

नगरासू गुरुद्वारे में हुए इस पूरे घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर खड़ा कर दिया है। 16 जून को कर्णप्रयाग में विवाद होने के बाद भी उन लोगों की गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी गई, जो तीन दिन तक गुरुद्वारे में रहकर अपनी रणनीति तैयार करते रहे? क्या सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को समय रहते पहचानने में विफल रहीं? क्या स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र सक्रिय नहीं था? इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई से ही सामने आएंगे।फिलहाल नगरासू गुरुद्वारे के आसपास हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द समाधान निकालकर क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करेगा और हेमकुंड यात्रा मार्ग पर फिर से शांति का माहौल लौटेगा।

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