₹6 लाख में बिहार पुलिस की नौकरी! ब्लूटूथ, फर्जी अभ्यर्थी और सॉल्वर गैंग का बड़ा भंडाफोड़, 24 गिरफ्तार

Editorial
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बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भरोसे को झकझोर देने वाला एक बड़ा भर्ती घोटाला सामने आया है। बिहार पुलिस रेडियो ऑपरेटर (सिपाही) भर्ती परीक्षा में नकल कराने वाले एक संगठित सॉल्वर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने का दावा करते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक अभ्यर्थी से करीब छह लाख रुपये तक वसूले जाते थे। इसके बदले गिरोह ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराता, जरूरत पड़ने पर फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा में बैठाता और सुरक्षा के नाम पर अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र तथा ब्लैंक चेक तक अपने कब्जे में रख लेता था।अब तक इस मामले में सहरसा, खगड़िया, किशनगंज, जमुई और मुंगेर समेत पांच जिलों से कुल 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड सरोज अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश में कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है।

ऐसे खुला करोड़ों के फर्जीवाड़े का राज

पूरे नेटवर्क का खुलासा उस समय हुआ, जब सहरसा के एक परीक्षा केंद्र पर मधेपुरा निवासी अभ्यर्थी सौरभ संदिग्ध गतिविधियों के कारण पकड़ा गया। जांच के दौरान उसके पास से ब्लूटूथ डिवाइस मिलने पर पुलिस को नकल की आशंका हुई। जब उसका मोबाइल फोन खंगाला गया तो एक के बाद एक ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश कर दिया।सहरसा मुख्यालय डीएसपी केपी सिंह के अनुसार, मोबाइल में मिले चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के कई सदस्यों की पहचान की। इसके बाद लगातार छापेमारी कर कई जिलों से आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

10 से ज्यादा जिलों तक फैला था नेटवर्क

जांच में पता चला है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित नेटवर्क था। इसके तार सहरसा, भागलपुर, पटना, गया, भोजपुर, नवादा, मधुबनी, खगड़िया, किशनगंज, जमुई और मुंगेर सहित 10 से अधिक जिलों तक फैले हुए थे।गिरोह में अलग-अलग लोगों की अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई अभ्यर्थियों से संपर्क करता था, कोई पैसे की वसूली करता था, कोई फर्जी दस्तावेज तैयार करता था, जबकि कुछ सदस्य परीक्षा केंद्रों तक ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य तकनीकी उपकरण पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटी है।

छह लाख रुपये में होती थी ‘पास कराने’ की डील

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों को पुलिस भर्ती परीक्षा में पास कराने के लिए करीब छह लाख रुपये की डील तय होती थी। रकम का एक हिस्सा पहले लिया जाता था, जबकि बाकी चयन होने के बाद देने की बात होती थी।गिरोह अपनी सुरक्षा के लिए अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और ब्लैंक चेक अपने पास रखता था, ताकि कोई उम्मीदवार बाद में मुकर न सके। पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से गिरोह ने कई अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाया होगा।

खगड़िया से बड़ी बरामदगी

खगड़िया पुलिस ने इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से नौ मोबाइल फोन, सात ब्लैंक चेक, दो कार, एक बाइक, आठ एडमिट कार्ड, एटीएम कार्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे गिरोह के वित्तीय लेन-देन, अन्य सहयोगियों और संभावित अभ्यर्थियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

मास्टरमाइंड सरोज की तलाश जारी

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे रैकेट का संचालन मधुबनी जिले का रहने वाला सरोज करता था। वही अभ्यर्थियों से संपर्क कराने, पैसे की डील तय करने और गिरोह के सदस्यों के बीच समन्वय बनाने का काम करता था। फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।अधिकारियों का मानना है कि सरोज की गिरफ्तारी के बाद इस भर्ती फर्जीवाड़े से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या गिरोह का संबंध अन्य भर्ती परीक्षाओं से भी रहा है।

तकनीक के सहारे नकल का नया तरीका

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह बेहद छोटे ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करता था, जिन्हें कान के भीतर आसानी से छिपाया जा सकता था। बाहर बैठा व्यक्ति प्रश्नपत्र मिलने के बाद उत्तर उपलब्ध कराता था और अभ्यर्थी उन्हें सुनकर उत्तर पुस्तिका में लिख देता था। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर फर्जी परीक्षार्थी बैठाने की भी व्यवस्था की जाती थी।पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस भर्ती परीक्षा में ऐसे कितने अभ्यर्थी इस नेटवर्क के जरिए शामिल हुए और क्या किसी परीक्षा केंद्र के कर्मचारी या अन्य लोग भी इस साजिश में शामिल थे।

निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल

इस खुलासे ने एक बार फिर सरकारी भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों मेहनती अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन ऐसे संगठित गिरोह उनकी मेहनत पर पानी फेरने का प्रयास करते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही कई अन्य गिरफ्तारियां हो सकती हैं।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परीक्षा प्रणाली में तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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