नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही बवाल! रातभर जाम रहा हाईवे, सुबह आंसू गैस छोड़ पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा

Editorial
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दतिया मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के टिकट को लेकर मचे सियासी बवाल और झांसी-ग्वालियर हाईवे पर हुए चक्का जाम के बाद जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी गई है। इसके साथ ही बिना प्रशासनिक अनुमति सभा, जुलूस, रैली, प्रदर्शन और पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।प्रशासन का कहना है कि यह फैसला आगामी उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और हिंसामुक्त माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो चुका है और अगले आदेश तक लागू रहेगा।

टिकट विवाद के बाद बढ़ी सियासी हलचल

दतिया विधानसभा उपचुनाव इस समय पूरे प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के टिकट को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलचल तेज है। टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं के विरोध, प्रदर्शन और सड़क पर उतरे समर्थकों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 10 जुलाई की रात झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया गया। देखते ही देखते लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। घंटों तक यात्री हाईवे पर फंसे रहे और यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ।इन्हीं घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।

क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?

अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब बिना पूर्व अनुमति कोई भी राजनीतिक दल, संगठन या व्यक्ति सार्वजनिक सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं कर सकेगा।आदेश के तहत सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, फरसा, भाला, चाकू सहित किसी भी प्रकार के घातक हथियार लेकर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी रोक लगा दी गई है।प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, डीजे या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। चुनावी प्रचार के दौरान ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर

चुनावी माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखने का फैसला किया है।आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, पोस्टर, बैनर, भाषण, नारे या अन्य माध्यमों से ऐसी सामग्री प्रसारित नहीं कर सकेगा जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़े, अफवाह फैले या कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भड़काऊ या भ्रामक सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आचार संहिता का होगा कड़ाई से पालन

दतिया विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और आदर्श आचार संहिता का पूरी सख्ती से पालन कराया जाएगा।इसके अलावा प्रशासन ने मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 तथा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के सभी प्रावधान लागू करने के निर्देश दिए हैं।चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर, बैनर या दीवार लेखन करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

किसे मिलेगी छूट?

धारा-163 के तहत जारी प्रतिबंध आम नागरिकों और राजनीतिक गतिविधियों पर लागू होंगे।हालांकि पुलिस, होमगार्ड, सीआरपीएफ, केंद्रीय सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा न्यायिक अधिकारियों को उनके सरकारी दायित्वों के निर्वहन के दौरान इस आदेश से छूट दी गई है।

उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति सभा करता है, जुलूस निकालता है, प्रतिबंधित हथियार लेकर चलता है या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने वालों पर निर्वाचन आयोग के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई संभव है।

कलेक्टर का स्पष्ट संदेश

दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराना है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने बताया कि जिले में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

राजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता

धारा-163 लागू होने के बाद दतिया की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। अब राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति प्रशासनिक अनुमति और निर्धारित नियमों के अनुसार बनानी होगी।विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश के बाद चुनाव प्रचार का तरीका बदल सकता है। बड़े रोड शो, रैलियां और शक्ति प्रदर्शन सीमित हो सकते हैं, जबकि डिजिटल प्रचार और घर-घर जनसंपर्क पर अधिक जोर देखने को मिल सकता है।

अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर

दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले ही राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में धारा-163 लागू होने के बाद चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल प्रशासन के इन सख्त निर्देशों का किस तरह पालन करते हैं और चुनाव प्रचार को किस रणनीति के साथ आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और पूरे जिले में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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